भूकंप पर निबंध (प्राकृतिक आपदा)

[प्राकृतिक आपदा] भूकंप (Earthquake) पर छोटे व बड़े निबंध [Long & Short essay Writing on Earthquake in Hindi]

[प्राकृतिक आपदा] भूकंप (Earthquake)

पृथ्वी की सतह के हिलने और कांपने को भूकंप के रूप में जाना जाता है। भूकंप को सबसे खतरनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है क्योंकि वे जीवन और संपत्ति को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। भूकम पे निबंध छोटे बच्चो और कॉलेज छात्रों के लिए निबंध प्रस्तुत किया गया है।

#1. [100-150 Words] भूकंप -भूचाल (Bhukamp)

धरती के अचानक हिलने की घटना भूकंप कहलाती है। जब पृथ्वी के आंतरिक गर्म पदार्थों के कारण हलचल उत्पन्न होती है, तो भूकंप की स्थिति उत्पन्न होती है। कभी भूकंप हल्की तो कभी भारी तीव्रता का होता है। कम तीव्रता वाला भूकंप आने पर क्षेत्र-विशेष में धरती केवल हिलती महसूस होती है लेकिन इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। अधिक तीव्रता वाला भूकंप कभी-कभी भारी क्षति पहुँचाता है। कच्चे और कमज़ोर मकान ढह जाते हैं, चल-अचल संपत्ति का भारी नुकसान होता है। सैंकड़ों मनुष्य मकान के मलबे में दबकर मर जाते हैं। हज़ारों घायल हो जाते हैं। लोग बेघर-बार होकर अस्थायी निवास में रहने के लिए विवश होते हैं। परिस्थितियों के सामान्य बनाने में कई महीने या कई वर्ष लग जाते हैं। भूकंप को रोका नहीं जा सकता परंतु सावधानियाँ बरतने से इससे होने वाली क्षति ज़रूर कम की जा सकती है। इससे बचाव के लिए भूकंपरोधी भवनों का निर्माण करना चाहिए। भूकंप आने पर घबराना नहीं चाहिए बल्कि आवश्यक सावधानियाँ बरतनी चाहिए। भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, इसका मिल-जुलकर मुकाबला करना चाहिए।

#2. [400-500 Words] भूकंप पर निबंध-essay on earthquake in Hindi

भूमिका : भूकंप पृथ्वी का अपनी धुरी से हिलकर कम्पन करने की स्थिति को भूकम्प या भूचाल कहा जाता है। कभी-कभी तो यह स्थिति बहुत भयावह हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी के ऊपर स्थित जड़-चेतन हर प्राणी और पदार्थ का या तो विनाश हो जाता है या फिर वह सर्वनाश की-सी स्थिति में पहुंच जाता है। जापान के विषय में तो प्रायः सुना जाता है कि वहां तो अक्सर भूकम्प आकर विनाशलीला प्रस्तुत करते ही रहते हैं। इस कारण लोग वहां लकड़ियों के बने घरों में रहते हैं। इसी प्रकार का एक भयानक भूकम्प बहुत वर्षों पहले अविभाजित भारत के कोटा नामक स्थान पर आया था। उसने शहर के साथ-साथ हजारों घर-परिवारों का नाम तक भी बाकी नहीं रहने दिया था।

अभी कुछ वर्षों पहले गढ़वाल और महाराष्ट्र के कुछ भागों को भूकम्प के दिल दहला देने वाले हादसों का शिकार होना पड़ा था। प्रकृति की यह कैसी लीला है कि वह मानव-शिशुओं के घर-घरौंदों को तथा स्वयं उनको भी कच्ची मिट्टी के खिलौनों की तरह तोड़-मरोड़कर रख देती है। पहले यह भूकम्प गढ़वाल के पहाड़ी इलाकों में आया था, जहां इसने बहुत नुकसान पहुंचाया था। थोड़े दिन पश्चात् महाराष्ट्र के एक भाग में फिर एक भूकम्प आया जिसने वहां सब कुछ मटियामेट कर दिया था। महाराष्ट्र में धरती के जिस भाग पर भूकम्प के राक्षस ने अपने पैर फैला दिए थे वहाँ तो आस-पास के मकानों के खण्डहर बन गए थे। उन मकानों में फंसे लोग कुछ तो काल के असमय ग्रास बन गए थे, कुछ लंगड़े-लूले बन चुके थे। एक दिन बाद समाचार में पढ़ा कि वहां सरकार और गैर-सरकारी स्वयं-सेवी संस्थाओं के स्वयंसेवक दोनों राहत कार्यों में जुटे हुए थे। ये संस्थाएं अपने साधनों के अनुरूप सहृदयता का व्यवहार करती हुई पीड़ितों को वास्तविक राहत पहुंचाने का प्रयास कर रही थीं।

भूकम्प कितना भयानक था यह दूरदर्शन में वहां के दृश्य देखकर अन्दाजा हो गया था। जिन भागों पर भूकम्प का प्रकोप था वहां सब कुछ समाप्त हो चुका था। हल जोतने वाले किसानों के पशु तक नहीं बचे थे। दुधारू पशुओं का अन्त हो चुका था। सैकड़ों लोग मकानों के ढहने और धरती के फटने से मृत्यु को प्राप्त हो गए थे। इस प्रकार हंसता-खेलता संसार वीरान होकर रह जाता है। सब ओर गहरा शून्य तथा मौत का-सा सन्नाटा छा जाता है। कभी-कभी मैं सोचता हूं कि जापान के लोग कैसे रहते होंगे जहां इस प्रकार के भयावह भूकम्प आए दिन आते रहते हैं।

26 जनवरी, 2001 को गुजरात सहित पूरे भारत ने भूकंप का कहर देखा। भुज सहित संपूर्ण गुजरात में भारी जान-माल का नुकसान हुआ। 8 अक्टूबर, 2005 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और उससे सटे भारतीय कश्मीर में दिल दहला देने वाला जो भूकंप आया उसमें जहाँ एक लाख से अधिक लोंग काल के गाल में समा गए, वहीं लाखों लोग घायल हुए। अरबों रुपए की संपत्ति की हानि हुई।

भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई उपकरण-यंत्र विकसित नहीं हुआ है, जिससे यह बात पता चल सके कि अमुक-अमुक क्षेत्रों में भूकंप आने वाला है। भूकंप के आते समय ‘रिक्टर स्केल’ पर सिर्फ उसकी क्षमता का ही माप लिया जा सकता है। जापान, पेरू व अमेरिका के कुछ राज्यों में जहां भूकंप के झटके अकसर महसूस किए जाते हैं, वहां के वैज्ञानिकों ने भूकंपरोधी मकानों (Earthquake Resistance) का निर्माण किया है। भारत के भूकम्प प्रमाणित क्षेत्रों में भी ‘भूकंपरोधी’ मकानों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सरकार को कारगर नीति बनानी चाहिए।

#3. [600-700 Words] Bhukamp par nibandh भूकंप निबंध हिंदी में

भूमिका : प्रकृती उस ईशवर की रचना होने के कारण अजय है। मनुष्य आदि काल से प्रकृति की शक्तियों के साथ संघर्ष करता रहा है। उसने अपनी बुद्धि साहस एवं शक्ति के बल पर प्रकृति के अनेक रहस्य का उद्घाटन करने में सफलता प्राप्त की है लेकिन इस प्रकृति की शक्तियों पर पूर्ण अधिकार करने की सामर्थ्य मनुष्य में नहीं है। प्रकृति अनेक रूपो में हमारे सामने आती है। ये कभी अपना कोमल और सुखदायी रूप दिखाती है। तो कभी ऐसा कठोर रूप धारण करती है कि मनुष्य इसके सामने विवश और असहाय हो जाता है। आंधी तूफान, अकाल, अनावृष्टि अतिवृष्टि तथा भूकम्प ऐसे ही प्रकोप है।

भूकम्प क्या है: भूमि के हिलने को भूचाल, भूकंप की संज्ञा दी जाती है। धरती का कोई भी अंग ऐसा नहीं बचा जहां कभी ना कभी भूकंप के झटके ना आए हो, भूकंप के हल्के झटके से तो विशेष हानि नहीं होती है। लेकिन जब कभी जोर के झटके आते हैं तो वे प्रलय कारी दृश्य उपस्थित कर देते हैं। कामायनी के महाकाव्य के रचयिता श्री जयशंकर प्रसाद में प्रकृति का प्रकोप का वर्णन करते हुए लिखा है।

हा – हा – कार हुआ क्रंदनमय कठिन कुलिश होते थे चूर हुए दिगंत वाघेर, भीषण रव बार-बार होता था क्रूर।।

भूकंप का कारण: भूकंप क्यों आते हैं यह एक ऐसा रहस्य है जिसका उद्घाटन आज तक नहीं हो सका वैज्ञानिकों ने प्रकृति को मनुष्य के अनुकूल बनाने का प्रयत्न किया है । वह गर्मी तथा सर्दी में स्वयं को बचाने के लिए वातावरण को अपने अनुकूल बना सकता है। लेकिन भूकंप तथा बाढ़ आदि ऐसे देवी प्रकोप है जिनका समाधान मनुष्य जाति सैकड़ों वर्षों के कठोर प्रयोत्नो के बावजूद भी नहीं कर पाई है।

भूकंप के कारण के विभिन्न मत: भूकम्प को विषय में लोगों के भिन्न-भिन्न मत है, भुगर्भ शास्त्रियों का मत है कि धरती के भीतर तरल पदार्थ है, जब अंदर की गर्मी के कारण तीव्रता से फैलने लगते हैं तो पृथ्वी हिल जाती है। कभी-कभी ज्वालामुखी का फटना भी भूकम्प का कारण बन जाता है। भारत एक धर्म प्रधान देश है, यहां के लोगों का मत है कि जब पृथ्वी के किसी भाग पर अत्याचार और अनाचार बढ़ जाते हैं तो उस भाग में देवी प्रकोप के कारण भूकंप आते है। देहातो में तो यह कथा भी प्रचलित है कि शेषनाग ने पृथ्वी को अपने सिर पर धारण कर रखा है। उसके सात सिर है जब एक सिर पृथ्वी के बोझ के कारण थक जाता है। तो उसे दूसरे सिर पर बदलना है उसकी इस क्रिया से पृथ्वी हिल जाती है। और भूकंप आ जाता है, अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि जब पृथ्वी पर जनसंख्या जरूरत से अधिक बढ़ जाती है तब उसे संतुलित करने के लिए भूकम्प उत्पन्न करती हैं।

भूकंप से हानि: भूकंप का कारण कोई भी क्यों ना हो, पर इतना निश्चित है कि यह एक दैवी प्रकोप है जो अधिक विनाश का कारण बनता है यह जान लेवा ही नहीं बनता बल्कि मनुष्य की शताब्दीयो की मेहनत को भी नष्ट कर देता है। बिहार में बड़े विनाशकारी भूकंप देखे हैं हजारों लोग मौत के मुंह में चले गए भूमि में दरारें पड़ गई जिनमें जीवित प्राणी समा गए पृथ्वी के गर्भ से कई प्रकार की विषैली गैस उत्पन्न हूंई जिनमें प्राणियों का दम घुट गया। भूकंप के कारण जो लोग धरती में समा जाते हैं उनके मृत शरीरों को बाहर निकालने के लिए धरती की खुदाई करनी पड़ती है। यातायात के साधन नष्ट हो जाते हैं बड़े-बड़े भवन धराशाई हो जाते हैं लोग बेघर हो जाते हैं धनवान निर्धन बन जाते हैं और निर्धनों को जीने के लाले पड़ जाते हैं।

भूकंप का उल्लेख: सन 1935 में क्वेटा ने भूकंप का प्रलयकारी नृत्य देखा था। भूकंप के तेज झटकों के कारण देखते ही देखते एक सुंदर नगर नष्ट हो गया हजारों स्त्री पुरुष जो रात की सुखद नींद का आनंद ले रहे थे क्षण भर में मौत का ग्रास बन गए। मकान, सड़के ओर व्रक्ष आदि सब नष्ट हो गए सब कुछ बहुत दयनीय हो गया। बहुत से लोग अपंग हो गए। किसी का हाथ टूट गया तो किसी की टॉन्ग, कोई अँधा हो गया तो कोई बहरा। अनेक स्त्रियां विधवा हो गई। बच्चे अनाथ हो गए। भारत देश के गुजरात राज्य में सन 2001 का भूकंप ऐसा रहा कि जिससे हुई बर्बादी अभी तक किसी भी भूकम्प से हुई बर्बादी से अधिक है। आज भी जब उस भूकम्प की करुण कहानी सुनते है।तो ह्रदय कांप उठता है।

भूकंप क्यों आते हैं ? इस संबंध में भिन्न-भिन्न मत प्रचलित हैं। भूगर्भशास्त्रियों की राय है कि पृथ्वी के भीतर की तहों में सभी धातुएँ और पदार्थ आदि तरल रूप में बह रहे हैं। जब वे भीतर की गरमी के कारण अधिक तेजी से बहते और फैलते हैं तो धरती काँप उठती है। कभी-कभी ज्वालामुखी पर्वतों के फटने से भी भूकंप आ जाते हैं। एक अन्य मत यह भी प्रचलित है कि पृथ्वी के भीतर मिट्टी की तहों के बैठने (धसकने) से भी धरती हिल उठती है।

जापान आदि कुछ ऐसे देश है जहां भूकंप की संभावना अधिक रहती है यहां पर मकान पत्थर चुने तथा ईट के ना होकर लकड़ी तथा गत्ते के बनाए जाते हैं। ये साधन भूकम्प के प्रभाव को कम कर सकते हैं पर उसे रोक नहीं सकते है। भूकंप जब भी आता है जान और माल की हानि अवश्य होती है। टर्की में भी एक भीषण भूकंप आया था जिसके परिणाम स्वरूप हजारों मनुष्य दबकर मर गए थे भूकंप के हल्के झटके भी कम भयंकर नही होते उससे भवनों को क्षति पहुंचती है।

उपसंहार : आज का युग विज्ञान का युग कहलाता है। पर विज्ञान देवी प्रकोप के सामने विवश है। भूकम्प के मनुष्य कारण क्षण भर में ही प्रलय का दृश्य उपस्थित हो जाता है। ईश्वर की इच्छा के आगे सब विवश है। मनुष्य को कभी भी अपनी शक्ति और बुद्धि का घमंड नहीं करना चाहिए उसे हमेशा प्रकृति तथा ईश्वर की शक्ति के आगे नतमस्तक रहना चाहिए। ईश्वर की कृपा ही मानव जाति को ऐसे प्रकोप से बचा सकती है।

#4. [800-1000 Words Long essay] प्राकृतिक आपदा भूकंप पर निबंध

प्रस्तावना : मनुष्य अपने स्वार्थ सिद्धि और तरक्की के कारण पर्यावरण को बेहद नुकसान पहुंचा रहा है। पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। इसके कारण कई प्राकृतिक आपदाओं को इसने जन्म दिया है। भूकंप एक भयंकर प्राकृतिक आपदा है। यह एक भीषण संकट है। भूकंप जैसे ही आता है , यह जीव जंतु , मनुष्य सभी की जान ले लेता है। पेड़ पौधे नष्ट हो जाते है। बड़ी बड़ी इमारतें कुछ ही मिनटों में ताश के पत्तों की तरह ढह जाती है। भूमि पर दरार पड़ जाती है। अचानक धरती पर तीव्र गति से कम्पन होती है कि एक ही झटके में सब कुछ नष्ट हो जाता है। कई परिवार भूकंप की इस भयावह आपदा के शिकार हो जाते है। हर तरफ त्र्याही त्र्याही मच जाती है। भूकंप दो अक्षरों -भू + कम्प से बना है। भू मतलब धरती और कम्प का अर्थ है कम्पन। इस प्रकार भूमि यानी धरती पर अचानक आये कम्पन को भूकंप कहते है।

लोग बेघर हो जाते है और इस विनाशकारी आपदा की वजह से घायल हो जाते है। भूकंप के समक्ष मनुष्य की हालत दयनीय और असहाय हो जाती है। अपने चारो तरफ वह विनाश देखने को बेबस हो जाता है। भूकंप , बड़े उन्नत शहरों को खंडहरों में बदल कर रख देता है। मनुष्य ने हर क्षेत्र में प्रगति कर ली मगर भूकंप पर विजय पाने में असफल रहा है। ज़्यादातर भूंकम्प ज्वालामुखी विस्फोटो से आते है। जब ज्वालामुखी विस्फोट होता है , धरती में कम्पन पैदा हो जाता है। भूंकम्प आने पर चट्टानें टूट जाती है। जहाँ पर यह भूकंप आता है , वहां पर बसे गाँव और शहर नष्ट हो जाते है। जान माल की प्रचुर हानि होती है। कई बार दरारे इतनी गहरी पड़ती है कि लोग जिन्दा दफ़न हो जाते है। संचार और यातायात के सभी साधन भूकंप की वजह से नष्ट हो जाते है।

भूकंप पीड़ित जगहों पर कई वर्षो तक खुशहाली लौटती नहीं है। जीवन सामान्य होने में वक़्त लगता है। धरती को कृषि योग्य बनाने के लिए सैंकड़ो सालों से की गयी परिश्रम एक पल में नष्ट हो जाती है। भूकंप की वजह से सागर में भयानक लहरें उठती है जो वहां के क्षेत्रों में बसे लोगो पर कहर बरसाती है। भूकंप के समय समुद्र में तैर रही जहाजों का बचना नामुमकिन हो जाता है।

भारत में गुजरात के भुज में 7.7 तीव्रता से विनाशकारी भूकंप आया था। इस भूकंप में तीस हज़ार से ज़्यादा लोगो की जान चली गयी थी।

चार परतो से मिलकर धरती का निर्माण होता है। क्रस्टल , मेन्टल , इनर कोर , आउटर कोर इन चार परतो के नाम है। जब घरती के अंदर यह टेकटोनिक प्लेट हिलती है भूंकम्प आता है। धरती पर कभी कभार इतना अधिक दबाव पड़ता है कि पहाड़ खिसकने लगते है। टेकटोनिक प्लेट की तरह पहाड़ो , महासागरों की भी विभिन्न प्लेट होती है। भूकंप तब भी आ सकता , जब ऐसी प्लेट्स एक दूसरे के संग टकराती है।

भूकंप आने के कुछ कारण , मनुष्य का परमाणु परीक्षण , अनियमित प्रदूषण खदानों में विस्फोट , गहरे कुएं से तेल प्राप्त करना , जगह -जगह पर बाँध का निर्माण करवाना है । भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल में मापी जाती है। भूकंप को जिस उपकरण से मापा जाता है , उसे सिस्मोमीटर कहा जाता है। अगर दो से तीन तक की रिक्टर स्केल की भूकंप आती है ,तो यह भूकंप इतनी तीव्र नहीं होती है। अगर भूकंप की तीव्रता सात रिक्टर या उससे ज़्यादा होती है , तो भीषण विनाश ले आती है। ऐसे भूकंप में जान माल का बहुत नुकसान होता है।

जिस जगह में जनसंख्या का घनत्व अधिक होती है , वहां भूकंप से भयानक हानि होती है। शहरों में बड़ी इमारते होती है ,वो ढह जाती है जिसमे कई लोग दब कर मर जाते है। जब भूकंप आता है , तो नदियों और समुन्दरो में लहरें बढ़ जाती है। इससे बाढ़ का भय बढ़ जाता है।

अगर अतिरिक्त कम्पन होता है , धरती का बुरी तरीके से फटना शुरू हो जाता है। भूकंप आने पर चारो तरफ तनाव और भय का माहोल उतपन्न हो जाता है। मनुष्य को ऐसे घरो का निर्माण करना चाहिए ,जो भूकंप की चपेट को झेल सके। भूकंप रोधी घर होने चाहिए। जैसी ही लोगो को भूकंप के झटके महसूस होते है , उन्हें अपने मकान से निकलकर , खुले स्थान पर जाना चाहिए। अगर देर हो रही है , तो किसी सख्त फर्नीचर के नीचे छिप जाए । एक बात का ध्यान रखे , भूकंप के समय लिफ्ट का उपयोग बिलकुल ना करे। बिजली की मैन स्विच बंद कर दे। भूकंप की वजह से बड़े बड़े घरो और पाइपलाइनो में भयंकर आग लग सकती है। इससे और अधिक लोगो की जान जा सकती है। कई तरह के बिजली उपकरणों के कारण और अधिक भयंकर हादसा हो सकता है। इसलिए सावधानी बरतनी ज़रूरी है। समुद्र में जब भूकंप आता है ,तो वहां ऊँची लहरों का निर्माण होता है। यह सब विनाश भूकंप की ही देन है।

भूकंप आने से पूर्व मनुष्य को कोई चेतावनी नहीं मिलती है। लोगो को भूकंप के बारे में पहले से कुछ जानकारी नहीं मिलती है। कभी भूकंप की गति कम होती है , लोग इसे भूल जाते है। जब भूकंप अपने चरम सीमा पर होता है , तो गंभीर घाव दे जाता है। भूकंप अचानक दस्तक देती है और सब कुछ तहस नहस कर देती है।

यह सबसे घातक प्राकृतिक आपदा है। इससे लोगो की जिंदगी और संपत्ति सब लूट जाती है। भूकंप की उत्पत्ति जहां होती है , उसे भूकंप केंद्र कहा जाता है। भूकंप जैसे महाविनाश को रोकना असंभव है। मनुष्य को इसके प्रभाव को कैसे कम किया जाए , इस पर विचार करना चाहिए। मनुष्य भूकंप के कष्टों को कम ज़रूर कर सकता है। सामाजिक संस्थाएं ग्रसित जगहों में जाकर पीड़ित लोगो की मदद करती है। सरकार पीड़ित लोगो के पुनः स्थापना के लिए सरकारी अनुदान देती है। राहत कोष जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती है। मनुष्यो के औद्योगीकरण और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तीव्र गति की उन्नति ने इन भयानक प्राकृतिक आपदाओं को जन्म दिया है। मनुष्य को इस पर नियंत्रण करना बहुत ज़रूरी है।

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1 thought on “भूकंप पर निबंध (प्राकृतिक आपदा)”

Well l think u could have posted 200-300 words limitation too. Coz there situation in which we don’t need much words and of course least words.So for that situation 200-300 words is perfect. I just wanted to make u know about it……..

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essay on recent earthquake in hindi

भूंकप पर निबंध – Essay on Earthquake in Hindi

Essay on Earthquake

भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जो कि जीव-जन्तु, जलवायु, पेड़-पौधे, वनस्पति, पर्यावरण समेत समस्त मानव जीवन के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। भूकंप, जब भी आता है, धरती पर इतनी तेज कंपन होता है कि पल-भर में ही सब-कुछ तहस-नहस हो जाता है और तमाम मानव जिंदगियों एक झटके में बर्बाद हो जाती हैं।

अक्सर स्कूल के बच्चों को भूंकप पर निबंध लिखने के लिए कहा जाता है, इसी दिशा में हम अपने इस पोस्ट में आपको भूकंप जैसी विनाशकारी आपदा पर निबंध उपलब्ध करवा रहे हैं, जिसमें भूकंप से संबंधित सभी मुख्य तथ्य शामिल किए गए हैं, इस निबंध को आप अपनी जरुरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सकते हैं –

Essay on Earthquake in Hindi

भूकंप, जैसी अत्यंत विध्वंशकारी और भयावह आपदा जब भी आती है, धरती पर इतनी तेज कंपन हो उठता है कि पल भर में ही सब-कुछ नष्ट हो जाता है। भूकंप आने पर न सिर्फ सैकड़ों जिंदगियों का पल भर में विनाश हो जाता है, बल्कि करोड़ों-अरबों रुपए की संपत्ति भी एक ही झटके में मलबे का ढेर बन जाती है।

तेज भूकंप आने पर न जाने कितनी इमारतें ढह जाती हैं, नदियों, जलाशयों में उफान आ जाता हैं, धरती फट जाती है और सुनामी का खतरा बढ़ जाता है, भूकंप को तत्काल प्रभाव से नहीं रोका जा सकता है।

भूकंप क्या है – What is the Earthquake

भूकंप शब्द – दो अक्षरों से मिलकर बना है- भू+कंप अर्थात, भू का अर्थ है भूमि, और कंप का मतलब कंपन से है तो इस तरह भूमि पर कंपन को ही भूकंप कहते हैं।

वहीं अगर भूकंप को परिभाषित किया जाए तो – भूकंप एक अत्यंत विध्वंशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से है, जिसमें अचानक से धरती सतह पर तेजी से कंपन होना लगता है, अर्थात धरती बुरी तरह हिलने-डुलने लगती है।

वहीं जब भूकंप की तीव्रता की गति अत्यंत तेज होती है, तो यह उस भयावह स्थिति को उत्पन्न करता है, जिसमें धरती फटने लगती हैं, नदियों, जलाशयों में तेजी से उफान आता है, जिससे भूस्खलन और सुनामी जैसे संकट का खतरा पैदा हो जाता है, और इससे बड़े स्तर पर जान-माल की हानि होती है, और इसके तत्काल प्रभाव पर काबू नहीं पाया जा सकता है।

भूकंप आने के कारण – Causes of Earthquake

प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों कारणों से भूकंप आ सकता है-

भूकंप आने के प्राकृतिक कारण – Natural Causes of Earthquake

क्रस्टल, मेनटल, इनर कोर और आउट कोर इन चार परतों से मिलकर धरती बनी हैं, इन परतों को टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है, वहीं जब ये प्लेट्स अपने स्थान से खिसकती हैं अर्थात हिलती-डुलती हैं तो भूकंप की स्थिति पैदा हो जाती है। इसके साथ ही जब धरती की निचली सतह में तरंगें उत्पन्न होती हैं, तो भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा जन्म लेती हैं

धरती का तापमान बढ़ने से ज्वालामुखी फटते हैं, जिसके कारण भूकंप जैसी विनाशकारी आपदा आती है।

धरती के अंदर की चट्टानों के खिसकने की वजह से भी भूकंप आते हैं, इसलिए धऱती पर दवाब होने की वजह से पहाड़ वाले स्थान पर भूकंप ज्यादा आते हैं।

भूकंप पर वैज्ञानिकों की आधुनिक शोध के तहत प्लेट टेक्टोनिस्क भी भूकंप का कारण हैं, इसके तहत जब पहाड़ों, महासागरों, मरुभूमियों और महाद्धीपों की अलग-अलग प्लेटें होती हैं, जो कि लगातार खिसकती रहती हैं, वहीं ऐसी प्लेटों के आपस में टकराने से या फिर अलग होने पर भी भूंकप आता है।

भूकंप आने के मानव निर्मित कारण – Man-made Causes of Earthquake

  • परमाणु परीक्षण।
  • नाभिकीय और खदानों के विस्फोट।
  • गहरे कुओं से तेल निकालना या फिर किसी तरह का अपशिष्ट या तरल पदार्थ भरना।
  • विशाल बांध का निर्माण।

रिक्टर स्केल से मापी जाती है भूकंप की तीव्रता:

रिक्टर स्केल से भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। आपको बता दें कि सिसमोमीटर द्धारा रिएक्टर स्केल में मापी गई भूकंप की तीव्रता 2-3 रिएक्टर में आती है, तो इसे सामान्य माना जाता है ,यानि कि इसके तहत हल्के झटकों का एहसास होता है।

इसमें ज्यादा नुकसान नहीं होता है, वहीं जब यह तीव्रता 7 से ज्यादा होती है, तो इस तीव्रता वाले भूकंप, बेहद खतरनाक और विनाशकारी होते हैं और सब-कुछ तहस नहस कर देते हैं।

भूकंप से नुकसान – Effects of Earthquake

  • भूकंप से कई जिंदगियां तबाह हो जाती हैं।
  • भीड़-भाड़ वाले इलाके में भूकंप से काफी नुकसान होता है, कई बड़ी इमारते पल भर में ढह जाती हैं, वहीं मलबों के नीचे भी कई लोग दब कर मर जाते हैं।
  • भूकंप से नदियों, जलाशयों के जल में उफान आ जाता है, जिससे सुनामी और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
  • अत्याधिक तेज कंपन से धरती फंटना शुरु हो जाती है, अर्थात भूस्खलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

भूकंप आने पर अपनी सुरक्षा कैसे करें:

  • भूकंप जैसी भयावह आपदा पर काबू पाना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन भूकंप आने पर घबराने की बजाय अगर समझदारी के साथ नीचे लिखी कुछ बातों पर ध्यान दिया जाए तो आप अपना बचाव कर सकते हैं –
  • ऐसे मकानों का निर्माण करवाना चाहिए जो कि भूकंप रोधी हों।
  • भूकंप के झटकों का एहसास होते ही, तुरंत घर से निकलकर खुले स्थानों पर जाएं, वहीं अगर घर से बाहर निकलने में टाइम लगे तो कमरे के कोने में या फिर किसी मजबूत फर्नीचर के नीचे जाकर छिप जाएं।
  • भूकंप के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें।
  • घर में उपलब्ध बिजली के सारे उपकरण को बंद कर दें, और बिजली का मेन स्विच बंद कर दें।
  • कार चलाते वक्त तुरंत कार से बाहर निकलें।

भूकंप से बचने के उपाय:

भूकंप जैसी भयावह आपदा के प्रभाव को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन अगर सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है, भूकंप से बचना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन अगर पहले से ही कुछ भूकंप मापने वाले यंत्र लगा दिए जाएं तो, पहले से ही भूकंप आने की जानकारी मिल सकेगी, जिससे लोगों को पहले से ही आगाह किया जा सकेगा।

अब तक आए सबसे बड़े भूकंप:

  • वाल्डिविया, चिली में 22 मई, 1960 को 9.5 की तीव्रता वाला भयंकर भूकंप आया था, जिसमें चिली समेत न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस ने भारी तबाही मचाई थी और लाखों जिंदगियां इस भूंकप से बर्बाद हो गईं थी।
  • दक्षिण भारत में 9.2 की तीव्रता वाला भूकंप 26 दिसंबर, साल 2004 में आया था, जिसमें कई हजार लोगों की जान चली गई थी।
  • गुजरात के भुज में 26 जनवरी, 2001 में 7.7 की तीव्रता वाला विध्वंशकारी भूकंप आया था, जिसमें करीब 30 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी, और करोड़ों-अरबों रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ था।
  • हैती में 12 जनवरी, 2010 में 7 रिएक्टर की तीव्रता वाला भूकंप आया था, जिसमें करीब 1 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे।

भूकंप, जैसी भयावह और विध्वंशकारी आपदा को रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर इसका पूर्वानुमान लगाकर, इससे प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है।

  • Water is Life Essay
  • Essay on Water Pollution
  • Essay on Science
  • Essay on Disaster Management

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11 बड़े भूकंप कब आए और कहाँ आए?

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भूकंप पर निबंध – 10 lines (Earthquake Essay in Hindi) 100, 200, 300, 500, शब्दों में

essay on recent earthquake in hindi

Earthquake Essay in Hindi – भूकंप सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। इसके स्रोत का पता पृथ्वी के निर्माण के शुरुआती दिनों में लगाया जा सकता है। यह जीवन और संपत्ति के बड़े नुकसान के लिए जिम्मेदार है। इसलिए, यह मानव जाति के लिए एक बड़ी समस्या है। भूकंप शब्द ग्रीक शब्दों से बना है, ‘पृथ्वी’ का अर्थ है जमीन और ‘भूकंप’ का अर्थ है हिलना या कांपना। इसलिए, भूकंप पृथ्वी का हिलना या कांपना है।

भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे स्थित टेक्टोनिक प्लेटों में गड़बड़ी के कारण होता है। भूकंप संक्षिप्त और हल्के या बड़े और विनाशकारी हो सकते हैं। हमारे ग्रह ने सदियों से कई गंभीर और हल्के भूकंपों का सामना किया है। भूकंप ज्यादातर संक्षिप्त होते हैं लेकिन सेकंड के भीतर बड़े पैमाने पर विनाश का कारण बन सकते हैं। अतीत में भूकंपों के कारण दुनिया भर के लोगों को अत्यधिक नुकसान उठाना पड़ा है।

बच्चों के लिए भूकंप पर 10 लाइनें (10 Lines On Earthquake For Kids in Hindi)

  • भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है।
  • वे तब होते हैं जब कुछ तरकीबें पृथ्वी की सतह के नीचे चलती हैं, जिससे कंपन या भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं।
  • इससे हम अपने पैरों के नीचे से पूरी जमीन हिलती हुई महसूस कर सकते हैं। इससे इमारतें, पेड़ और अन्य ऊंची संरचनाएं टूट कर गिर सकती हैं।
  • भूकंप की तीव्रता या तीव्रता को उसका परिमाण कहते हैं और इसे रिक्टर स्केल पर 1 से 10 तक मापा जाता है।
  • भूकंप को सिस्मोग्राफ से मापा जा सकता है।
  • 6 या 7 परिमाण के भूकंप बहुत शक्तिशाली होते हैं और इससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हो सकता है।
  • जिस स्थान पर भूकंप की उत्पत्ति होती है, उसे उसका अधिकेंद्र कहा जाता है। यह स्थान आपदा के अधिकतम प्रभाव का सामना करता है।
  • भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हमेशा खतरे का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए और आपदा प्रबंधन रणनीति बनानी चाहिए क्योंकि भूकंप की भविष्यवाणी करना मुश्किल है।
  • भूकंप के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका खुले मैदान में दौड़ना है।
  • यदि आस-पास कोई खुली जगह नहीं है, तो आप एक मजबूत और मजबूत टेबल के नीचे झुक सकते हैं।

भूकंप पर 100 शब्दों का निबंध (100 Words Essay on Earthquake in Hindi)

भूकंप दुनिया में कहीं भी आ सकते हैं, और हालांकि उनकी घटना का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है, कुछ चीजें हैं जो आप अपने आप को और अधिक तैयार करने के लिए कर सकते हैं यदि कोई हमला करता है। इसमें जाने के लिए एक भूकंप किट तैयार होना, यह जानना कि कैसे गिरना, ढकना और रुकना है, और अपने क्षेत्र में किसी भी संभावित जोखिम के बारे में सूचित रहना शामिल है। सुनिश्चित करें कि आपके पास भोजन, पानी और अन्य आपूर्तियों के साथ एक आपातकालीन किट है, और जानें कि भूकंप आने पर क्या करना चाहिए। यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं कि क्या करना है, तो खिड़कियों और अन्य वस्तुओं से दूर रहना सबसे अच्छा है जो आप पर गिर सकते हैं और सुरक्षित स्थान पर जा सकते हैं।

भूकंप पर 200 शब्दों का निबंध (200 Words Essay on Earthquake in Hindi)

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जो अपने साथ कई खतरे लेकर आती है। पृथ्वी के हिलने और हिलने से इमारतें गिर सकती हैं, जिससे लोग अंदर फंस सकते हैं। इस तरह के अचानक परिवर्तन के कारण होने वाला कंपन आमतौर पर बहुत मामूली होता है, लेकिन बड़े भूकंप कभी-कभी भूमि के बहुत बड़े झटकों का कारण बनते हैं। हिलती हुई लहरें उस स्थान से फैलती हैं जहां पहली बार चट्टान टूटना शुरू होती है; इस स्थान को भूकंप का केंद्र या हाइपोसेंटर कहा जाता है।

अगर भूकंप शुरू होने पर आप अंदर हों, तो जमीन पर लेट जाएं और अपने सिर को ढक लें। भूकंप का परिमाण एक भूकंपीय घटना में जारी भूकंपीय ऊर्जा की मात्रा से संबंधित है।

विभिन्न प्रकार के भूकंप

भूकंप तीन प्रकार के होते हैं:

उथला | उथला भूकंप तब होता है जब भूकंप का फोकस पृथ्वी की सतह के करीब होता है। ये भूकंप आमतौर पर अन्य दो प्रकारों की तुलना में कम शक्तिशाली होते हैं, लेकिन फिर भी बहुत अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

मध्यम | मध्यवर्ती भूकंपों का एक फोकस होता है जो सतह और पृथ्वी के आवरण के बीच स्थित होता है, और आमतौर पर उथले भूकंपों की तुलना में अधिक शक्तिशाली होता है।

दीप | गहरे भूकंपों का फोकस मेंटल में स्थित होता है, जो क्रस्ट के नीचे पृथ्वी की परत है। वे सबसे शक्तिशाली प्रकार के भूकंप हैं, और यहां तक ​​कि सतह पर नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

भूकंप पर 300 शब्दों का निबंध (300 Words Essay on Earthquake in Hindi)

भूकंप और ज्वालामुखी दो प्राकृतिक आपदाएं हैं जो पृथ्वी की सतह में परिवर्तन के कारण होती हैं। इन प्राकृतिक आपदाओं को लाने में मनुष्य की बहुत कम या कोई भूमिका नहीं है। भूकंप और ज्वालामुखियों का परस्पर संबंध कहा जाता है। यह देखा गया है कि ज्वालामुखी क्षेत्र भूकंप के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं जो अक्सर आसन्न ज्वालामुखी के चेतावनी संकेत के रूप में काम करते हैं।

भूकंप मूल रूप से पृथ्वी का हिलना है। भूकंप या तो पृथ्वी की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण या ज्वालामुखियों में मैग्मा की गति के कारण आते हैं। ज्वालामुखीय विस्फोट मैग्मा आंदोलनों के कारण हो सकते हैं। भूकंप कमजोर होने के साथ-साथ हिंसक भी हो सकते हैं। जबकि कमजोर ज्वालामुखियों को शायद ही महसूस किया जाता है, हिंसक लोगों के परिणामस्वरूप बड़ी इमारतों की तबाही और जीवन की भारी हानि हो सकती है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कई भूकंप आए हैं जिससे गंभीर विनाश हुआ है।

ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह से गर्म लावा का विस्फोट है। यह तब होता है जब पृथ्वी की पपड़ी फट जाती है। गर्म लावा, जहरीली गैसें और ज्वालामुखीय राख ज्वालामुखी विस्फोटों के माध्यम से निकलती हैं और विशाल विनाश का कारण बन सकती हैं। विभिन्न प्रकार के ज्वालामुखियों में सुपर ज्वालामुखी, उप-हिमनद ज्वालामुखी, पानी के नीचे के ज्वालामुखी और मिट्टी के ज्वालामुखी शामिल हैं।

ज्वालामुखीय भूकंप क्या है?

ज्वालामुखीय भूकंप जिसे ज्वालामुखी टेक्टोनिक भूकंप भी कहा जाता है, मैग्मा की गति के कारण होता है। यह आंदोलन दबाव डालता है और मैग्मा के चारों ओर चट्टान में परिवर्तन का कारण बनता है और यह अंततः ज्वालामुखीय भूकंप का कारण बनता है। इन भूकंपों को बड़े विनाश का कारण माना जाता है जिसमें जमीन की विकृति, इमारतों का उखड़ना और जमीन की दरारें शामिल हो सकती हैं।

भूकंप और ज्वालामुखी दोनों से मानव जाति को भारी नुकसान हो सकता है। जबकि वैज्ञानिक इन दोनों की भविष्यवाणी करने की पूरी कोशिश करते हैं, वे इन प्राकृतिक आपदाओं के समय और तारीख का निर्धारण करने में सफल नहीं हुए हैं। भूकंप और ज्वालामुखी प्रवण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहना चाहिए और इनका सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए और ऐसी समस्या होने पर शांति और समझदारी से काम लेना चाहिए।

भूकंप पर 500 शब्दों का निबंध (500 Words Essay on Earthquake in Hindi)

सीधे शब्दों में कहें तो भूकंप का अर्थ है पृथ्वी की सतह का हिलना। यह पृथ्वी की सतह का अचानक कांपना है। भूकंप निश्चित रूप से एक भयानक प्राकृतिक आपदा है। इसके अलावा, भूकंप जीवन और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ भूकंप प्रकृति में कमजोर होते हैं और संभवत: उन पर किसी का ध्यान नहीं जाता है। इसके विपरीत, कुछ भूकंप बड़े और हिंसक होते हैं। प्रमुख भूकंप प्रकृति में लगभग हमेशा विनाशकारी होते हैं। सबसे उल्लेखनीय, भूकंप की घटना काफी अप्रत्याशित है। यही बात उन्हें इतना खतरनाक बनाती है।

भूकंप के प्रकार

टेक्टोनिक भूकंप : पृथ्वी की पपड़ी में असमान आकार की चट्टानों के स्लैब शामिल हैं। चट्टानों के ये स्लैब टेक्टोनिक प्लेट्स हैं। इसके अलावा, यहां ऊर्जा संग्रहित है। यह ऊर्जा टेक्टोनिक प्लेटों को एक दूसरे से दूर या एक दूसरे की ओर धकेलने का कारण बनती है। जैसे-जैसे समय बीतता है, ऊर्जा और गति दो प्लेटों के बीच दबाव बनाती है।

इसलिए, यह भारी दबाव फॉल्ट लाइन बनाने का कारण बनता है। साथ ही, इस गड़बड़ी का केंद्र बिंदु भूकंप का फोकस है। नतीजतन, ऊर्जा की तरंगें फोकस से सतह तक यात्रा करती हैं। इससे सतह का हिलना शुरू हो जाता है।

ज्वालामुखीय भूकंप : यह भूकंप ज्वालामुखी गतिविधि से संबंधित है। इन सबसे ऊपर, ऐसे भूकंपों की तीव्रता कमजोर होती है। ये भूकंप दो प्रकार के होते हैं। पहला प्रकार ज्वालामुखी-विवर्तनिक भूकंप है। यहां इंजेक्शन लगाने या मैग्मा निकालने से झटके आते हैं। इसके विपरीत दूसरा प्रकार दीर्घकालीन भूकंप है। यहाँ भूकंप पृथ्वी की परतों के बीच दबाव परिवर्तन के कारण होता है।

पतन भूकंप: ये भूकंप गुफाओं और खानों में होते हैं। इसके अलावा, ये भूकंप कमजोर परिमाण के हैं। खदानों के ढहने का कारण संभवत: भूमिगत विस्फोट हैं। इन सबसे ऊपर, खदानों के ढहने से भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं। नतीजतन, ये भूकंपीय तरंगें भूकंप का कारण बनती हैं।

विस्फोटक भूकंप: ये भूकंप लगभग हमेशा परमाणु हथियारों के परीक्षण के कारण आते हैं। जब कोई परमाणु हथियार फटता है तो बड़ा धमाका होता है। इसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। यह संभवतः भूकंप का परिणाम है।

भूकंप के प्रभाव

सबसे पहले, जमीन का हिलना भूकंप का सबसे उल्लेखनीय प्रभाव है। इसके अलावा, कंपन के साथ-साथ जमीन का फटना भी होता है। इससे आधारभूत सुविधाओं को भारी नुकसान होता है। भूकंप की गंभीरता भूकंप के परिमाण और अधिकेंद्र से दूरी पर निर्भर करती है। साथ ही, गंभीरता को निर्धारित करने में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियां एक भूमिका निभाती हैं। भूभंग पृथ्वी की सतह के दृश्य विखंडन को संदर्भित करता है।

भूकंप का एक अन्य महत्वपूर्ण प्रभाव भूस्खलन है। ढलान की अस्थिरता के कारण भूस्खलन होता है। यह ढलान अस्थिरता भूकंप के कारण होती है।

भूकंप मिट्टी के द्रवीकरण का कारण बन सकता है। यह तब होता है जब जल-संतृप्त दानेदार सामग्री अपनी ताकत खो देती है। इसलिए, यह ठोस से तरल में बदल जाता है। नतीजतन, कठोर संरचनाएं तरलीकृत जमा में डूब जाती हैं।

भूकंप के परिणामस्वरूप आग लग सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भूकंप से बिजली और गैस की लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। सबसे बढ़कर, आग लगने के बाद उसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है।

भूकंप कुख्यात सुनामी भी पैदा कर सकते हैं। सुनामी लंबी तरंगदैर्घ्य वाली समुद्री लहरें हैं। ये समुद्री लहरें बड़ी मात्रा में पानी की अचानक या अचानक गति के कारण होती हैं। यह समुद्र में भूकंप के कारण है। इन सबसे ऊपर, सुनामी 600-800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से यात्रा कर सकती है। समुद्री तट से टकराने पर ये सूनामी भारी तबाही मचा सकती हैं।

अंत में, भूकंप पृथ्वी की एक महान और भयानक घटना है। यह प्रकृति के विरुद्ध मनुष्य की दुर्बलता को दर्शाता है। यह एक जबरदस्त घटना है जो निश्चित रूप से सभी को झकझोर कर रख देती है। इन सबसे ऊपर, भूकंप केवल कुछ सेकंड के लिए ही रहता है, लेकिन इससे अकल्पनीय क्षति हो सकती है।

भूकंप पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1 विस्फोटक भूकंप क्यों आता है.

A1 परमाणु हथियारों के परीक्षण के कारण एक विस्फोटक भूकंप आता है।

Q2 भूकंप के कारण भूस्खलन क्यों होते हैं?

A2 भूस्खलन ढलान की अस्थिरता के कारण होता है। सबसे उल्लेखनीय, यह ढलान अस्थिरता भूकंप के कारण होती है।

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Essay on earthquake in hindi भूकंप पर निबंध.

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Essay on Earthquake in Hindi

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प्रकृति का स्वभाव बड़ा विचित्र है – कभी कल्याणकारी तो कभी विनाशकारी। प्रकृति कब, कैसे और क्या रूप धारण कर लेगी, इसे समझ पाना अभी तक मनुष्य के बस की बात नहीं है। ज्ञान-विज्ञान की उन्नति के कारण यह कहा जाता है कि आज मनुष्य ने प्रकृति के सभी रहस्यों को जान लिया है और सुलझा लिया है, किन्तु यह बात सच नहीं जान पड़ती। मौसम-विज्ञानी घोषणा करते हैं कि अगले चौबीस घंटों में तेज वर्षा होगी या कड़ाके की ठंड पड़ेगी, किन्तु होता कुछ और ही है। वर्षा और ठंड के स्थान पर चिलचिलाती धूप खिल उठती है। विज्ञान और वैज्ञानिकों की जानकारियों और सफलताओं का सारा दंभ धरा का धरा रह जाता है। सच तो यह है कि प्रकृति अनंत है और उसका स्वभाव अबूझ। बाढ़, सूखा, अकाल, भूकंप प्रकृति के विनाशकारी रूप के ही पर्याय हैं जो असमय मानव जीवन में हाहाकार मचा देते है।

प्राकृतिक आपदाओं में भूकम्प ही सबसे अधिक विनाशकारी होता है। सचमुच भूकंप विनाश का दूसरा नाम है। इसके कारण जहां लाखों मकान धराशायी हो जाते हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग असमय ही मृत्यु का ग्रास बन जाते हैं। कितने अपाहिज और लूले-लँगड़े होकर जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं। कभी-कभी तो पूरा शहर ही धरती के गर्भ में समा जाता है और नदियाँ अपना मार्ग परिवर्तित कर लेती हैं। भूतल पर नए भू-आकार जन्म ले लेते हैं, जैसे कि द्वीप, झील, पठार आदि। कभी-कभी जलाच्छादित भूमि समुद्र से बाहर निकल आती है। भूतल पर आए परिवर्तन मनुष्य के जीवन को भी प्रभावित करते हैं।

भूकंप शब्द का अर्थ होता है – पृथ्वी का हिलना। पृथ्वी के गर्भ में किसी प्रकार की हलचल के कारण जब धरती का कोई भाग हिलने लगता है, कंपित होने लगता है तो उसे भूकंप की संज्ञा दी जाती है। अधिकतर कंपन हल्के होते हैं और उनका पता नहीं चलता, न ही उनका हमारे जीवन पर कोई बुरा प्रभाव पड़ता है। मुख्य रूप से हम पृथ्वी के उन झटकों को ही भूकंप कहते हैं, जिनका हम अनुभव करते हैं। भूकंप के मुख्य कारणों में पृथ्वी के भीतर की चट्टानों का हिलना, ज्वालामुखी का फटना आदि हैं। इनके अतिरिक्त भू-स्खलन, बम फटने तथा भारी वाहनों या रेलगाड़ियों की तीव्र गति से भी कंपन पैदा होते हैं।

देश के इतिहास में सबसे भयानक भूकंप 11 अक्तूबर 1737 में बंगाल में आया था जिसमें लगभग तीन लाख लोग काल के गाल में समा गए थे। महाराष्ट्र के लातूर और उस्मानाबाद जिलों में आए विनाशकारी भूकंप ने करीब 40 गाँवों में भयानक तबाही मचाई। इसी कड़ी में 26 जनवरी, 2001 का दिन भारतीय गणतंत्र में काला दिन बन गया। उस दिन सुबह जब पूरा राष्ट्र गणतंत्र दिवस मना रहा था, प्रकृति के प्रलयंकारी तांडव ने भूकम्प का रूप लेकर गुजरात को धर दबोचा। देखते ही देखते भुज, अंजार और भचाऊ क्षेत्र कब्रिस्तान में बदल गए। गुजरात का वैभव कुछ ही क्षणों में खंडहरों में परिवर्तित हो गया। बहुमंजिली इमारतें देखते ही देखते मलबे के ढेर में बदल गईं। चारों ओर चीख-पुकार, बदहवासी और लाचारी का आलम था। अचानक हुई इस विनाशलीला ने लोगों के कंठ से वाणी और आँख से आंसू ही छीन लिए।

रैक्टर पैमाने पर गुजरात के इस भूकंप की तीव्रता 6.9 थी। इसका केन्द्र भुज से 20 कि-मी उत्तर-पूर्व में था। इस त्रासदी में हजारों की संख्या में लोग काल कवलित हो गए और कई हजार घायल हो गए, और लगभग एक लाख लोग बेघर हो गए। सारा देश इस त्रासदी में गुजरात के साथ था। सर्वप्रथम क्षेत्रीय लोग और स्वयं सेवी संस्थाओं ने राहत और बचाव कार्य आरम्भ किया। मीडिया की अहम भूमिका ने त्रासदी की गंभीरता का सही-सही प्रसारण कर भारत सरकार को झकझोरा और भारत सहित समूचे विश्व को सहायता के लिए उद्वेलित कर दिया। सारा जनमानस सहायता के लिए उमड़ पड़ा। भारत के कोने-कोने तथा विश्व के अनेक देशों से सहायता सामग्री का अंबार लग गया। सहायता के लिए धन-राशि के साथ-साथ अन्य आवश्यक सामग्री भी पहुंचने लगी। देश की तीनों सेनाओं के सैनिक तथा कई समाज सेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता भी सहायता-कार्य में जुट गए। इस त्रासदी में करोड़ों रुपए की निजी तथा सार्वजनिक सम्पत्ति के नुकसान होने का अनुमान आंका गया।

क्या मनुष्य सदैव इस विनाशलीला का मूकदर्शक बना रहेगा, इस त्रासदी को भोगता रहेगा ? यद्यपि विज्ञान ने भूकंप की पूर्व सूचना देने के सम्बन्ध में उल्लेखनीय प्रगति की है, उपग्रह भी इस दिशा में काफ़ी सहायक सिद्ध हो रहे हैं। तथापि इन भूकंपों को कैसे रोका जा सकता है इस दिशा में अभी तक कोई निर्णायक सफलता प्राप्त नहीं हुई है। आज तो स्थिति यह है कि विज्ञान जब तक कोई और नया चमत्कार न दिखला दे, तब तक मनुष्य को भूकंप की त्रासदी को किसी न किसी रूप में भोगना ही पड़ेगा। आशा है कि निकट भविष्य में विज्ञान कोई ऐसा चमत्कार दिखाएगा, जिससे मानव जाति इस त्रासदी से मुक्त हो सकेगी।

महाराष्ट्र का विनाशकारी भूकंप

30 सितम्बर, 1993 को रात करीब तीन बजकर छप्पन मिनट पर महाराष्ट्र की भूमि की कोख में भयंकर हलचल शुरू हुई। भूकंप का एक अति तीव्र झटका आया। धरती कांपने लगी। प्रकृति की विनाश लीला आरंभ हो चुकी थी। आप ने किताबों अखबारों या अन्य माध्यमों से इस भयंकर भूकंप के बारे में अवश्य सुना होगा। आपके माता-पिता को तत्कालीन राष्ट्रपति डा। शंकरदयाल शर्मा की वह भावुकता से सराबोर आह्वान अवश्य याद होगा, जिसे उन्होंने जनता के नाम संप्रेषित किया था। उन्होंने नम आँखों से सारे देश के नागरिकों से इस राष्ट्रीय आपदा को सहन करने में सहयोग देने की नैतिक अपील की थी और उसका व्यापक प्रभाव भी देखने को मिला था। लोगों ने भूकपपीड़ितों की तन-मन-धन से सहयता की थी। डॉक्टरों, सेवादारों और बचाव कर्मियों की टोलियां तुरन्त ही महाराष्ट्र के लिए पूरे देश भर से निकलने लगी थीं। सरकारी तौर पर भी इस आपदा से मुक्ति का प्रयास व्यापक पैमाने पर किया जा रहा था।

रात्रि के समय आने वाला यह भूकंप अति विनाशकारी सिद्ध हुआ। उसने निद्रा में डूबे हुए लोगों को सदा-सदा के लिए चिरनिद्रा में सुला दिया। लोग जिस स्थान पर सो रहे थे, इस विनाशकारी भूकंप ने उन्हें उनके स्थान पर दफन कर दिया। जो कभी उनका शयन कक्ष हुआ करता था, वही क्षणभर में उनकी कब्र बन गया। इस भूकंप का प्रभाव अत्यंत व्यापक था। देश-विदेश तक में इस की खबरें आयी और इसे सदी का भयानक भूकंप बताया गया। रेक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.4 बताई गयी। जिस गहन रात्रि में यह भूकंप आया था वह रात्रि एक प्रकार से काल की क्रूरता का एक खेल सी बन गयी थी। इस भूकंप का पहला झटका 3.56 मिनट तक महसूस किया गया और दूसरा 4.42 मिनट तक इस विनाशलीला की गति यहीं पर नहीं रुकी। कुछ समय बाद एक तीसरा झटका भी आया, जो करीब 6.40 मिनट तक महसूस किया गया।

एक पाश्चात्य भू-वैज्ञानिक का स्पष्ट मानना था कि इस तीव्रता एवं क्षमता वाला भूकंप एक वृहद क्षेत्र को अतिशीघ्र ध्वस्त कर देने की प्रबल क्षमता रखता है। हुआ भी वही, महाराष्ट्र का एक बड़ा क्षेत्र इसकी चपेट में आया और बुरी तरह से ध्वस्त हो गया। महाराष्ट्र के लातूर से लेकर कर्नाटक के गुलबर्गा तक इसका प्रभाव देखा गया। किन्तु इस भूकंप ने जिस क्षेत्र को भयावह रूप से बर्बाद किया, वह था महाराष्ट्र के लातूर और उस्मानाबाद जिले के उभरेगा और किल्लारी तालुका नामक कस्बे। इन क्षेत्रों में इस रात्रि को मृत्यु का नंगा नाच होता रहा। मानो पृथ्वी अपना स्वाभाविक धर्म छोड़कर मनुष्य का शत्रु हो गयी हो और उसे अपना ग्रास बनाने की भावना से आप्लावित हो रही हो। मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षी, वृक्ष आदि सभी इस विनाशलीला का शिकार हुए। तड़पते हुए मानव, असहाय होकर मृत्यु को अपनी आंखों के सामने खड़ा देख रहे थे। मानों समस्त प्रकृति ही नहीं अपितु ब्रम्हा भी अपनी मानव-संतान से मोह तोड़ चुके हों। बारिस के कहर ने इस विनाशलीला को और भी भयानक बना दिया। तेज बारिस शुरू हो गयी और इसके कारण बचाव कार्य शिथिल होता रहा। जिस शीघ्रता और अनुपात में भूकंप पीड़ितों को सहायता चाहिए थी वह उन्हें सरकार चाहकर भी नहीं दे सकी। किन्तु यह स्थिति बहुत देर तक बनी नहीं रह सकी। भारतीयों की यही विशेषता है कि समय पड़ने पर वह फिर किसी भी प्रकार की प्रतिकूलता को आड़े नहीं आने देते, अपितु ऐसी प्रतिकूलताएं उन्हें अपने कार्य के प्रति और भी जुझारू बना देती हैं।

सरकार ने भी अपने मानवीय सरोकारों को इस मौकेपर भूलाया नहीं। जिस भांति भी संभव हुआ, प्रभावित क्षेत्र को आवश्यक सहायता प्रदान की जाती रही। सहायता राशि के रूप में केन्द्र सरकार ने करोड़ों रुपए प्रदान किए। राज्य सरकारों ने भी अपने निवासियों के दुःख दर्द को पूरी तरह समझा और उनके पुनर्वास के लिए हर संभव सरकारी सहायता प्रदान की। किन्तु जैसे कहा भी जाता है कि भाग्य में जो लिखा होता है वही होता है, करीब 2 लाख लोग इससे प्रभावित हुए, जिसमें मरने वालों की संख्या हजारों में थी।

सरकार को इस प्रकार की आपदाओं से देशवासियों को बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाने चाहिए और नयी तकनीक ग्रहण करनी चाहिए ताकि ऐसे प्रकोप के प्रभाव को सीमित किया जा सके।

सन् 1991 का विनाशकारी भूकम्प

20 अक्टूबर सन् 1991 की वह गहरी रात्रि हम भारतीयों के लिए सचमुच एक प्रलयकारी रात्रि सिद्ध हुई। उस दिन करीब 45 सेकन्ड तक की समय अवधि का एक भकंप आया था जिसकी तीव्रता विशेषज्ञों ने रिएक्टर पैमाने के अनुसार 6।1 बतलायी। इसे करीब 330 किलो टन परमाणु विस्फोट के बराबर कहा जा सकता है। इस भूकंप की जो रिर्पोटिंग बी।बी।सी लंदन ने की थी, उसे देखकर ही हम इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में हुए धन-बल और जन-बल के भयानक विनाश की सहज ही कल्पना कर सकते हैं। उसके अनुसार “भूकंप में मरने वालों की संख्या तीन हजार से उपर पहुँच चुकी है और लगभग दस हजार लोग घायल हुए हैं।” इस भयंकर भूकंप से 175 करोड़ रूपये की धनराशि का नुकसान हुआ।

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है और यह अन्य प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में ज्यादा घातक और विनाशकारी प्राकृतिक आपदा होती है। इसका कारण यह भी है कि इसके कारण मानव-समाज कतिपय अन्य अपदाओं और समस्याओं से घिर जाता है। भौगोलिक-विशिष्टता भी इस भूकंप रूपी प्राकृतिक आपदा की मार को और ज्यादा मारक बना देती है। जैसे 1991 में आया यह भूकंप गढ़वाल और कुमाऊँ मण्डल को बना दिया। यह भू-क्षेत्र भौगोलिक रूप से एक पर्वतीय क्षेत्र है। इस भू-क्षेत्र में अनेक बड़े-बड़े पर्वतों के साथ साथ अनेक गहरी घाटियां भी विद्यमान हैं। साथ ही इनके मध्य में अपने पूरे वेग से प्रवाहित होने वाली अनेक गहरी नदियां भी अवस्थित हैं। यह सब मिलकर इस भू-क्षेत्र को सामान्य रूप से एक अत्यंत विषम स्थल का रूप दे देते हैं। सन् 1991 में जो विनाशकारी भूकंप इस क्षेत्र में आया, उसकी विनाशलीला को और अधिक बढ़ाने में इस भू-क्षेत्र की भौगोलिक-विशिष्टता ने भी अपना पूरा योग दिया।

सन् 1991 का यह विनाशकारी-भूकंप जिस समय आया था वह समय गहन रात्रि का समय था। सारे लोग दिन भर के परिश्रमपूर्ण कार्यों को सम्पन्न करके थकान मिटा रहे थे और अगले दिन के लिए पूर्णत: तैयार होने के लिए आरामदायक मीठी नींद ले रहे थे। कहा भी जाता है कि सोया हुआ आदमी मरे हुए आदमी के सादृश ही होता है। उसे अपने आस-पास के वातावरण का किंचित मात्र भी ज्ञान या बोध नहीं रहता। वह पूर्णत: एक गहरी नींद में डूबा होता है। 20 अकूबर का यह रात्रि भी इसी प्रकार की स्थिति में थी। इस भू-क्षेत्र का प्रत्येक मनुष्य गहरी नींद में डूबा हुआ था। और तभी दुर्भाग्य ने अपना प्रलयंकारी खेल खेलना आरम्भ कर दिया। हजारों की संख्या में लोग इस प्रलयंकारी भूकंप की चपेट में आ गये। वो जहां सो रहे थे वहीं दफन हो गये। उनके कठिन परिश्रम से बनाए गये मकान उन्हीं का मृत्यु का सामान बन गये। वो मकान उन्ही के उपर भरभरा कर आ गिरे और लोग अपने ही घरों के मलवे में दफन होने लगें।

इस भूकंप की तीव्रता अत्यधिक थी। इसके कारण वह समूचा पर्वतीय क्षेत्र व्यापक रूप से आक्रांत हो उठा और पर्वतों में स्खलन उत्पन्न हो गया। भू-स्खलन के कारण यह विनाशलीला और भी बढ़ गयी। पर्वत टूट-टूटकर नीचे बह रही नदियों में आ गिरे जिसके फलस्वरूप नदियों का बहाव भी बाधित हो गया और उसका पानी आस-पास के क्षेत्रों में भर गया। एकदम सी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी। इस प्रकार हम हर तरफ से देखें तो यही कहा जा सकता है कि गढ़वाल और कुमाऊँ मण्डल में आया यह भूकंप अनेक रूपों में दिखलायी पड़ा। यह अपने साथ अन्य अनेक दुश्कर आपदाएं लिए हुए आया था।

इस भूकंप का जो प्रभाव इस क्षेत्र के लोगों के जीवन पर पड़ा था वह अत्यंत व्यापक और विस्तृत था। इससे न केवल जन-हानि और धन हानि ही हुई थी अपितु वहाँ के विकास हेतु कियान्वित की गयी महत्वपूर्ण योजनाएं भी बाधित हो गयी थी। इन्हीं में से एक योजना थी ‘टिहरी बांध’ की महत्वाकांक्षी योजना। इस भूकंप ने इस महत्वपूर्ण योजना को लगभग बर्बाद ही कर दिया था। बाद में, इस योजना को पुन: गतिशील और सुचारू करने में सरकार को अतिरिक्त पर्याप्त धन का व्यय करना पड़ा।

भूकंप ने इस मार्ग के आवागमन के प्राय: हर मार्ग को बाधित कर दिया। अनेक पुलों का नाश हो गया। यह धर्म-भूमि माना जाने वाला क्षेत्र है। पूरे वर्ष इस क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों का तांता लगा रहता है। और जिस समय यह भूकंप आया उस समय भी इस क्षेत्र में अनेक विदेशी पर्यटक विद्यमान थे। उनके वहाँ फँस जाने से समस्या और भी ज्यादा गंभीर हो गयी थी।

उस समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने इस आपदा से पूर्णत: निपटने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए। नाना भांति की सहायता वहाँ तत्काल भेजी गयी। केन्द्र सरकार ने भी समस्या की विकरालता को देखते हुए पानी की तरह पैसा बहाया। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यह एक ऐसी आपदा थी जिसने भारत को हिला कर रख दिया था।

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Essay on Earthquake in Hindi : भूकंप आने का कारण और इस से बचाव के उपाय

  • By Aryavi Team
  • 11 Min Read

भूकंप पृथ्वी की सतह पर ज़मीन के हिलने, विस्थापन और व्यवधान पैदा करके प्रकट होते हैं। ऐसे मामलों में जहां एक बड़े भूकंप का केंद्र तट से दूर होता है, यह सुनामी को ट्रिगर करने के लिए समुद्र तल को पर्याप्त रूप से विस्थापित कर सकता है। इसके अतिरिक्त, भूकंप में भूस्खलन को प्रेरित करने की क्षमता होती है जिससे उनका विनाशकारी प्रभाव बढ़ जाता है।

भूकंप मुख्य रूप से भूवैज्ञानिक दोष के टूटने (geological fault ruptures) का परिणाम होते हैं, लेकिन वे ज्वालामुखी गतिविधि, भूस्खलन, खनन विस्फोट और यहां तक कि परमाणु परीक्षणों से भी उत्पन्न हो सकते हैं। प्रारंभिक विच्छेदन के बिंदु को हाइपोसेंटर (hypocenter) या फोकस के रूप में जाना जाता है, जबकि अधिकेंद्र (epicenter) पृथ्वी की सतह पर सीधे हाइपोसेंटर के ऊपर का बिंदु है। अपने व्यापक अर्थ में, "भूकंप" शब्द किसी भी भूकंपीय घटना को शामिल करता है, चाहे वह प्राकृतिक हो या मानव-प्रेरित, जो भूकंपीय तरंगें (seismic waves) उत्पन्न करती है, जो हमारे ग्रह पर इन शक्तिशाली भूवैज्ञानिक घटनाओं के गहरे और विविध प्रभावों को उजागर करती है।

भूकंप के प्रमुख उदाहरण (Major Examples of Earthquake)

चीन में 1556 का शानक्सी (Shaanxi) भूकंप इतिहास के सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक है, जिसमें 830,000 से अधिक लोगों की जान चली गई। इस विनाशकारी घटना ने मुख्य रूप से याओडोंग (yaodongs) के नाम से जाने वाले आवासों को प्रभावित किया, जो लोएस पहाड़ियों में थे, जिसके परिणामस्वरूप संरचनात्मक पतन के कारण कई मौतें हुईं। 20वीं सदी में, चीन में 1976 का तांगशान भूकंप सबसे घातक साबित हुआ, जिससे 240,000 से 655,000 लोगों की जान चली गई। रिकॉर्ड किया गया सबसे बड़ा भूकंप, जिसकी तीव्रता 9.5 थी, 1960 में चिली (Chile) में आया था, जिससे अगले सबसे शक्तिशाली भूकंप की तुलना में दोगुनी ऊर्जा निकली। जबकि मेगाथ्रस्ट भूकंप तीव्रता के मामले में शीर्ष दस में हावी हैं, 2004 का हिंद महासागर भूकंप अद्वितीय है क्योंकि यह बड़े पैमाने पर और सबसे घातक में से एक है, जो अक्सर आने वाली सुनामी के कारण होता है। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आम तौर पर घनी आबादी वाले क्षेत्र या समुद्र तट शामिल होते हैं, जहां भूकंप और सुनामी महत्वपूर्ण खतरे पैदा करते हैं, जो अक्सर कमजोर, गरीब क्षेत्रों में भूकंपीय भवन कोड के खराब प्रवर्तन के कारण बढ़ जाते हैं।

भूकंप के कारण (Causes of Earthquake in Hindi)

भूकंप पृथ्वी की पपड़ी (Earth's crust) के भीतर अचानक टेक्टोनिक गतिविधि का परिणाम है, जो मुख्य रूप से टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों से प्रेरित होता है। पृथ्वी की पपड़ी इन विशाल प्लेटों में विभाजित है, जो धीरे-धीरे उनके नीचे अर्ध-तरल एस्थेनोस्फीयर (semi-fluid asthenosphere) के ऊपर सरकती हैं। जब ये प्लेटें परस्पर क्रिया करती हैं, अभिसरण (convergent), अपसारी (divergent) या परिवर्तित सीमाएँ (transform boundaries) बनाती हैं, तो भूकंपीय घटनाएँ घटित हो सकती हैं।

सबसे विनाशकारी भूकंप अक्सर अभिसरण सीमाओं पर होते हैं जहां प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या फिसलती हैं। यह अंतःक्रिया प्लेट के किनारों पर अत्यधिक दबाव और घर्षण पैदा करती है। जैसे-जैसे तनाव बढ़ता है, इन सीमाओं पर चट्टानें अंततः टूट जाती हैं और खिसक जाती हैं, जिससे संग्रहित ऊर्जा अचानक बाहर निकल जाती है, जो भूकंपीय तरंगों के रूप में प्रकट होती है, जिससे भूकंप आता है।

टेक्टोनिक गतिविधियों के अलावा, अन्य भूवैज्ञानिक गतिविधियाँ भी भूकंप को ट्रिगर कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, ज्वालामुखीय गतिविधि भूकंप को प्रेरित कर सकती है जब मैग्मा बढ़ने से चट्टानों के आसपास दरारें पड़ जाती हैं। इन विक्षोभों (disturbances) के परिणामस्वरूप कंपन उत्पन्न होता है जो सभी दिशाओं में फैलता है और जमीन को हिला देता है। भूकंपमापी इन भूकंपीय तरंगों का पता लगाते हैं।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि भूकंप मूल रूप से तनाव संचय (stress accumulation) और उसके बाद शॉकवेव्स के रूप में ऊर्जा के निकलने से उत्पन्न होते हैं। भूकंप की तीव्रता इस प्रक्रिया के दौरान निकलने वाली ऊर्जा की मात्रा से संबंधित होती है, जिससे यह उनके प्रभाव का आकलन करने में एक महत्वपूर्ण पैरामीटर बन जाता है।

भूकंप के प्रभाव (Effects of Earthquake)

भूकंप के प्रभाव व्यापक और विनाशकारी हो सकते हैं, जिसमें प्राकृतिक और निर्मित पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ मानवीय प्रभाव भी शामिल हैं:

1. कंपन और ज़मीन का टूटना: भूकंप का प्राथमिक प्रभाव ज़मीन का हिलना होता है। इस झटके की गंभीरता भूकंप की तीव्रता, भूकंप के केंद्र से निकटता और स्थानीय भूवैज्ञानिक स्थितियों जैसे कारकों पर निर्भर करती है।

2. मिट्टी का द्रवीकरण: भूकंप के दौरान, जल-संतृप्त दानेदार सामग्री (water-saturated granular material), जैसे रेत, अस्थायी रूप से अपनी ताकत खो सकती है और तरल में बदल सकती है। यह घटना, जिसे मृदा द्रवीकरण (soil liquefaction) के रूप में जाना जाता है, इमारतों और संरचनाओं के झुकने या द्रवीकृत जमाव में डूबने का कारण बन सकती है।

3. मानवीय प्रभाव: भूकंप से चोटें और जीवन की हानि हो सकती है, विशेषकर घनी आबादी वाले या खराब निर्माण वाले क्षेत्रों में। सड़कें, पुल, सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क, पानी और बिजली आपूर्ति प्रणालियाँ और संचार नेटवर्क सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे क्षतिग्रस्त या बाधित हो सकते हैं। अस्पताल, पुलिस और अग्निशमन सेवाएँ भी प्रभावित हो सकती हैं, जिससे आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रयासों में बाधा आ सकती है।

4. संपत्ति की क्षति: इमारतें और संरचनाएं ढह सकती हैं या अस्थिर हो सकती हैं, जिससे संपत्ति की क्षति हो सकती है। इस तरह की क्षति के आर्थिक परिणाम महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

5. भूस्खलन: भूकंप ढलान में अस्थिरता पैदा कर सकता है, जिससे भूस्खलन हो सकता है, जो अतिरिक्त खतरे पैदा करता है और बचाव और पुनर्प्राप्ति प्रयासों (recovery efforts) में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

6. आग: विद्युत शक्ति और गैस लाइनों को नुकसान के परिणामस्वरूप आग लग सकती है जिसे नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे संभावित रूप से भूकंप से भी अधिक विनाश और जीवन की हानि हो सकती है।

7. सुनामी: पानी के नीचे के भूकंप सुनामी उत्पन्न कर सकते हैं - बड़ी, विनाशकारी समुद्री लहरें जो तटीय क्षेत्रों में बाढ़ ला सकती हैं, जिससे व्यापक क्षति और जीवन की हानि हो सकती है। सुनामी खुले समुद्र में विशाल दूरी तक यात्रा कर सकती है।

8. बाढ़: यदि बांध क्षतिग्रस्त हो जाते हैं या भूस्खलन से नदियाँ बाधित हो जाती हैं, तो भूकंप अप्रत्यक्ष रूप से बाढ़ का कारण बन सकता है, जिससे बांध विफल हो जाते हैं और बाद में बाढ़ आती है।

भूकंप प्रबंधन (Management of Earthquake)

भूकंप प्रबंधन में तीन प्रमुख पहलू शामिल हैं: भविष्यवाणी (prediction), पूर्वानुमान (forecasting) और तैयारी (preparedness), जिसका लक्ष्य समाज पर भूकंपीय घटनाओं के प्रभाव को कम करना है।

भविष्यवाणी, सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू, भविष्य में आने वाले भूकंपों का सटीक समय, स्थान और तीव्रता निर्दिष्ट करना चाहता है। भूकंप विज्ञान में व्यापक शोध के बावजूद, सटीक भविष्यवाणियाँ मायावी बनी हुई हैं। जबकि वैज्ञानिक उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं, किसी विशिष्ट दिन या महीने में भूकंप की घटना को इंगित (pinpointing) करना वर्तमान क्षमताओं से परे है।

दूसरी ओर, पूर्वानुमान, सामान्य भूकंप के खतरों का संभावित रूप से आकलन करने पर केंद्रित है। इसमें किसी विशेष क्षेत्र में विस्तारित अवधि, जैसे कि वर्षों या दशकों में विनाशकारी भूकंपों की आवृत्ति और तीव्रता का अनुमान लगाना शामिल है। अच्छी तरह से समझी गई फॉल्ट लाइनों के लिए, निकट भविष्य में टूटने की संभावना का अनुमान लगाना संभव है।

भूकंप के खतरों को कम करने के लिए, जमीन हिलने से पहले क्षेत्रीय सूचनाएं प्रदान करने के लिए चेतावनी प्रणालियाँ विकसित की गई हैं। ये सिस्टम लोगों को आश्रय पाने के लिए एक संक्षिप्त विंडो (brief window) प्रदान करते हैं, जिससे चोटों और मृत्यु की संभावना कम हो जाती है।

भूकंपीय ताकतों का सामना करने के लिए संरचनाओं को डिजाइन करके भूकंप इंजीनियरिंग तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मौजूदा इमारतों में भूकंप प्रतिरोध में सुधार के लिए भूकंपीय रेट्रोफिटिंग (seismic retrofitting) की जा सकती है। 

आपातकालीन प्रबंधन रणनीतियाँ, चाहे वे सरकारों या संगठनों द्वारा लागू की गई हों का उद्देश्य जोखिमों को कम करना और परिणामों के लिए तैयार रहना है। इन रणनीतियों में आपदा प्रतिक्रिया योजना, निकासी मार्ग और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय (coordination) शामिल है।

भवन की कमजोरियों का आकलन करने और एहतियाती उपायों की योजना बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial intelligence) का तेजी से उपयोग किया जा रहा है। इगोर (Igor) जैसी प्रणालियाँ चिनाई वाली इमारतों के लिए भूकंपीय मूल्यांकन और रेट्रोफिटिंग योजना में सहायता करती हैं।

व्यक्तिगत स्तर पर, लोग भूकंप की तैयारी के लिए कदम उठा सकते हैं। इसमें भारी वस्तुओं को सुरक्षित करना, उपयोगिता शटऑफ का पता लगाना (locating utility shutoffs) और भूकंप के दौरान प्रतिक्रिया करने का तरीका जानना शामिल है। 

संक्षेप में, भूकंप प्रबंधन में भूकंपीय घटनाओं की भविष्यवाणी और पूर्वानुमान से लेकर इंजीनियरिंग संरचनाओं और तैयारी उपायों को लागू करने तक एक बहुआयामी दृष्टिकोण शामिल है। इन प्रयासों को एकीकृत करके, समुदाय भूकंप के प्रभाव को कम कर सकते हैं ।

सिस्मोग्राफ से क्या मापा जाता है (What is Measured by Seismograph)

भूकंप के दौरान, भूकंपीय तरंगें (seismic waves) पृथ्वी के माध्यम से फैलती हैं, और भूकंपमापी माप (seismographs) के लिए आवश्यक उपकरण के रूप में काम करते हैं। ये उपकरण सीस्मोग्राम (seismograms) उत्पन्न करते हैं, जो भूकंपीय तरंगों से प्रेरित जमीन की गति का डिजिटल ग्राफिकल प्रतिनिधित्व हैं। भूकंपमापी का एक वैश्विक नेटवर्क भूकंपीय घटनाओं के दौरान इन तरंगों की तीव्रता और अवधि का व्यवस्थित रूप से पता लगाता है और उनका आकलन करता है। परिणामी भूकंपीय डेटा वैज्ञानिकों को भूकंपों का विश्लेषण और लक्षण वर्णन करने में मदद करता है, उनके परिमाण और व्यवहार में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, अंततः पृथ्वी की गतिशील प्रक्रियाओं की हमारी समझ में योगदान देता है।

भूकम्प आने पर क्या करना चाहिए (What to do When an Earthquake Occurs)

भूकंप के समय आपकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है:

Indoor- अंदर ही रहें, मजबूत फर्नीचर जैसे मेज या टेबल के नीचे जाएं और इसे पकड़ कर रहें (ढ़क जाएं, और पकड़ लें !). खिड़कियों, भारी फर्नीचर या उपकरणों से दूर रहें। रसोई से बाहर निकलें, क्योंकि यह एक खतरनाक स्थान हो सकता है (चीजें आपके ऊपर गिर सकती हैं)। जब भी इमारत झूल रही है या जोखिम है कि आप गिर सकते हैं या गिरी हुई चीजों से चोट आ सकती है, तब भी भागने की कोशिश न करें।

Outdoor-  खुद को इमारतों, बिजली की तारों, चिमनीओं, और किसी और चीज से दूर खड़ा कर लें, जो आप पर गिर सकती है।

Car Driving- ध्यानपूर्वक रुक जाएं, लेकिन सावधानी से। अपनी कार को संभवत: सड़क के किनारे में खींचें, पुल या ओवरपास के नीचे या पेड़ों, बिजली की तारों, या साइनों के नीचे न रुकें। भूकम्प के थमने तक अपनी कार में ही बैठे रहें। जब शांति हो जाए, तो सावधानी से ड्राइव करने जारी रखें, सड़क पर टूटी हुई सड़क, गिरी हुई चट्टानों से दूर रहें।

 On Hills- गिरने वाले पत्थर, भूस्खलन, पेड़, और अन्य सामग्री से सावधान रहें, जो भूकम्प द्वारा ढलाने (slope) या ढलाने की संभावना हो सकती है, और सुरक्षा के उपायों का पालन करें।

भूकंप प्राकृतिक भूवैज्ञानिक घटनाएँ हैं जो पृथ्वी की पपड़ी के भीतर ऊर्जा की रिहाई (release) के परिणामस्वरूप होती हैं, जिससे भूकंपीय तरंगों का प्रसार होता है। ये घटनाएँ परिमाण में बहुत भिन्न हो सकती हैं और विशेष रूप से घनी आबादी वाले या खराब तैयारी वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण तबाही, जीवन की हानि और आर्थिक क्षति का कारण बन सकती हैं। भूकंप, भूकंप विज्ञान का अध्ययन, उनके कारणों को समझने, उनकी घटना की भविष्यवाणी करने और शमन और तैयारियों के लिए रणनीति विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है। भूकंप की तैयारी के उपाय, जैसे भूकंप प्रतिरोधी संरचनाएं बनाना और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली लागू करना, इन शक्तिशाली प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने और मानव जीवन और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।

1. भूकंप का कारण क्या है?

भूकंप मुख्य रूप से पृथ्वी की पपड़ी में ऊर्जा की अचानक रिहाई के कारण होते हैं, जो अक्सर दोषों के साथ टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण होता है।

2. भूकंप कैसे मापे जाते हैं?

भूकंपों को सीस्मोमीटर नामक उपकरणों का उपयोग करके मापा जाता है, जो जमीन की गति को रिकॉर्ड करते हैं और एक सीस्मोग्राम उत्पन्न करते हैं। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल या आघूर्ण परिमाण स्केल (मेगावाट) जैसे पैमानों का उपयोग करके निर्धारित की जाती है।

3. क्या भूकंप की सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है?

वर्तमान में, भूकंप कब और कहाँ आएगा, इसकी सटीक और विशिष्ट भविष्यवाणी संभव नहीं है। वैज्ञानिक केवल ऐतिहासिक डेटा और भूवैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर कुछ क्षेत्रों में संभावनाओं का अनुमान लगा सकते हैं।

4. भूकंप रेट्रोफिटिंग (earthquake retrofitting) क्या है?

भूकंप रेट्रोफिटिंग में मौजूदा इमारतों और संरचनाओं को भूकंपीय ताकतों के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाने के लिए संशोधित करना शामिल है, जिससे भूकंप के दौरान क्षति का जोखिम कम हो जाता है।

5. क्या भूकंप के परिणामस्वरूप हमेशा सुनामी आती है?

नहीं, सभी भूकंप सुनामी का कारण नहीं बनते। सुनामी आमतौर पर समुद्र के अंदर आने वाले भूकंपों या बड़ी मात्रा में पानी को विस्थापित करने वाले भूकंपों से जुड़ी होती है।

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भूकंप पर निबंध Earthquake in Hindi

भूकंप पर निबंध Essay on Earthquake in Hindi

इस लेख में हमने भूकंप पर निबंध (Essay on Earthquake in Hindi) आकर्षक रूप से लिखा है। इस लेख में भूकंप क्या है तथा भूकंप आने के कारण साथ ही भूकंप से बचाव के उपाय सरल रूप में दिया गया है।

Table of Contents

प्रस्तावना (भूकंप पर निबंध Essay on Earthquake in Hindi)

प्रकृति समय-समय पर स्वयं में परिवर्तन करती रहती है। जिसे हम भूकंप, बाढ़ तथा चक्रवात के रूप में देख सकते हैं। भूकंप आने के पीछे मनुष्य का पर्यावरण के तरफ उदासीन भाव भी होता है। आज मनुष्य स्वार्थवश प्रकृति का दोहन कर रहा है।

जब मनुष्य द्वारा या प्राकृतिक रूप से पर्यावरण में व्यतिरेक उत्पन्न होता है तब प्रकृति खुद को अपने मूल स्थिति में लाने के लिए भूकंप का सहारा लेती है।

भूकंप के कारण सजीव और निर्जीव दोनों की हानि होती है लेकिन मानव जाति कुछ ही दिनों में प्रकृति का दोहन फिर से शुरू कर देती है।

आज पर्यावरण दोहन अपने चरम पर है। वैज्ञानिकों ने एक स्वर में कहा है की आज के जितना प्रकृति दोहन पहले कभी नहीं हुआ है। जिसके कारण आज तापमान तेजी से बढ़ रहा है। असमय वर्षा और मौसम का बदलाव तथा भूकंप से बड़ी मात्रा में विनाश हो रहा है।

अगर प्रकृति के दोहन को रोक कर फिर से उसे पहले जैसा नहीं किया गया तो वह समय दूर नहीं जब धरती पर जीवन का नामोनिशान नहीं बचेगा।

भूकंप क्या है? What is Earthquake in Hindi?

जब धरती की प्लेटें आपस में टकराती हैं तब उनमें कंपन्न उत्पन्न होता है जिसे भूकंप कहा जाता है। भूकंप को सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है।

भूकंप के वक़्त होने वाले कंपन्न से बड़ी मात्रा में धन तथा जान माल का नुकसान होता है जिसकी भरपाई करने में काफी समय गुजर जाता है।

इसकी अधिक तीव्रता के कारण जमीन फट सकती है तथा हिमपर्वत भी पिघल सकते हैं जिसके कारण बाढ़ या सुनामी जैसे हालात भी बन जाते हैं।

भूकंप के चार प्रकार होते हैं। विवर्तनिक, ज्वालामुखी, विस्फ़ोट तथा पतन। विवर्तनिक प्रकार के भूकंप को सामान्य भूकंप कहते हैं। जब भूकंप का कंपन्न अधिक होता है तब उसके कंपन्न से ज्वालामुखी की परते खुल जाती है और ज्वालामुखी जागृत हो जाता है। 

कई बार जब भूकंप आने के बाद धरती फट जाती है या किसी जगह से किन्ही गैस या तेल का प्रवाह निकलने लगता है, तो उसे विस्फ़ोटक प्रकार का भूकंप कहते हैं। 

जब भूकंप के कारण समुन्द्र अपने स्तर से ऊँचा उठ जाता है और बड़ी-बड़ी लहरे उत्पन्न करने लगता है और सुनामी की शकल में सब कुछ तहस नहस कर देता है तो उसे पतन प्रकार के भूकंप के नाम से जाना जाता है।

भूकंप आने कारण Reasons of Earthquake in Hindi

पृथ्वी के अंदर कई प्रकार के तरल तथा पत्थर की प्लेटें समाई हुई हैं। जब यह प्लेटें टूटती हैं या अपने स्थान से खिसकती हैं, तो अचानक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है और फलस्वरूप उन दो चट्टानों के टकराने से एक कंपन्न उत्पन्न होता है जिसे भूकंप के नाम से जाना जाता है।

पृथ्वी एक निश्चित गति से सूर्य का चक्कर लगा रही है, साथ ही अपनी धुरी पर भी घूम रही है। लेकिन किन्हीं कारणवश इसकी प्राकृतिक बनावट में व्यतिरेक उत्पन्न होता है तो भूकंप आते हैं।

आज जिस प्रकार पेड़ों की कटाई हो रही है तथा प्रदूषण का स्तर बढ़ रहे हैं। यह सभी भी भूकंप के कारणों में शामिल हैं। पेड़ पौधे पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखते हैं। पेड़ों की जड़ें जमीन में समाई होती हैं जिसके कारण जमीन एक दूसरे से जकड़ी होती हैं।

वृक्ष वर्षा चक्र को बनाए रखते हैं जिसके कारण धरती पर अनुकूल समय पर बरसात होती है तथा भूगर्भ की गर्मी कम होती है। इसके कारण इंसान को पीने का पानी धरती के ऊपरी स्तर पर ही मिल जाता है और उसे जमीन को गहरा खोदने की जरूरत नहीं पड़ती।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण अम्ल वर्षा तथा ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी हो रही हैं। जिसके कारण पेड़ पौधों तथा जमीन को नुकसान हो रहा हैं। यह सभी कारण हैं जिससे भूकंप आते हैं।

भूकंप के प्रभाव Impact of Earthquake in Hindi

मानव जीवन के लिए भूकंप अथवा कोई भी प्राकृतिक आपदाएं हानिकारक ही साबित होती हैं। भूकंप के प्रभाव से पशु पक्षी तथा इंसान कोई भी नहीं बच पाता।

भूकंप को रिक्टर स्केल के मापक पर मापा जाता है और 4 से ज्यादा रिक्टर स्केल के भूकंप को बहुत ही ज्यादा हानिकारक माना जाता है।

भूकंप के प्रभाव से बड़े-बड़े पेड़ अपनी जड़े खो देते हैं, ज्वालामुखी सक्रिय हो जाते हैं और धन का एक बड़े भाग का यूं ही नाश हो जाता है, जिसमें बड़ी बड़ी बिल्डिंगें, रेलवे ट्रैक, रोड तथा सांस्कृतिक विरासत भी शामिल हैं।

जापान में भूकंप की मात्रा बेहद अधिक होती हैं। जापान पूरी दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां पर एक भी प्राकृतिक नदियां नहीं है और जिसने भूकंप बाढ़ सुनामी से सबसे अधिक नुकसान झेला है। जापान में पांच रिक्टर स्केल के भूकंप को बेहद सामान्य माना जाता है।

इतिहास का सबसे खतरनाक भूकंप सन 1935 क्वेटा में आए भूकंप को माना जाता है। क्वेटा जैसे शहर की सुंदरता एक रात में नष्ट हो गई थी।

जिस स्थान को प्रवासियों के लिए स्वर्ग माना जाता था उस पर एक रात में कब्रिस्तान बनने का कलंक लग गया था। हजारों लाखों लोग नींद में ही काल के ग्रास बन गए थे और लाखों लोग घर से बेघर हो गए थे।

भूकंप से बचाव के उपाय (प्रबंधन) Earthquake Prevention Measures in Hindi

आधुनिक विज्ञान ऐसी कोई मशीन नहीं बना पाया है जिससे आने वाले भूकंप की जानकारी पहले से हो सके। लेकिन ऐसे कई बचाव के उपाय पुरानी किताबों में पाए गए हैं जिनसे बचाव मुमकिन हो सकता है। भूकंप से बचाव के रूप में सबसे पहला कदम मनुष्य का पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होना है।

आज हम प्रकृति के प्रति बिल्कुल भी सचेत नहीं है। इंसानी मस्तिष्क ने ऐसी मशीनें वह हथियार बनाए हैं जिससे प्रकृति का सीधे नाश होता है। अगर प्रकृति के प्रकोप से बचना है तो ऐसी मशीनों को नष्ट करना होगा।

उदाहरण के तौर पर एयर कंडीशनर में से निकलती गैस CFC क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस को लिया जा सकता है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस का एक अणु ओजोन स्तर के एक लाख परमाणुओं का नाश करता है।

भूकंप से बचाव के लिए हमें वन संरक्षण को बढ़ाना होगा तथा वृक्षारोपण में तेजी लानी होगी। युद्ध के स्थान पर बातचीत को तवज्जो देना होगा क्योंकि पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान हथियारों के प्रयोग से होता है। 

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में अपने भूकंप पर निबंध (Essay on Earthquake in Hindi) बड़ा आशा ही आलेख आपको सरल तथा जानकारी से भरपूर लगा होगा। अगर यह लेख आपको पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें।

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Earthquake Essay In Hindi

भूकंप पर निबंध – Earthquake Essay In Hindi

भूकंप पर निबंध – essay on earthquake in hindi.

यद्यपि प्राकृतिक आपदा जब भी गुस्सा दिखाती है तो कहर ढहाए बिना नहीं मानती है। आकाश तारों को छू लेने वाला विज्ञान प्राकृतिक आपदाओं के समाने विवश है। अनेक प्राकृतिक आपदाओं में कई आपदाएँ मनुष्य की अपनी दैन हैं। कुछ वर्षों में प्रकृति के गुस्से के जो रूप दिखे हैं, उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि प्रकृति के क्षेत्र में मनुष्य जब-जब हस्तक्षेप करता है तो उसका ऐसा ही परिणाम होता है जो सुनामी के रूप में और गुजरात के भयावह भूकंप के रूप में देखने और सुनने में आया।

इन दृश्यों को देखकर अनायास ही लोगों के मुँह से निकल पड़ता है कि जनसंख्या के संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रकृति में ऐसी हलचल होती रहती है, जो अनिवार्य रूप में हमेशा से होती रही है। वर्षा का वेग बाढ़ बनकर कहर ढहाता है तो कभी ओला, तूफान, आँधी और सूखा आदि के रूप में प्रकृति मनुष्यों को अपनी चपेट में लेती है। अपनी प्रगति का डींग हाँकने वाला विज्ञान और वैज्ञानिक यहाँ असहाय दिखाई देते हैं अर्थात् प्राकृतिक आपदाओं से संघर्ष करने की मनुष्य में सामथ्र्य नहीं है।

धरती हिलती है, भूचाल आता है। जब यही भूचाल प्रलयंकारी रूप ले लेता है, तो भूकंप कहलाता है। सामान्य भूकंप तो जहाँ-तहाँ आते रहते हैं, जिनसे विशेष हानि नहीं होती है। जब जोर का झटका आता है तो गुजरात के दृश्य की पुनरावृत्ति होती है। ये भूकंप क्यों होता है, कहाँ होगा, कब होगा? वैज्ञानिक इसका सटीक उत्तर अभी तक नहीं दे सके हैं।

हाँ भूकंप की तीव्रता को नापने का यंत्र विज्ञान ने जैसे-तैसे बना लिया है। सर्दी से बचने के लिए हीटर लगाकर, गर्मी से बचने के लिए वातानुकूलित यंत्र लगाकर, प्रकृति को अपने अनुकूल बनाने में सामान्य सफलता प्राप्त कर ली है, पर वर्षों के प्रयास के बावजूद भी इससे निजात पाने की बात तो दूर उसके रहस्यों को भी नहीं जान पाया है। यह उसके लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है। कुछ आपदाएँ तो मनुष्य की देन हैं।

अनुमानित वैज्ञानिक घोषणाओं के अनुसार अंधाधुंध प्रकृति को दोहन और पर्यावरण का तापक्रम बढ़ने से धरती के अंदर हलचल होती है और यह हलचल तीव्र हो जाती है तो भूकंप के झटके आने लगते हैं। धरती हिलने या भूकंप के बारे में अनेक किंवदंतियाँ प्रचलित हैं। कुछ धार्मिक व्याख्याओं के कारण यह धरती सप्त-मुँह वाले नाग के सिर पर टिकी है। जब नाग सिर बदलता है तो धरती हिलती है।

दूसरी किंवदंती है कि धरती धर्म की प्रतीक गाय के सींग पर टिकी है और जब गाय सींग बदलती है तो तब धरती हिलती है। कुछ धर्माचार्यों का मानना है कि जब पृथ्वी पर पाप-स्वरूप भार अधिक बढ़ जाता है तो धरती हिलती है और जहाँ पाप अधिक वहाँ धरती कहर ढहा देती है। इसके विपरीत वैज्ञानिक का मानना है कि पृथ्वी की बहुत गहराई में तीव्रतम आग है।

जहाँ आग है वहाँ तरल पदार्थ है। आग के कारण पदार्थ में इस तरह की हलचल होती रहती है। जब यह उथल-पुथल अधिक बढ़ जाती है तब झटके के साथ पृथ्वी की सतह से ज्वालामुखी फूट पड़ता है। पदार्थ निकलने की तीव्रता के अनुसार पृथ्वी हिलने लगती है। इनमें से कोई भी तथ्य हो, परंतु ऐसे दैवीय-प्रकोप से अभी सुरक्षा का कोई साधन नहीं है।

मनुष्य-जाति के अथक प्रयास से निर्मित, संचित सभ्यता एक झटके में मटियामेट हो जाती है। सब-कुछ धराशायी हो जाता है। वहाँ जो बच जाते हैं, उनमें हाहाकार मच जाती है। राजा और रंक लगभग एकसमान हो जाते हैं क्योंकि ऐसे दैवीय प्रकोप बिना किसी संकोच और भेदभाव के समान रूप से पूरी मानवता पर कहर ढहा देती है।

गुजरात में एकाएक, तीव्रगति से भूकंप हुआ। इस भूकंप ने शायद गुस्से से दिन चुना गणतंत्र दिवस 26 जनवरी। संपूर्ण देश गणतंत्र के राष्ट्रीय उत्सव में मग्न था। गुजरात के लोग दूरदर्शन पर गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम को देख रहे थे। तभी एकाएक झटका लगा धरती हिली। ऐसा लगा कि लंबे समय से धरती अपने गुस्से को दबाए हुए थी। आज उसका गुस्सा फूट पड़ा।

ऐसा फूटा कि लोग सोच भी न पाए कि क्या हुआ और थोड़ी ही देर में गगनचुंबी अट्टालिकाएँ, अस्पताल, विद्यालय, फैक्टरी और टेलीविजन के सामने बैठी भीड़ को उसने निगल लिया। शेष रह गई उन लोगों की चीत्कार, जो उसकी चपेट में आने से बच गए थे। बचने वाले लोगों के लिए सरकारी सहायता पहुँचने लगी। यह सहायता कुछ के हाथ लगी और कुछ वंचित रह गए।

वितरण की समुचित व्यवस्था न हो सकी। प्राकृतिक आपदा आकस्मिक रूप से अपना स्वरूप दिखाती है। ऐसे समय में मानवीय चरित्र के भी दर्शन होते हैं।

मानवता के नाते ऐसी आपदाओं में मनुष्य एकजुट होकर आपदा-ग्रसित लोगों का धैर्य बँधते हैं कि हम तुम्हारे साथ हैं। हम यथासंभव और यथासामथ्र्य तुम लोगों की सहायता करने के लिए तत्पर हैं। इस तरह टूटता हुआ धैर्य, ढाढस पाकर पुन: पुनर्जीवित हो उठता है। ऐसे समय में ढाढ़स की आवश्यकता भी होती है। यह मानवीय चरित्र भी है।

किंतु आश्चर्य तो तब होता है जब इस प्रकार के भयावह दृश्य को देखते हुए भी कुछ लोग अमानवीय कृत्य यानी पीड़ित लोगों के यहाँ चोरी, लूट आदि करने में भी संकोच नहीं करते हैं। एक ओर तो देश के कोने-कोने से और दूसरे देशों से सहायता पहुँचती है और दूसरी ओर व्यवस्था के ठेकेदार उसमें भी कंजूसी करते हैं और अपनी व्यवस्था पहले करने लगते हैं। ऐसे लोग ऐसे समय में मानवता को ही कलंकित करते हैं।

गुजरात में भूकंप के समय समाचार-पत्रों ने लिखा कि बहुत सी समाग्रियाँ वितरण की समुचित व्यवस्था न होने से बेकार हो गई। ऐसी प्राकृतिक आपदाएँ मनुष्य को संदेश देती हैं कि जब-तक जिओ, तब-तक परस्पर प्रेम से जिओ। मैं कब कहर बरपा दूँ। उसका मुझे भी पूर्ण ज्ञान नहीं है।

प्राकृतिक आपदा गीता के उस संदेश को दोहराती है कि कर्म करने में तुम्हारा अधिकार है फल में नहीं। यह प्राकृतिक आपदा मनुष्य को सचेत करती है और संदेश देती है कि मैं मौत बनकर सामने खड़ी हूँ। जब तक जी रहे हो तब तक मानवता की सीमा में रहो और जीवन को आनंदित करो. निश्चित और सात्विक रहो।

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भूकंप पर निबंध | Essay on Earthquake in Hindi

हेलो दोस्तों, आज हमलोग इस लेख में भूकंप पर निबंध के बारे में पड़ेंगे जो कि आपको क्लास 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 व अन्य competitive examination जैसे कि SSC, UPSC, BPSC जैसे उच्चाधिकारी वाले एग्जाम में अत्यंत लाभकारी साबित होंगे। भूकंप पर निबंध (Earthquake essay in Hindi) के अंतर्गत हम भूकंप से संबंधित पूरी जानकारी को विस्तार से जानेंगे इसलिए इसे अंत तक अवश्य पढ़ें।  

प्रस्तावना (Introduction)

‘भूकंप’ बस नाम ही काफ़ी है। ‘भू का कंपन’ यह विचार मात्र मानव के मन और मस्तिष्क में कंपन ही उत्पन्न नहीं करता वरन् झकझोर कर रख देता है। जब-जब प्रकृति ने अपने इस रूप के दर्शन कराए हैं, मानव की लाचारी और बेबसी ने घुटने टेक दिए हैं। मनुष्य की सारी प्रगति प्रकृति के इस रूप के समक्ष बौनी दिखाई देती है। प्रकृति के महाविनाश का यह भयानक रूप है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं करना चाहता। 

लेकिन मनुष्य के कल्पना करने या न करने से प्रकृति के कार्यक्रमों में कोई अन्तर नहीं आता। प्रकृति ही मनुष्य को पालती है, वह आदिकाल से मनुष्य की सहचरी रही है किन्तु उसके अपने क्रियाकलाप भी हैं जिन्हें हम प्राकृतिक परिवर्तन के रूप में समझ सकते हैं। यदि मानव मस्तिष्क इसकी पूर्व जानकारी पा सकता है तो इतना भी मानव जाति के हित में होगा।

भूकंप क्या है? (Earthquake in Hindi)

जब पृथ्वी के भीतर का तरल पदार्थ अत्यधिक गर्म हो जाता है तो इसकी भाप का दबाव बहुत बढ़ जाता है। इस दबाव से धरती की कई सतहों में परिवर्तन होता है, वे इधर-उधर खिसकती हैं, हिलती-डुलती हैं और धरती के गर्भ में उथल-पुथल मचाती हैं। इससे पृथ्वी के ऊपरी स्तर को भी धक्का लगता है और हम इसे भूकंप कहते हैं।

भूकंप से बचाव

हमारे देश की प्रकृति ऐसी नहीं है जहाँ प्रायः भूकंप आते हों, जैसे जापान आदि देशों की है। ऐसे स्थानों पर लोग भूकंप बचाव की क्षमता वाली इमारतों का निर्माण करते हैं तथा लकड़ी आदि का प्रयोग करके छोटे-छोटे निवास स्थान बनाते हैं। वहाँ भूकंप से जान-माल की हानि से बचाव के उपाय किए जाते हैं।

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भूकंप के कारण (Causes of Earthquake)

भूकंप का हल्का-सा झटका बहुत हानिकारक नहीं होता क्योंकि धरती के भीतर रासायनिक प्रक्रिया के कारण हर समय भूगर्भ में हल्के-हल्के झटके लगते रहते हैं जो धरती पर भौतिक रूप में अपने चिह्न प्रकट भी करते हैं। किन्तु जोर के शक्तिशाली झटके महाविनाशी होते हैं। जब पृथ्वी के नीचे स्थित प्लेटो में घर्षण होता है तो वहां दबाव पैदा होता है। जिससे तरल पदार्थ निकलता है जो बहुत ही गर्म होता है। जिसका वाष्प बाहर निकलने का प्रयास करता है।

यही भूकंप का वास्तविक और वैज्ञानिक कारण है। हमारे पुराणों में मान्यता रही है कि धरती शेषनाग के फन पर टिकी है। जब धरती पर पापों का बोझ बढ़ जाता है, तब भगवान शेषनाग ही भूकंप के द्वारा अपना क्रोध प्रकट करते हैं।

essay on recent earthquake in hindi

भूकंप का प्रभाव (Effect of Earthquake)

इस मान्यता का भी यदि यह अर्थ लिया जाए कि पृथ्वी पर प्रकृति के प्रकोपों को कम या शून्य करने के लिए शान्ति बनाए रखना बहुत ज़रूरी है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है। इसे हम स्वस्थ चिन्तन के साथ लें तो ही अच्छा होगा। भूकंप कुछ सेकंड या मिनट ही रहता है परन्तु इतने कम समय में ही भारी विनाश हो जाता है। 

भूकंप के भारी झटके से धरती पर दरारें पड़ जाती हैं और उनमें से गर्म लावा और विषैली वायु बाहर निकलती है। देखते ही देखते बड़ी-बड़ी इमारतें धराशायी हो जाती हैं। कई बार बड़े-बड़े भवन धरती के गर्भ में फँस जाते हैं। हज़ारों लोग मलबे के नीचे दबकर मर जाते हैं या घायल हो जाते हैं। लाखों लोग बेसहारा तथा बेघर हो जाते हैं। कभी-कभी हरे-भरे गाँव तथा सुन्दर नगर खण्डहरों में बदल जाते हैं।

essay on recent earthquake in hindi

भूकंप के कारण भू-स्खलन भी होता है, जो नदी वाहिकाओं को अवरुद्ध कर जलाशयों में बदल देता है। कई बार नदियाँ अपना रास्ता बदल लेती हैं जिससे प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ और दूसरी आपदाएँ आ जाती हैं।

वर्ष 2001 में छब्बीस जनवरी प्रात:काल ऐसा ही महाविनाशकारी भूकंप गुजरात के भुज शहर में आया, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे शहर को एक मलबे के ढेर में बदल दिया। पूरा कच्छ प्रदेश भी काँप गया। सभी सहम गए, कोई कुछ न कर सका। 

वर्ष 1990 में उत्तरकाशी में भी ऐसा ही महाविनाशकारी भूकंप आया था। इस स्थिति में नदियों के प्रवाह, समुद्र और पर्वतों के स्थान भी बदल जाते हैं। कभी-कभी ज़मीन के नीचे दबे हुए प्राचीन संस्कृति तथा सभ्यता के अवशेष भूकंप के कारण बाहर निकल आते हैं। ऊपर की धरती नीचे तथा नीचे की धरती ऊपर आ जाती है।

भूकंप से बचाव के लिये उठाये गए कदम

कच्छ (गुजरात), लाटूर (महाराष्ट्र) में भयंकर भूकंप आए हैं। भूकम्प द्वारा हुई क्षति (हानि) को दृष्टि में रखते हुए अब हमारी सरकार ने इस दिशा में विशेष क़दम उठाए हैं तथा इस तरह के भवन निर्माण करने की योजना है जिससे भूकम्प आने पर कम से कम क्षति हो।

भूकंप के पश्चात् सरकारी और गैर-सरकारी लोगों तथा संस्थाओं द्वारा राहत कार्य शुरू होते हैं। भूकंप पीड़ितों को अन्न, वस्त्र, दवाइयों आदि की सहायता पहुँचाई जाती है। मलबा हटाया जाता है, खुदाई की जाती है। मलबे के नीचे दबे हुए लोगों में से कई जीवित भी पाए जाते हैं। इस समय इस राहत कार्य के साथ-साथ लोगों को सदमे की हालत से बाहर लाने की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। 

मनुष्य की मानवता और सेवा भावना भी ऐसे ही समय प्रकट होती है। सरकार के लिए पूरे क्षेत्र की भंग हुई संचार, यातायात, पानी और बिजली की व्यवस्था आदि का कार्य विस्तृत रूप ले लेता है। ऐसे समय में सभी से यथासंभव सहायता और सहयोग की आशा की जाती है। यह संसार एक दूसरे के सहयोग से ही चलता है। 

भूकंप से होने वाले हानि को कम करने के उपाय 

दूसरी आपदाओं की तुलना में भूकंप अधिक विध्वंसकारी हैं। चूँकि यह परिवहन और संचार व्यवस्था भी नष्ट कर देते हैं इसलिए लोगों तक राहत पहुँचाना कठिन होता है। भूकंप को रोका नहीं जा सकता। अतः इसके लिए विकल्प यह है कि इस आपदा से निपटने की तैयारी रखी जाए और इससे होने वाले नुकसान को कम किया जाए। इसके निम्नलिखित तरीके हैं : 

(i) भूकंप नियंत्रण केंद्रों की स्थापना, जिससे भूकंप संभावित क्षेत्रों में लोगों को सूचना पहुँचाई जा सके। GPS (Geographical Positioning System) की मदद से प्लेट हलचल का पता लगाया जा सकता है। 

(ii) देश में भूकंप संभावित क्षेत्रों का सुभेद्यता मानचित्र तैयार करना और संभावित जोखिम की सूचना लोगों तक पहुँचाना तथा उन्हें इसके प्रभाव को कम करने के बारे में शिक्षित करना।। 

(iii) भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में घरों के प्रकार और भवन डिज़ाइन में सुधार लाना। ऐसे क्षेत्रों में ऊँची इमारतें, बड़े औद्योगिक संस्थान और शहरीकरण को बढ़ावा न देना। 

(iv) अंततः भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में भूकंप प्रतिरोधी (resistant) इमारतें बनाना और सुभेद्य क्षेत्रों में हल्के निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करना।

भूकंप और मनोबल में संबंध

भूकंप की स्थिति में सबसे अधिक काम आता है व्यक्ति का स्वयं का मनोबल। हमें सुख की भाँति दु:ख लिए भी समान रूप से तैयार रहना चाहिए। सुख और आनन्द की भाँति आपदाएँ, विपदाएँ भी आएँगी परन्तु जो बहादुर हैं, उनका धैर्यपूर्वक मुक़ाबला करते हैं, जीवन का आनन्द बार-बार उनका स्वागत करता है। जो कमज़ोर हैं, धैर्य नहीं रखते हैं, भूकंप के एक-दो झटकों में ही उनकी हृदयगति रुक जाती है। 

जिससे आगे का दृश्य झेलने और देखने का न उनमें साहस होता है, न ही उन्हें अवसर मिलता है। कठिन समय में ही व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा होती है। ऐसे समय का जो बहादुरी से सामना कर गए वे जी गए। जीवन जीने के लिए है और यह सिर्फ बहादुरों के लिए है।

Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

उत्तर: L तिरंगे

उत्तर: सुनामी

उत्तर: भूकंप की तीव्रता

उत्तर: भूकंपीय तरंगों को

उत्तर: भूकंप

उत्तर: टेकटोनिज्म

उत्तर: सीस्मोलॉजी

उत्तर: जॉन मिल

उत्तर: 0 से 10

उत्तर: मरकैली मापनी (Mercalli Scale)

उत्तर: P (प्राथमिक या अनुदैर्ध्य तरंग)

उपसंहार (Conclusion)

दोस्तों मुझे आशा है कि आपको हमारा लेख भूकंप पर निबंध (Essay on Earthquake in Hindi)  पढ़ कर अच्छा लगा होगा और आपके सभी प्रश्नों के उत्तर मिल गए होगें।

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भूकंप पर निबंध

Essay on Earthquake in Hindi: हम यहां पर भूकंप पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में भूकंप के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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भूकंप पर निबंध | Essay on Earthquake in Hindi

भूकंप पर निबंध (250 words).

प्रकृति आपदा भूकंप एक खतरनाक आपदा है । धरती के अचानक हिलने से एक कंपन उत्पन्न होती है, इस घटना को भूकंप कहा जाता है। जब हमारी पृथ्वी की आंतरिक सतह अधिक गर्म हो जाती है, तो एक हलचल सी उत्पन्न होती है। तब उस स्थिति में भूकंप की स्थिति उत्पन्न होती है। भूकंप कभी – कभी बहुत ही धीमी गति से आता है, जिसका सिर्फ हमें आभास होता है कि भूकंप की कम्पन सी उत्पन होती है। कभी -कभी भूकंप अचानक बहुत तेजी से आता है, जिससे काफ़ी मात्रा में नुकसान होता है।

भूचालआने से हमारे जीवन मे बहुत अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है, भूकंप आने से हमारा जीवन अस्त – व्यस्त हो जाता है।अभी कुछ सालों पहले गढ़वाल और महाराष्ट्र मे भूकंप आने से लोगों के पर जीवन बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था। भूकंप  के कम्पन उत्पन्न होने से लोगों के मकान गिर गये। पशु,पक्षी आदि भूकंप की चपेट में आकर दबकर लाखों जीव – जंतुओ की मौत हो गई और महाराष्ट्र में आये हुये भूकंप के कारण मकान और पेड़ -पौधों कंपन के कारण गिरते है और उसकी चपेट मे काफ़ी लोग दब कर घायल हो जाते है और कुछ लोगों की मौत हो जाती है और जो लोग घायल होकर ठीक होते वह पैर से, तो कही हाथ से लाचार हो जाते है।

भूकंप ऐसी प्रकृति आपदाएं होती हैं, जिन को रोकना बहुत ही मुश्किल होता है। भूकंप के आने से बहुत सी विकट समस्याएं उत्पन्न होती हैं। भूकंप को आने से रोका तो नहीं जा सकता है, लेकिन जिस कारण से भूकंप आता है। उन कारणों पर तो रोक लगा कर कुछ हद तक प्राकृतिक आपदा को कम किया जा सकता है।

भूकंप पर निबंध (800 Words)

दुनिया के शुरुआत में कई बार भूकंप आ चुका है, जिसके कारण से दुनिया भर में बहुत से लोग इसकी चपेट में आकर पीड़ित हुए हैं। सन 1988 से 2001 के बीच दुनिया भर मे 6 बार भूकंप आ चुका है। 1950 से 1975  के बीच में लगभग दुनिया भर के कई हिस्सों में 4 बार भूकंप आ चुके होते है। भूकंप किस जगह आएगा, कितने समय आएगा भूकंप का अनुमान लगाना किसी के बस की बात नहीं होती है, क्योंकि भूकंप एक प्राकृतिक आपदा होती है, जो प्रकृति पर निर्भर होती है, इसको नियंत्रित करना हमारे बस की बात नहीं होती है।

आज से लाखों वर्षों पहले पृथ्वी का निर्माण हुआ था। उस समय पृथ्वी एक जलता हुआ आग का पिंड या सबसे गर्म ग्रह होता था। समय के साथ पृथ्वी की सतह ठंडी हो गई और पृथ्वी का आंतरिक भाग तरल है, जिसके कारण पृथ्वी की आंतरिक सतह का तापमान बढ़ने लगता है। पृथ्वी की सतह का तापमान विभिन्न स्तरों में बदलता रहता है, पृथ्वी की सतह में गड़बड़ी की वजह से ही पृथ्वी की सतह गर्म हो जाती है और भूकंप आने के खतरा महसूस होने लगता है।

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आया भूकंप

दुनिया के किन-किन हिस्सों में आया भूकंप आइए जानते हैं,

1908 मे इटली शहर में भूकंप आने से लाखों लोगों की मौत हुई, उनमें से कुछ लोग घायल हुए और लोगों के घर – बार उजाड़ कर नष्ट हो गया, लोगों का काफ़ी नुकसान हुआ।

पेरू में सन 1960 में भूकंप आने के कारण काफ़ी लोग घायल हुये और 60,000 लोग भूकंप की चपेट में आये और उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

चीन में सन 1958 मे भूकंप के आने के कारण 1 लाख लोगों की मौत हो गई।

बिहार में सन 1934 मे भूकंप आने से 1 लाख से अधिक लोगों की जान गई।

लातूर में सन 1933 मे भूकंप के आने के कारण 1,50,000 लोग की मृत्यु हुई है।

गुजरात में सन 2001 मे भूकंप आने से 2लाख लोगों की मृत्यु हुई है।

भूकंप के आने से कई देशो में बहुत अधिक संख्या में लोगों की दर्दनाक मौते हुई है।

भूकंप आने के कारण

भूचाल कई कारणों से आता है, कि जैसे कि पृथ्वी में कई छोटे-बड़े टेक्निकल प्लेट्स होते हैं। जिनके कारण भूकंप विवर्तनिक प्लेट् से टकराकर ब्लेट में आ जाती है। ये प्लेट एक -दूसरे के दूर रहकर गति करती है, तो कभी एक – दूसरे के पास रहकर गति करती है। जिसके कारण यह आपस में टकराती है और झटके के साथ मुफ्त ऊर्जा के रूप में बाहर निकलती है और भूकंपी तरंगे उत्पन्न करती हैं। जिसको भूकंप कहा जाता है।

भूकंप आने का एक कारण ज्वालामुखी का विस्फोट भी होता है। ज्वालामुखी का जब किसी क्षेत्र में विस्फोट होता है, तो उसके प्रभाव कई क्षेत्रों में देखने को मिलते हैं। ज्वालामुखी विस्फोट के प्रभाव के कारण कुछ नजदीकी क्षेत्रों की भूमि में कंपन उत्पन्न होता है। जिसको भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट कहते है।

ज्वालामुखी विस्फोट का प्रभाव कुछ क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है और कुछ क्षेत्रों में इसका प्रभाव कम देखने को मिलता है, यह ज्वालामुखी विस्फोट पर ही निर्भर करता है।

भूकंप के आने से नुकसान

धरती में भूकंप आने से हमें बहुत नुकसान होता है। पृथ्वी में विभिन्न प्रकार के हरे पेड़ -पौधों, जीव जंतुओं के होने से हमारी धरती बहुत ही सुन्दर प्रतीत होती है। लेकिन भूकंप के आने से पल भर में पेड़ -पौधे जीव – जंतु और ससब कुछ तहस – नहस हो जाते है। बड़ी -बड़ी बिल्डिंग, भवन, बिजली के खंभे, मंदिर, मस्जिद, चर्च, सरकारी पाठशालाएं, सरकारी कार्यस्थल आदि सभी भूकंप के कंपन आने से टूट- फूट कर सब कुछ नष्ट हो जाता है।

भूकंप के आने से बहुत से क्षेत्र प्रभावित होते हैं। पृथ्वी के सबसे कमज़ोर सतह पर भूकंप आने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि कमजोर भूमिगत में भूकंप जल्दी आते है। वहां की भूमि कमज़ोर और दरार वाली होती है, जहां पर ज्वालामुखी के विस्फोट होने का खतरा अधिक रहता है। भूकंप के साथ कुछ प्राकृतिक आपदाएं भी होती हैं, जैसे -तेज तूफान चलना, बाढ़ का आना ये सभी प्राकृतिक आपदाएं है।

विद्युत लाइन टूट जाती है और आग भी लगने से काफ़ी नुकसान होता है, यदि आग एक बार लग गई तो उसको रोकना काफ़ी मुश्किल होता है और यदि ऐसे में जल का स्रोत विस्फोट हो जाये तो आग को फैलने से रोका जा सकता है और काफ़ी हद तक होने वाले नुकसान को भी रोका जा सकता है।

भूकंप से बचने के उपाय

भूकंप के आने से हमको ऐसा महसूस होता है, कि जैसे हम को कोई हिला रहा हो। अगर भूकंप कम तीव्रता से आता है, तो कुछ व्यक्तियों को पता भी नहीं चलता है और कभी -कभी बहुत तेज झटका देकर भूकंप आता है, जिससे पूरी धरती में कंपन उत्पन्न होने लगती है। जैसे ही भूकंप के झटके आने का खतरा महसूस होने लगे तो खुद के बचाव के लिए मजबूत टेबल, कुर्सी को पकड़कर बैठ जाये।

भूचाल के झटके आने पर हमें एक ही जगह पर रह कर स्वयं का बचाव करना चाहिये, और खिड़की और अलमारियों से दूर रहना चाहिए, ताकि वह हम पर झटके के कारण गिरे नहीं।

यदि आप ऊंची बिल्डिंग में रहते है और भूकंप के झटके आने लगते हैं, तो ऐसे में ऊंची बिल्डिंग का गिराना स्वाभाविक होता है, तो हमें नीचे उतर कर किसी सुरक्षित जगह पर बैठ जाना चाहिए, जब तक भूकंप के झटके आना खत्म नहीं हो जाते है।

अगर आप कही है और कार चलाते है, तो उस समय आपको भूकंप के झटके आने मासूस होने लगते है, तो ऐसे में हमको एक जगह गाड़ी खड़ी करके तुरंत किसी खुले मैदान में बैठे जाना चाहिये, तब तक भूकंप के झटके आना बंद नहीं हो जाते है। और ऐसे में हमें लिफ्ट से ऊपर बिल्डिंग में जाने नहीं सोचना चाहिये, क्योंकि ऐसे में आप को झटके से आपको चोट भी आ सकती है। अगर आप बाजार, स्कूल के बीच मे फंस गये है तो ऐसे में खुले स्थान पर बैठे और बिजली के तार से दूर हो कर बैठे जब तक भूकंप के झटके आने खत्म नहीं हो जाते।

भारत मे भूकंप के आने से  काफ़ी नुकसान हुआ है। सिर्फ भूकंप के कारण लोग लाखों की सम्पति और घर सब कुछ खो देते है। भूकंप के कारण ऊँची बिल्डिंग, कर्मचारी कार्यालय, भवन, जीव -जंतु  और कई व्यक्तियों को काफी नुकसान हुआ है।

भूकंप सभी के जीवन में बहुत बुरा प्रभाव डालता है। यह एक प्राकृतिक आपदा होती है। इस पर कोई नियंत्रण नहीं कर सकता है। प्राकृतिक आपदा में कब क्या हो जाये इसका अनुमान कोई नहीं लगा सकता है।

हमने यहां पर “ भूकंप पर निबंध ( Essay on Earthquake in Hindi )   ” शेयर किया है। उम्मीद करते हैं कि आपको यह निबंध पसंद आया होगा, इसे आगे शेयर जरूर करें। आपको यह निबन्ध कैसा लगा, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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भूकंप पर निबंध (Earthquake Essay In Hindi)

भूकंप पर निबंध (Earthquake Essay In Hindi Language)

आज   हम भूकंप पर निबंध (Essay On Earthquake In Hindi) लिखेंगे। भूकंप पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

भूकंप पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Earthquake In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे , जिन्हे आप पढ़ सकते है।

हमारी इस धरती पर कई प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, जिनके माध्यम से सामान्य जनजीवन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसी भी प्राकृतिक आपदा से कई प्रकार की हानियां होती हैं, जिनमें मुख्य रूप से भूकंप शामिल है। जो कहीं ना कहीं हमारे अंदर डर और घबराहट के भाव उत्पन्न करता है।

भूकंप क्या है?

भूकंप एक ऐसे प्राकृतिक आपदा के रूप में जाना जाता है, जिसमें धरती के आंतरिक सतह के अधिक गर्म हो जाने की वजह से ऊपरी सतह पर एक कंपन उत्पन्न होती है और इस स्थिति को ही भूकंप कहा जाता है। जब भी भूकंप आता है, तो हमेशा उसकी तीव्रता के आधार पर ही इस बात की गणना की जाती है कि आने वाला भूकंप धीमा है या फिर तेज।

जब कभी भूकंप ज्यादा तीव्रता से आता है, तो ऐसी स्थिति में काफी मात्रा में नुकसान हो जाता है। जिसका भुगतान करना किसी के लिए भी आसान नहीं होता है।

भूकंप की तीव्रता का मापन

अगर भूकंप आता है तो ऐसी स्थिति में रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का मापन किया जाता है। जिसके आधार पर ही इस बात के बारे में जानकारी दी जाती है कि आने वाला भूकंप कितना खतरनाक था। ऐसे में सिस्मोग्राफ के माध्यम से भी भूकंप की तीव्रता के बारे में जानकारी ली जाती है।

भूकंप आने के मुख्य कारण

जब कभी खतरनाक भूकंप आता है, तो ऐसे में उनके कारणों को समझना आसान नहीं होता है। लेकिन भूकंप आने का एक विशेष कारण पृथ्वी में विभिन्न प्रकार के बने टेक्निकल प्लेट में आने वाली गति है, जिसके अंतर्गत यह टेक्निकल प्लेट आपस में टकराने लगते हैं और एक अतिरिक्त उर्जा बाहर निकलती है। जिस वजह से भूकंप की तरंगे उत्पन्न होती हैं और भूकंप का रूप लेकर त्रासदी का कारण बन जाती हैं।

भूकंप के माध्यम से होने वाले बड़े नुकसान

जब भी किसी क्षेत्र में भूकंप आता है, ऐसी स्थिति में वहा पर नुकसान भी काफी हद तक होता है। जिनमे होने वाले बड़े नुकसान कुछ इस प्रकार है। 

1) जब भी किसी क्षेत्र में भूकंप उत्पन्न होता है, तो उसके बाद पूरे इलाके को तहस-नहस हुआ देखा जाता है। जहां पर बड़ी बड़ी बिल्डिंग, इमारत, मंदिर, मस्जिद, चर्च, स्कूल, अस्पताल टूट-फूट कर बिखरे हुए होते हैं और काफी ज्यादा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

2) जब भी कोई खतरनाक भूकंप आता है, तो उसके माध्यम से बिजली की तारे टूट जाती हैं और उस स्थान पर बिजली का आवागमन रुक जाता है। कभी-कभी ऐसी जगहों पर बिजली को दोबारा लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है और काफी नुकसान उठाना पड़ जाता है।

3) भूकंप के आने से जानमाल का काफी ज्यादा नुकसान होता है और काफी लोगों की मौत हो जाती है। यही नहीं कही लोग बहुत ही गंभीर रूप से जख्मी हो जाते है, जिनमे बच्चे, बड़े और बूढ़े सभी लोग शामिल है। भूकंप के आने से लोगो के साथ साथ पशु पक्षियों का भी नुकसान होता है।

4) जब भी भूकंप आता है, तो परिवारों के बीच में दूरियां देखी जाती हैं। कई लोग भूकंप में अपने परिवार के सदस्यों को खो देते है। जहां कभी कभी इस बात का भी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि परिवार का सदस्य जीवित है या नहीं? ऐसे में यह बड़े नुकसान की ओर इशारा करता है। ऐसे स्थिति में शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत रहना आसान नहीं होता है।

भूकंप से बचने के कुछ खास उपाय

जब भी भूकंप आता है तो हमें कुछ समझ नहीं आता कि आगे हमें क्या करना चाहिए? ऐसी स्थिति में अगर आप कुछ उपाय करते हैं, तो निश्चित रूप से ही भूकंप में अपना बचाव कर सकते है। जिनमे से कुछ उपाय इस प्रकार है। 

1) जब कभी आप भूकंप के झटके या कंपन का एहसास करते हैं, तो जल्द से जल्द आपको ऐसी जगह पर चले जाना चाहिए जो खुली हो और जहा आस पास खाली जगह हो।

2) भूकंप आने का अहसास होते ही आपको सभी बिजली के स्विच को बंद कर देना चाहिए, ताकि ज्यादा नुकसान होने की संभावना ना रहे।

3) अगर आप किसी प्रकार का वाहन चला रहे है और आपको भूकंप के कंपन महसूस होते हैं, तो आपको तुरंत ही अपने वाहन को रोक देना चाहिए और वाहन से बाहर निकल कर खुली जगह चले जाना चाहिए।

4) एक बात हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि भूकंप से बचने के लिए आपको बिजली के तारों से भी दूर रहना चाहिए, ताकि जब भूकंप आये तो आपको बिजली के टूटी तारो से नुकसान ना हो सके।

5) भूकंप के आने पर कभी भी घबराना नहीं चाहिए, बल्कि हिम्मत से काम लेते हुए अपने आपको और अपने परिवार और दोस्तों को घर से बाहर किसी सुरक्षित जगह पर ले जाना चाहिए।

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आये हुए भूकंप

आज तक दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कई प्रकार के घातक भूकंप आ चुके हैं, जिनके माध्यम से जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है। जिनमे से कुछ भूकंप के बारे में निचे दिया गया है। 

1) पेरू में 1960 में आने वाला भूकंप आज भी लोगों के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां लगभग 60,000 लोग भूकंप की चपेट में आए और कई लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी।

2) इसके अलावा 1960 में इटली में आने वाले भूकंप की वजह से भी काफी तबाही देखी गई थी और उस समय का भूकंप इतना भयानक था कि लोगों के घर नष्ट हो चुके थे और जान माल का काफी नुकसान हुआ था।

3) 1958 में चीन में आने वाला भूकंप सबसे बड़ी तबाही के लिए जाना जाता है, जहां लगभग 100000 लोगों की मृत्यु हुई थी।

4) भारत के गुजरात में 2001 में आया भूकंप भी बहुत ही खतरनाक माना जाता है, जिसमे लगभग 200000 लोगों की मृत्यु हुई और कई हजारों लोग घर से बेघर हो गए थे।

5) इसके अलावा लातूर में 1933 में भूकंप की वजह से लगभग डेढ़ लाख लोगों की मृत्यु हुई और कई हजारों लोग बुरी तरह से घायल हुए थे और जान-माल का बहुत नुकसान हुआ था।

6) अभी हाल ही में टर्की में भूकंप आया था, जिसमे लगभग 50000 के आसपास लोगो की मृत्यु हुई और कई लोग जख्मी हुए है। यह भूकंप 6 फरवरी 2023 को आया था।

इस प्रकार से आज हमने भूकंप के बारे में उचित जानकारी प्राप्त की है, जिसका नाम सुनते ही मन में घबराहट होने लगती है। लेकिन अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो हम भूकंप जैसी प्राकृतिक विपदा से काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं। हमे हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के बारे में जानकारी रखनी चाहिए और पीड़ितों की हर तरह से मदद करनी चाहिए। 

इन्हे भी पढ़े :-

  • आपदा प्रबंधन पर निबंध (Disaster Management Essay In Hindi)
  • सूखा पर निबंध (Drought Essay In Hindi)
  • बाढ़ पर निबंध (Flood Essay In Hindi)

तो यह था भूकंप पर निबंध , आशा करता हूं कि भूकंप पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Earthquake) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है , तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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Essay on Earthquake in Hindi – भूकंप पर निबन्ध

November 18, 2017 by essaykiduniya

Get information about Earthquake in Hindi Language. Here you will get Paragraph and Short Essay on Earthquake in Hindi Language / Bhukamp Essay in Hindi Language for students of all Classes in 100, 200, 300, 400 words. यहां आपको सभी कक्षाओं के छात्रों के लिए हिंदी भाषा में भूकंप पर निबन्ध मिलेगा।

Essay on Earthquake in Hindi

Paragraph & Essay on Earthquake in Hindi – भूकंप पर निबन्ध ( 100 words )

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जो कि बहुत ही नुकसानदायक है। भूकंप स्थलमंडल में ज्यादा मात्रा में ऊर्जा के मुक्त होने और नीचे की स्तह में प्लेटों के हिलने की वजह से होता है। भूकंप को मापने के लिए सिसमोग्राफ का प्रयोग किया जाता है। जब भूकंप आता है तो हमें झटके महसूस होते है और यह झटके इतने ताकतवर होते है कि ऊँची ऊँची इमारतों को भी गिरा देते हैं। भूकंप के आने पर बहुत से नगर तहस नहस हो जाते हैं। भूकंप के कारण मानव को जीवन की क्षति भी होती है। भूकंप आने पर हमें खुले मैदान में भाग जाना चाहिए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।

Short Essay on Earthquake in Hindi Language – भूकंप पर निबन्ध ( 200 words )

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसके आने की घोषणा पहले से नहीं की जा सकती है। भूकंप पहाड़ो वाले क्षेत्रों में अधिक आते हैं। भूकंप के आनो को बहुत सो कारण है जैसे अधिक गर्मी के कारण ज्वालामुखी का फटना। धरती के नीचे चट्टानों का खिसकना। धरती के नीचे मौजुद प्लेटस का टकराना या फिर खिसकना। भूकंप के आने पर धरती डोलने लगती है जिस वजह से मकान पेड़ पौधे आदि गिर जाते हैं और लाखों इंसान और पशु पक्षी उनके नीचे दब कर मर जाते हैं। भूकंप जब भी आता है बहुत तबाही मचाकर जाता है।

भूकंप धरती पर बोझ के कारण भी आता है और इसके आने पर सबसे ज्यादा खतरा ऊँची इमारतों के गिरनो का होता है। भूकंप के आने पर सभी लोगों को घर से बाहर खुले मैदान में चले जाने चाहिए। भूकंप के आने का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता लेकिन उससे बचने की बहुत सी तैयारियाँ की जा सकती हैं। इसके लिए लोगों को लकड़ी के घरों में रहने की सलाह दी जाती है। उन्हें अपने पास एक मोबाईल फोन और टॉर्च जरूर रखनी चाहिए। भूकंप को रोकना मनुष्य के लिए संभव नहीं है लेकिन पेड़ पौधे भूकंप से हमारी रक्षा करते हैं। इसलिए भूकंप जैसी आपदा रोकने को लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना चाहिए।

Essay on Earthquake in Hindi Language – भूकंप पर निबन्ध ( 300 words )

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जो किसी भी समय और कहीं भी पृथ्वी की सतह पर हो सकती है, जिससे जीवित प्राणियों और उपयोगी प्राकृतिक संसाधनों की बहुत गड़बड़ी होती है।

भूकंप के मुख्य कारणों में से एक प्लेट टेक्टोनिक्स है जो पृथ्वी की सतह में विवर्तनिक आंदोलनों का कारण बनता है। धरती की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के साथ टकराती हैं और दूसरे पर चढ़ाई करती हैं जो पहाड़ी निर्माण, भूकंप और ज्वालामुखी का कारण बन जाती हैं। यह प्रक्रिया ऊर्जा का एक विशाल स्तर जारी करती है जो एक बल बनाता है और इस प्रकार सतह आंदोलन।

जहां भी भूकंप होते हैं, जीवन और संपत्ति के नुकसान, भूस्खलन, वनस्पति और पशु जीवन का नुकसान, धरनाओं का विनाश और दोषों के विकास और पृथ्वी की सतह में भंग के अलावा आम तौर पर भूकंप होते हैं और ये सभी पर्यावरण क्षरण को जाता है। दुनिया में भयावह भूकंपों की सूची यहां बहुत लंबी है, जिनके बारे में यहां बताया गया है। भारत में, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र-उत्तर-पूर्वी राज्यों के क्षेत्रों में भूकंप की घटनाएं आम हैं।

सबसे हाल ही में भूकंप 26 जनवरी 2001 को गुजरात में और कश्मीर में 28 मार्च 1999 को हुई, जिसमें पूरे क्षेत्रीय पारिस्थितिक तंत्र से परेशान होने के अलावा संपत्ति और जीवन की भारी क्षति की सूचना मिली।

वास्तव में, प्राकृतिक खतरों के बीच भूकंप सबसे विनाशकारी होते हैं।

भूकंप से सुरक्षित रहने के तरीके : 

लोगों को शांत रहना चाहिए और दरवाजे के अंदर या बाहर रहना चाहिए, लेकिन खिड़कियों, इमारतों और बिजली लाइनों से दूर रहना चाहिए। उन्हें इमारत के केंद्र के पास की दीवार के द्वार पर खड़े होना चाहिए और कुछ भारी फर्जीचर जैसे डेस्क या टेबल के नीचे क्रॉल करना चाहिए। यदि कोई गाड़ी चला रहा है, तो उसे कार को रोकना चाहिए और भूकंप बंद होने तक अंदर रहना चाहिए।

Essay on Earthquake in Hindi – भूकंप पर निबन्ध ( 400 words )

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसे भूचाल के नाम से भी जाना जाता है और इसकी तीव्रता से पता लगता है कि यह कितना विनाशकारी है। भूकंप अक्सर स्थलमंडल में अत्यधिक ऊर्जा के उतपन्न होने और पृथ्वी की सतह में परतों में कंपन के कारण आता है। अक्सर बहुत बार हम भूकंप के हल्के झटकों को महसूस करते है पर कई बार यह झटके बहुत ही खतरनाक होते हैं। भूकंप धरती की सतह में उठने वाली तरंगो से उत्पन्न होता है और भूकंप को रिएक्टर में मापा जाता है और इसे मापने के लिए सिस्मोमीटर का प्रयोग किया जाता है।

भूकंप में उठने वाली तरंगे तीन प्रकार की होती है। प्राथमिक तरंगे वह होती है जिनसे केवल दो या तीन रियेक्टर भूकंप आता है जिससे कोई हानि नहीं होती है। माध्यमिक तरंगों में हानि से सावधानी बरत कर बचा जा सकता है। इसमें चार से सात रिएक्टर तक का भूकंप आता है। सतह तरंगे वह तरंगे है जो बहुत ही आतंक मचाता है और यह 7 रिएक्टर से ज्यादा होता है।

भूकंप बहुत ही विनाशकारक है जिससे बहुत से नगर और कस्बें तबाह हो जाते है। भूकंप से बहुत सी ऊँची ईमारते ध्वस्त हो जाती है। भूकंप आने पर सबसे ज्यादा नुकसान जान का होता है।

भूकंप से पहले से ही सावधानियाँ बरतने से हम विनाश से बच सकते हैं। हमें खबरों में मिल रही चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और भूकंप से बचने के इंतजाम करने चाहिए। हमें भूकंप आने पर बाहर खुले मैदान में चले जाना चाहिए और गैस सिलिंडर और बिजली के मेन स्विच को बंद कर देना चाहिए। भूकंप के समय यात्रा नहीं करनी चाहिए और वाहन में नहीं बैठना चाहिए। भूकंप के समय पर कभी भी ऊँची या पहाड़ी वाले स्थान पर खड़े नहीं होना चाहिए और न ही कुएँ के पास खड़ा होना चाहिए।

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसके आने का कोई समय निर्धारित नहीं है और न हीं मनुष्य के पास इसका कोई समाधान नहीं है लेकिन फिर भी कुछ छोटे मोटे उपाय करके हानियौं से बचा जा सकता है। हम सबको आधुनिक विग्यान की सहायता लेकर भूकंप से बचने के उपाय करने चाहिए। पेड़ पौधे भी भूकंप से हमारी रक्षा करते है। हमें अपने साथ हमेशा पानी की बोतल, टॉर्च और आपातकालिन चिकित्सा बॉक्स रखना चाहिए। हमें भूकंप आने पर भयभीत नहीं होना चाहिए अपितु सुझ बुझ से इसका सामना करना चाहिए और दुसरों की भी मदद करनी चाहिए।

हम उम्मीद करेंगे कि आपको यह निबंध ( Essay on Earthquake in Hindi – भूकंप पर निबन्ध ) पसंद आएगा।

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Essay on Earthquake in Hindi- भूकंप पर निबंध

In this article, we are providing Essay on Earthquake in Hindi. भूकंप   पर निबंध- भूकंप का अर्थ, भूकंप से ग्रस्त क्षेत्र, भूकंप का तांडव नाच.

मानव आदि युग से प्रकृति के साहचर्य में रहता आया है। प्रकृति के प्रांगण में मानव को कभी माँ की गोद का सुख मिलता। है तो कभी वही प्रकृति उसके जीवन में संकट बनकर भी आती है। बसंत की सुहावनी हवा के स्पर्श से जहाँ मानव पुलकित हो उठता है तो वहीं उसे ग्रीष्म ऋतु की जला देने वाली गर्म हवाओं का सामना भी उसे करना पड़ता है। इसी प्रकार मनुष्य को तेज । ऑधियों, अतिवृष्टि, बाढ़, भूकंप आदि प्राकतिक आपदाओं का सामना भी करना पड़ता है।

“भूकंप’ का अर्थ है भू का काँप उठना अर्थात पृथ्वी का डाँवाडोल होकर अपनी धुरी से हिलकर और फटकर अपने ऊपर । विद्यमान जड़ और चेतन प्रत्येक प्राणी और पदार्थ को विनाश की चपेट में ले लेना तथा सर्वनाश का दृश्य उपस्थित कर देना। जापान में तो  अकसर भकंप आते रहते हैं जिनसे विनाश के दृश्य उपस्थित होते हैं। यही कारण है कि वहाँ लकड़ी के घर बनाए जाते हैं। भारतवर्ष में भी भूकंप के कारण अनेक बार विनाश के दृश्य उपस्थित हुए हैं। पूर्वजों की जबानी सना है कि भारत के कोटा नागत (पश्चिम सीमा प्रांत, अब पाकिस्तान में स्थित एक नगर) स्थान पर विनाशकारी भूकंप आया। यह भकंप इतनी तीव्र गति से आया। कि नगर तथा आस-पास के क्षेत्रों के हजारों घर-परिवारों का नाम तक भी बाकी नहीं रहा था।

विगत वर्षों में गढ़वाल, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में विनाशकारी भूकंप आया था जिससे वहाँ जन-जीवन तहस-नहस हो गया था। पहले गढ़वाल के क्षेत्र में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। वह एक पहाडी क्षेत्र है, जहाँ भूकंप के अटकों के कारण पहाड़ियाँ खिसक गई थीं, उन पर बने मकान भी नष्ट हो गए थे। हजारों लोगों की जानें गई थीं। वहाँ की विनाशलीला से विश्व भर के लोगों के दिल दहल उठे थे। उस विनाशलीला को देखकर मन में विचार उठते हैं कि प्रकृति की लीला भी कितनी अजीब है। वह मनुष्य को बच्चों की भॉति अपनी गोद में खिलाती हुई एकाएक पतना का रूप धारण कर लेती है। वह मनुष्य के घरों को बच्चों के द्वारा कच्ची मिट्टी के बनाए गए घरौदों की भाँति तोडकर बिखरा देती है और मनुष्यों को मिट्टी के खिलौनों की भॉति कुचल डालती है। गढ़वाल के क्षेत्र में भूकंप के कारण वहाँ का जन-जीवन बिखर गया था। कुछ समय के लिए तो वहां का क्षेत्र भारतवर्ष के अन्य क्षेत्रों से कट-सा गया था।

इसी प्रकार महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में आए भूकप के समाचार मिले। यह भकप इतना भयंकर और विशाल था कि धरती। में जगह-जगह दरारें पड़ गई। हजारों लोगों की जानें चली गई। चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। सरकार की ओर से पहुँचाई जाने । वाली सहायता के अतिरिक्त अनेक सामाजिक संस्थाओं और विश्व के अनेक देशों ने भी संकट की इस घड़ी में वहाँ के लोगों की हर प्रकार से सहायता की, किंतु उनके अपनों के जाने के दुःख को कम न कर सके। धीरे-धीरे समय बीतता गया और समय ने वहाँ के लोगों के घाव भर दिए। वहाँ का जीवन सामान्य हुआ ही था कि 26 जनवरी, 2008 को प्रातः आठ बजे गुजरात में विनाशकारी भूकंप ने फिर विनाश का तांडव नृत्य कर डाला। वहाँ रहने वाले लाखों लोग भवनों के मलबे के नीचे दब गए थे। मकानों के मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को निकालने का काम कई दिनों तक चलता रहा। कई लोग तो 36 घंटों के बाद भी जीवित निकाले गए थे। वहाँ भूकंप के झटके कई दिनों तक अनुभव किए गए थे। इस प्राकृतिक प्रकोप की घटना से विश्वभर के लोगों के दिल दहल उठे थे। कई दिनों तक चारों ओर रुदन की आवाजें सुनाई देती रहीं। अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य अपने साधनों के अनुरूप समान रूप से सहानुभूति और सहृदयता दिखा रहे थे तथा पीड़ितों को राहत पहुँचा रहे थे। यह भूकंप कितना भयानक था इसका अनुमान वहाँ पर हुए विनाश से लगाया जा सकता है। वहाँ के लोगों ने बहुत हिम्मत से काम लिया और अपना कारोबार फिर जमाने में जुट गए। लोग अभी प्रकृति की भयंकर आपदा से उभर ही रहे थे कि 8 अक्तूबर, 2005 को कश्मीर और उससे लगते पाकिस्तान के क्षेत्र में भयंकर भूकंप आया। संपूर्ण क्षेत्र की धरती काँप उठी थी। पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण पहाड़ों पर बसे हुए गाँव-के-गाँव तहस-नहस हो गए। साथ ही ठंड सर्दी के प्रकोप ने वहाँ के लोगों को और भी मुसीबत में डाल दिया। कड़कती सदी में वहाँ के लोगों को खुले मैदानों में रहना पड़ा। सरकार ने हैलीकाप्टरों व अन्य साधनों से वहाँ के लोगों की सहायता के लिए सामान पहुँचाया। भारतीय क्षेत्र की अपेक्षा पाकिस्तान क्षेत्र में अत्यधिक हानि हुई। लाखों लोगों को जान से हाथ धोने पड़े। प्राणियों को जन्म देने वाली और उनकी सुरक्षा करने वाली प्रकृति माँ ही उनकी जान की दुश्मन बन गई थी।

प्राकृतिक प्रकोप के कारण पीड़ित मानवता के प्रति हमें सच्ची सहानुभूति रखनी चाहिए और सच्चे मन से हमें उनकी सहायता करनी चाहिए। जिनके प्रियजन चले गए, हमें उनके प्रति सद्व्यवहार एवं सहानुभूति दिखाते हुए उनके दुःख को कम करना चाहिए। उनके साथ खड़े होकर उन्हें धेयं बधाना चाहिए। यही उनके लिए सबसे बड़ी सहायता होगी। ।

कितनी अजीब है यह प्रकृति और कसे अनोखे हैं उसके नियम, यह समझ पाना बहुत कठिन कार्य है। भूकंप । देखकर आज भी एक सनसनी-सी उत्पन्न हो जाती है। किन्तु प्रकृति की अज़ीव-अजीव गतिविधियों के साथ-साथ मानव की हिम्मत और साहस की भी प्रशंसा किए बिना नहीं रहा जा सकता कि वह प्रत्येक प्राकृतिक आपदा का सदा ही साहसपर्वक मुकाबला करता आया है।

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भूकंप क्या है आने के कारण बचाव के उपाय और प्रभावित क्षेत्र | Earthquake In Hindi

भूकंप क्या है आने के कारण बचाव के उपाय और प्रभावित क्षेत्र Earthquake In Hindi : पृथ्वी के आंतरिक भाग में होने वाली किसी घटना से जब पृथ्वी के किसी भाग पर कम्पन होता है तो उसे  भूकंप (Earthquake) कहते है. 

भूकंप प्राकृतिक आपदाओं  में बहुत विनाशकारी आपदा है, इसमे कुछ ही क्षणों में विनाशकारी परिवर्तन हो जाता है. भूकंप की तीव्रता सिस्मोग्राफ यंत्र के द्वारा रिक्टर पैमाने पर मापा जाता है.

भूकंप क्या है कारण बचाव उपाय प्रभावित क्षेत्र Earthquake In Hindi

भूकंप क्या है आने के कारण बचाव के उपाय और प्रभावित क्षेत्र | Earthquake In Hindi

रिएक्टर पैमाने को चार्ल्स रिक्टर ने विकसित किया था. इन्ही के नाम से निर्मित इस यंत्र का नाम रिक्टर है. इस रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता  1 से 12 तक मापी जाती है.

रिक्टर पैमाने पर  भूकंप की तरंगो की तीव्रता 5 तक मापी जाए तो इसे सामान्य भूकंप कहा जाता है. जैसे जैसे तीव्रता की मात्रा बढ़ती जाती है, भूकंप महाविनाशकारी रूप ले जाता है.

भूकंप क्या है (what is earthquake in hindi)

भूकंप एक आकस्मिक व विनाशकारी परिघटना है जिसके कारण जहाँ सैकड़ो मकान धराशायी हो जाते है. वही अनगिनत व्यक्ति असमय ही काल कलवित हो जाते है.

भूकंप शब्द का अर्थ है पृथ्वी का हिलना, पृथ्वी के गर्भ में होने वाली किसी हलचल के कारण धरातल का कोई भाग अचानक हिलने लगता है तो उसे भूकंप कहते हैं.

सामान्यतः पृथ्वी में लगातार कम्पन होते रहते है. परन्तु अधिकांश कम्पन बहुत हल्के होते है और उनका पता ही नहीं चलता है. इन कम्पनों का जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता हैं.

भूकंप आने के कारण (The Causes of Earthquakes In Hindi)

पृथ्वी पर विवर्तनिक गतियों का परिणाम ही भूकंप है, विवर्तनिक गतियो में भूप्लेटों का प्रवाह भूकम्प का कारण बनता है. पृथ्वी पर संतुलन की प्रक्रिया निरंतर जारी रहने से भी भूकंप की उत्पति होती है.

इस प्रक्रिया से भू पटल पर भ्रश व उत्थान होते रहते है. पृथ्वी से निरंतर निकलने वाली ऊष्मा से संकुचन होता है, यदपि यह प्रक्रिया बहुत लम्बे काल तक चलती है पर संकुचन भी भूकंप की उत्पति का कारण बनता जा रहा है.

  • अविवार्तनिक कारण- प्राकृतिक क्रियाएं भी भूकंप के लिए जिम्मेदार होती हैं जब ज्वालामुखी मर एक उदगार निकलते है और भूस्खलन की क्रिया होती हैं तो पृथ्वी की सतह पर कम्पन होते हैं. इसके अतिरिक्त बम फटने अथवा भारी वाहनों व रेलगाड़ियों की तीव्र गति से भी कम्पन पैदा होते है किन्तु इस प्रकार के भूकंप बहुत हल्के होते हैं.
  • विवर्तनिक कारण- पृथ्वी के गर्भ में अधिक गहराई तक तापमान और वायु दाब अधिक होता हैं. यह दाब सभी स्थानों पर समान नहीं होता है. कभी कभी यह दाब इतना अधिक बढ़ जाता है. जिसके कारण गहराई पर स्थित चट्टाने मुड़ने लगती हैं. और अन्तः टूट जाती हैं. इस कारण पृथ्वी पर कम्पन होता है और भूकंप आता हैं. चट्टानों के टूटे भाग अथवा नीचे की ओर सरक जाते हैं. इसे भ्रंश कहते हैं.

भारत में भूकंप प्रभावित क्षेत्र (Earthquake Sensitive / affected area in India)

भारत में आए भूकम्प को देखा जाए तो ज्ञात होता है, कि उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र व उसकी तलहटी में सर्वाधिक नवीन मोडदार पर्वत है. हिमालय नविन मोडदार पर्वत का हिस्सा है. जो अभी भी उत्थान की अवस्था में है.

हिमालय क्षेत्र में अभी भी संतुलन की स्थति स्थापित नही हुई है. अतः इस क्षेत्र में सर्वाधिक भूकंप आते है. प्रायद्वीप पठार को स्थिर भूभाग माना जाता रहा है.

लेकिन कोयना व लातूर के भूकम्पों के बाद इस क्षेत्र को भी भारत में भूकंप प्रभावित क्षेत्र में माना गया है. यही स्थति गुजरात के कच्छ भुज क्षेत्र की है.

साधारणतया भूकंप कही भी आ सकते है किन्तु कुछ क्षेत्र इसके लिए लिए विशेष संवेदनशील होते हैं. दुर्भाग्यवश जिन क्षेत्रों में अधिक जैव विविधता पाई जाती है. भारत में वे क्षेत्र भूकंप के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं.

ये भाग पृथ्वी के दुर्बल क्षेत्र होते हैं. जहाँ वलय भ्रंश जैसी हिलने की घटनाएं अधिक होती हैं. सरंचना के अनुसार भारत को निम्नलिखित तीन भूकंप क्षेत्रों में बांटा जा सकता हैं.

  • हिमालय का भूकंप क्षेत्र- यह भूभाग अभी भी अपने निर्माण स्थिति में हैं. इसलिए भूसंतुलन की दृष्टि से यह एक अस्थिर भाग है, जिससे प्रायः भूकंप अनुभव किये जाते हैं.
  • उत्तरी मैदान का भूकंप क्षेत्र- इस मैदान की रचना असंघटित जलोढ़ मिटटी से हुई हैं. और इसमें हिमालय के निर्माण के समय संपीडन के कारण कई दरारें बन गई. भूग्रभित हलचलों से यह प्रदेश जल्दी कम्पित हो जाता हैं.
  • दक्षिण के पठार का भूकंप क्षेत्र- यह भारत का प्राचीन और कठोर स्थल खंड हैं जो भूसंतुलन की दृष्टि से स्थिर माना जाता है. इसलिए इस क्षेत्र में बहुत कम भूकंप आते हैं. जिनमें 1967 का कोयला भूकंप और 1993 का लातूर भूकंप महत्वपूर्ण हैं.

भूकंप पर निबंध/पैराग्राफ (Short Essay / Paragraph on Earthquake In Hindi)

उत्पति के आधार पर विभिन्न आपदाओं को दो भागों में विभाजित किया जाता है, मानव जनित और प्राकृतिक. दोनों प्रकार की आपदाओं में भी बड़ी जन माल के नुकसान की संभावनाएं रहती है.

प्रकृति को मानव का वरदान कहा जाता है, लेकिन कई बार अपने लालच के चलते मानव अपने तरीके से प्रकृति का अहित करता है, जिसके चलते प्राकृतिक आपदाओं का भुगतान भी चुकाना पड़ता है.

प्रमुख प्रकृति जनित आपदाओं में भूकंप सूनामी भूस्लखन और बाढ़ सर्वाधिक नुकसान पहुचाते है. भूकंप एक ऐसी ही प्राकृतिक आपदा है,

जो कुछ ही क्षणों में विनाशकारी परिवर्तनों का ऐसा स्वरूप मानव समाज के सम्मुख उपस्थित कर देती है कि ह्रद्य दहल जाता है. भूकंप आने से हजारों जाने काल का ग्रास बन जाती है.

पृथ्वी की सतह पर दरारे पड़ जाती है, आवागमन के मार्ग टूट जाते है. भवन रेत के ढेर की तरह भरभरा कर गिर जाते है. नहरों पुलों व बाँधो को क्षति पहुचती है, ये समस्या भविष्य में खतरे का पर्याय बनती जा रही है.

भूकंप से बचाव व प्रबंधन (earthquake rescue equipment list)

  • सरकारी एवं सामाजिक स्तर पर (At government and social level) – भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के उपरान्त सभी सरकारे तत्काल राहत व सहायता उपलब्ध करवाती है. भारत जैसे देश में जहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है जनहानि अधिक होती है. अतः आवश्यक है कि देश में भूकंप लेखन एवं मापन यंत्रो का जाल बिछा दिया जाए ताकि भूगर्भ में होने वाली हलचलों का ज्ञान होता रहे. जब कभी तीव्र गति से भूकंप आने की संभावना बने तो क्षेत्र विशेष के लोगों को प्रचार माध्यमों के द्वारा सजग कर दिया जाए.
  • व्यक्तिगत स्तर पर (At the personal level)- भूकंप आने का सहसा अहसास होने पर व्यक्तिगत स्तर पर तत्काल कुछ निर्णय लेने चाहिए, जैसे घर से बाहर सभी को खुली जगहों पर जाने के लिए कहना, बिजली तथा गैस बंद कर देनी चाहिए, पालतू जन्तुओं को बंधन मुक्त कर देना चाहिए. ये उपाय इसलिए किये जाने संभव है कि तीव्र भूकंप आने से पहले कुछ समय तक हलके झटके लगते है जिससे मानव को भूकंप आने का आभास हो जाता है. संकट की घड़ी में व्यक्ति को एकता का परिचय देना आवश्यक हो जाता है, जाति, धर्म व सम्प्रदाय के बन्धनों से मुक्त होकर मानवीय सवेदना के कारण मुक्त हस्त से तन मन धन से सहायता करनी चाहिए. इससे मानवीय सम्बन्ध और प्रगाढ़ होते है. भारत में लोगों ने मिलकर हमेशा पीड़ितो की सहायता करने के अनुपम उदहारण प्रस्तुत किये है.

भूकंप का प्रबंधन (Earthquake management)

भूकंप से बचाव के उपायों को प्रमुखतः तीन चरणों में बांटा जा सकता हैं.

भूकंप पूर्व क्या करे-

  • भूकंप से मकानों में क्षति न हो अथवा कम क्षति हो इसके लिए स्थानीय प्रशासन के अंतर्गत कार्यरत अभियंताओं एवं विशेयज्ञों की देखरेख में भूकंप प्रतिरोधी निर्माण किया जाए.
  • घरों में पौधों भारी बर्तनों में न लटकाएं, भूकंप के समय इनके गिरने से भारी नुक्सान हो सकता हैं.
  • ज्वलनशील पदार्थो को सुरक्षित बक्से मे रखे.
  • स्कूल व महाविद्यालय स्तर पर बच्चों को भूकम्प के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए.
  • भूकंप संभावित क्षेत्रों में सरकारी व स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता से बचाव दल बनाएं, जो समय आने पर लोगों की मदद की जा सके.
  • संकटकालीन सूचनाओं को रेडियों व टेलिविज़न पर निरंतर प्रसारित करे.
  • भूकंप की संभावना होने पर खुले स्थान में चले जाना चाहिए.

भूकंप के समय क्या करे

  • भूकंप आने पर खुला स्थान, जहाँ भवन पेड़, बिजली के खम्भे और पावर लाइन ना हो दूर सुरक्षित स्थान ढूढे.
  • आवश्यकतानुसार दवाइयां, कम्बल व अन्य सामग्री के वितरण का प्रबंध किया जाए.
  • ज्वलनशील वस्तुओं व पदार्थों का उपयोग न करे.
  • यदि गैस लिक होने की सम्भावना हो तो बिल्डिंग छोड़ दे तब तक सुनिश्चित न हो जाए कि गैस लीक नहीं होगी, आप माचिस न जलाए और न ही बिजली को चालू करने का प्रयास करे.
  • घायलों को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाएं.

भूकंप के बाद क्या करे

  • मृतकों व पशुओं के अवशेषों को एकत्रित करे व उसका निस्तारण करे.
  • अस्थायी शरण स्थल का प्रबंध करे. भोजन व पानी की अशिर्त का प्रबंध करे और पानी की आपूर्ति पुनर्स्थापन करे.
  • दूरसंचार व सूचना की निरन्तरता बनाए रखने हेतु लाइन का पुनरुद्धार करे.
  • परिवहन सम्बन्धी संचार व्यवस्था पुनर्स्थापना करे.
  • तुरंत कंट्रोल रूम की स्थापना की जाए, यह व्यवस्था जिला मुख्यालय ब्लोक मुख्यालय और प्रभावित क्षेत्र पर की जाए.
  • चोरी और लूट आदि की संभावनाओं को कम करने के लिए सेना व पैरा मिलिट्री फोर्सेस से सहायता ली जावे.
  • घायलों की चिकित्सा के लिए मोबाइल यूनिट का प्रबंध किया जाए.

भूकंप के प्रकार (Types of earthquakes)

साधारणतया भूकंप के प्रकारों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है, जो प्रभाव के आधार पर कम से अधिक की ओर होता है.

  • साधारण भूकंप (Normal earthquake)- इसमें पृथ्वी का भूपटल बढ़ता है, मतलब विवर्तनिक (टेकटॉनिक) प्लेट्स एक दुसरे के करीब आ जाती है परिणामस्वरूप पृथ्वी पर कम्पन्न होने लगता है.
  • रिवर्स भूकंप (Reverse earthquake) – इस प्रकार के भूकम्प में भूपटल संकुचित होती है, प्लेट्स एक दुसरे अलग अलग होती है इसके कारण पृथ्वी पर कम्पन होता है |
  • स्ट्राइक स्लिप भूकंप (Strike Slip Earthquake) – इस स्थति में भूपटल पर परते सीधी रेखा में खिसक जाती है, जिसके परिणाम पृथ्वी पर कम्पन होता है.

भूकंप का वर्गीकरण (Classification of earthquake in hindi)

भूकंप का वर्गीकरण, भूकंप की गहराई के आधार पर किया जाता हैं. जो मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं.

  • सतही भूकंप- इस तरह के भूकम्पों के भूकंप की मूल की गहराई एक किलोमीटर तक स्थित होती हैं.
  • सामान्य भूकम्प- इस तरह के भूकंप के भूकंप की मूल 50 किलोमीटर तक गहराई होती हैं.
  • मध्यवर्ती भूकंप- इस भूकम्पों के भूकंप की मूल गहराई 50 से 250 किलोमीटर तक होती हैं.
  • पातालीय भूकंप- इस तरह के भूकम्पों की गहराई धरातल के नीचे 250 से 700 किलोमीटर के बीच होती हैं. इस प्रकार के भूकंप कम ही आते हैं.

भूकंप के प्रभाव (effects of earthquake in hindi language)

प्राकृतिक आपदाओं में भूकंप सबसे अधिक भीषण और विनाशकारी होते हैं. भूकंप कुछ ही क्षणों में ही व्यापक जनहानि का कारण बन जाते हैं. अतः मानव भूकम्पों को सदैव अभिशाप मानता आया हैं.

भूकंप के प्रकोप से इमारतें ध्वस्त हो जाती है. भूमि धस जाती हैं, दरारे पड़ जाती हैं. समुद्र में तूफ़ान आते हैं. और प्रायः जन व धन दोनों की व्यापक हानि होती हैं.

इन हानियों के अतिरिक्त भूकंप के कुछ लाभ भी होते हैं. भूकंप तरंगों का अध्ययन पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी पाने में सहायक होता हैं.

समुद्र तट के धसनें से अच्छी खाड़ी तथा बन्दरगाह बन जाते हैं. भूकंप के कारण धरातल पर कई नवीन भू आकारों जैसे द्वीप, झीलें तथा बंदरगाह भी बन जाते हैं. जो कि मानव के लिए कभी कभी बड़े उपयोगी सिद्ध होते हैं.

  • प्राकृतिक आपदा परिभाषा प्रकार 
  • बाढ़ क्या है कारण प्रभाव उपाय
  • सुनामी पर निबंध हिंदी में

उम्मीद करता हूँ दोस्तों भूकंप क्या है आने के कारण बचाव के उपाय और प्रभावित क्षेत्र Earthquake In Hindi का यह लेख आपको पसंद आया होगा.

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One comment

very very good and informative. Global impotant information.Each school should teach student.

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An Essay on Earthquake : भूकंप पर हिन्दी निबन्ध

Meena Bisht

  • April 21, 2020
  • Hindi Essay

निबंध हिंदी में हो या अंग्रेजी में , निबंध लिखने का एक खास तरीका होता है। हर निबंध को कुछ बिंदुओं (Points ) पर आधारित कर लिखा जाता है। जिससे परीक्षा में और अच्छे मार्क्स आने की संभावना बढ़ जाती है।

हम भी यहां पर “ भूकंप / An Essay on Earthquake” पर निबंध को कुछ बिंदुओं पर आधारित कर लिख रहे हैं। आप भी अपनी परीक्षाओं में निबंध कुछ इस तरह से लिख सकते हैं। जिससे आपके परीक्षा में अच्छे मार्क्स आयें।

An Essay on Earthquake 

भूकंप पर हिन्दी निबन्ध.

प्रस्तावना (Introduction)

भूकंप क्या हैं (What is Earthquake)

  • भूकंप आने के कारण (Causes of Earthquake)
  • भूकंप की तीब्रता

भूकंप की तीव्रता नापने की इकाई 

  • भूकंप आने में सुरक्षा के उपाय 
  • भूकंप से तबाही 

भूकंप , बाढ़  प्रकृति के सबसे रौद्र रूप है। भूकंप का एक जोरदार झटका पलक झपकते ही महा विनाश का कारण बन जाता है। भूकंप की अवधि होती तो कुछ सेकेंड या मिनट की ही है। लेकिन इतने समय में ही पूरी पृथ्वी में हाहाकार मच जाता है। 

पृथ्वी जब अचानक ही डोलने या हिलने लगती है। उसे आम भाषा में भूकंप कहा जाता है।भूकंप की अवधि तो कुछ सेकेंड की ही होती है। पर इतने कम समय में ही मानो प्रलय आ जाता हैं। ये भूकंप भी अलग अलग तीव्रता वाले होते हैं।

हालाँकि कम तीव्रता वाले भूकंप ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। लेकिन ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप पल भर में वर्षों की अथाह मेहनत से बनायी हर चीज को पलभर में ही नेस्तनाबूद कर देती हैं। 

क्यों आते हैं भूकंप (An Essay on Earthquake)

भूकंप आने के दो कारण प्रमुख हैं। प्राकृतिक कारण और मानव निर्मित कारण। 

1 . प्राकृतिक कारण

वैज्ञानिकों के अनुसार हमारी धरती चार परतों से बनी है। इनर कोर , आउटर कोर , मैन्टल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहा जाता है। लिथोस्फेयर करीब करीब 50 किलोमीटर की एक मोटी परत होती है।

लेकिन यह परत कई वर्गों में विभाजित रहती है।इन वर्गों को टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। वैसे ये प्लेटें धरती से करीबन 45 से 50 किलोमीटर नीचे स्थित होती हैं।

लेकिन ये प्लेट्स अपनी जगह पर स्थिर नहीं होती हैं। ये अक्सर क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों दिशाओं में खिसकती रहती हैं। इस वजह से इनमें से कुछ प्लेटों कभी एक दूसरे के करीब आ जाती है , तो कुछ एक दूसरे से दूर भी चली जाती हैं।

जब ये प्लेटों एक दूसरे के करीब आती हैं , तो कभी-कभी ये प्लेट्स आपस में टकरा भी जाती हैं। जिससे भूकंप की स्थिति पैदा हो जाती हैं। भूकंप का केंद्र जितनी गहराई में होगा उसका प्रभाव पृथ्वी के ऊपर उतना कम होगा। 

जब भी भूकंप आता है। पृथ्वी के नीचे उसका एक निश्चित केंद्र होता है। लेकिन केंद्र से कई किलोमीटर दूर तक भूकंप के उस कंपन को महसूस किया जा सकता है। 

एक अन्य मत के अनुसार जब पृथ्वी के अन्दर तरल पदार्थ अधिक मात्रा में गर्म हो जाते हैं। उस वक्त तरल पदार्थों के गर्म होने से अत्यधिक भाप बन जाती हैं। जब पृथ्वी के अन्दर इस भाप का दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है। तो यही भाप अपनी पूरी शक्ति के साथ पृथ्वी की ऊपरी सतह को धक्का देती है। तब भूकंप आता है।और पृथ्वी हिलने लगती है। 

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2 . मानव निर्मित कारण

भूकंप आने के मानव निर्मित कारण भी होते हैं। जैसे ज्वालामुखी के फटना या बड़ी मात्रा में भूस्खलन का होना , माइनिंग टेस्टिंग , विशाल बांधों का निर्माण , नाभिकीय खदानों में विस्फोट का होना और नाभिकीय परीक्षण करने से भी भूकंप आने की संभावनाएं रहती हैं। 

पौराणिक धर्मग्रंथों की मान्यता के अनुसार हमारी यह पृथ्वी सहस्त्र फन वाले भगवान शेषनाग के सिर पर टिकी हुई है। जब जब पृथ्वी में पाप में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है।तब शेषनाग सिहिर उठते हैं। और उसका परिणाम भूकंप के रूप में आता है। 

भूकंप की तीब्रता 

वैसे तो पूरी दुनिया में हर साल हजारों भूकंप आते हैं। उनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो ज्यादा नुकसान हो जाते हैं। क्योंकि भूकंप भी अलग-अलग तीव्रता वाले होते हैं। 

कम तीव्रता वाले भूकंप (जैसे 2 से 3 मेग्नीट्यूड ) को भूकंप के केंद्र के आसपास के क्षेत्र विशेष में ही महसूस किया जाता है। इससे अधिक नुकसान भी नहीं होता लेकिन अगर यही भूकंप ज्यादा तीव्रता वाला जैसे 5 मेग्नीट्यूड या उससे ज्यादा हो तो , भूकंप के केंद्र से कई हजार किलोमीटर दूर तक इसे महसूस किया जा सकता है। 

भूकंप की तीव्रता नापने के लिए सीसमोमीटर/ सीसमोग्राफ का प्रयोग किया जाता है।भूकंप की गणना रिएक्टर स्केल में होती है। रिएक्टर स्केल में 2 से 3 मेग्नीट्यूड तक की तीव्रता वाले भूकंप को सामान्य माना जाता है। 5 या उससे ज्यादा वाले को विनाशकारी माना जाता है। और इसी में सबसे ज्यादा नुकसान होता है।

भूकंप की तीव्रता मापने वाले रिएक्टर स्केल को अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्स रिएक्टर ने 1935 में बनाया था।

भूकंप से होने वाली तबाही (An Essay on Earthquake)

  • भूकंप इतना शक्तिशाली होता है कि हमारी धरती का सीना ही फाड़ देता है।प्रकृति का यह तांडव बसे बसाये नगरों को खंडहर में बदल देता है।
  • नदियों के प्रवाह को उलट देता है। कहीं पर्वत की ऊंचाई को सागर की गहराई में छुपा देता है।तो कहीं सबसे गहरे समुद्र को समतल भूमि में बदल देता है।
  • भूकंप के कारण ही बेजान मरुस्थल भी सुन्दर रमणीय स्थल में बदल जाते हैं।तो कही स्वर्ग से सुन्दर जगह सुनसान वीरानों में बदल जाती हैं।
  • कहीं-कहीं पर भूकंप से धरती में दरारें पड़ जाती हैं। सीमेंट , ईट , लोहे की मजबूत बुनियादों से बनी हुई इमारतों भी पल भर में चकनाचूर हो जाती हैं। छोटे और कच्चे मकान ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं। 
  • भूकंप के रूप में पृथ्वी में होने वाली जरा सी हलचल भी हजारों मनुष्यों , जीजन्तुओं की जान की दुश्मन बन जाती है। कहीं हजारों परिवार एक क्षण में खत्म हो जाते हैं। तो कहीं हजारों लोग पलक झपकते ही बेघर हो जाते हैं। भूकंप की चपेट में आकर पूरे गांव के गांव या शहर के शहर देखते खंडहर में बदल जाते हैं। 
  • भूकंप आने से मजबूत सड़कों टूट जाती हैं। उद्योग धंधे , कल कारखाने , जनजीवन सब अस्त व्यस्त व नष्ट हो जाता है। देखते ही देखते लाखों की संपत्ति मिट्टी में मिल जाती हैं।
  • भूकंप के आने से बड़े बड़े पुल , बांध आदि क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
  • भूकंप के कारण कई पहाड़ों में भूस्खलन और हिमस्खलन भी होता है।
  • भूकंप मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पर्वतीय क्षेत्रों में यह ज्यादा नुकसान पहुंचाता है
  • भूकंप समुद्र के अंदर हो तो सुनामी भी आ सकती है।

कई प्राचीन संस्कृतियों खत्म , नई संस्कृतियों का जन्म

भूकंप के कारण कई समृद्ध व शक्तिशाली प्राचीन संस्कृतियों मिट्टी में मिल गई। इतिहास इस बात का साक्षी हैं। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे उन्नत व समृद्ध प्राचीन संस्कृति किसी भारी भूकंप का शिकार होने के कारण ही भूगर्भ में समा गई थी। लेकिन इन्हीं विनाशकारी भूकंपों ने इस धरती पर कई नई संस्कृति और सभ्यता व नये खूबसूरत स्थानों को भी जन्म दिया है।

यह भी पढ़ें … Essay on Forest Conservation in Hindi

विज्ञान के पास नहीं कोई विकल्प (An Essay on Earthquake)

 हालांकि आज विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है। कुछ क्षेत्रों में जैसे मौसम , तूफान या वर्षा या   बर्फवारी से संबंधित सटीक भविष्यवाणियां के लिए यंत्रों का आविष्कार कर लिया गया है। जिसके द्वारा आने वाले संकट का पहले ही पता चल जाता है।

ले किन विज्ञान की इतनी तरक्की के बाबजूद आज भी भूकंप के आने से संबंधित जानकारी के लिए कोई पुख्ता उपकरण तैयार नहीं हो पाया है।यानि भूकंप से संबंधित ऐसा कोई भी उपकरण या यंत्र अभी तक विकसित नहीं हुआ है जिससे भूकंप आने से पहले ही पता चल सके कि किन-किन क्षेत्रों में भूकंप आ सकता है।

वैज्ञानिकों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। अगर ऐसा कोई उपकरण बना लिया जाता , जिससे भूकंप आने से पहले ही उसका पता चल पाता , तो हजारों जानों को समय रहते बचाया जा सकता हैं।लेकिन इस क्षेत्र में अभी विज्ञान के हाथ खाली के खाली ही हैं। 

 लेकिन भूकंप आने के बाद तो रिक्टर स्केल पर सिर्फ भूकंप की तीव्रता को नापा जाता है।लेकिन तब तक वह तबाही मचा चुका होता है। 

  भूकंप आने में सुरक्षा के उपाय (An Essay on Earthquake)

भूकंप कब आ जाए , किसी को इसका पता नहीं होता है।ऐसे में जब भूकंप आ जाए। तो अपनी सुरक्षा के लिए कुछ बातों में ध्यान देना आवश्यक हैं। 

  • हालांकि भूकंप को रोकना इंसानों की बस की बात नहीं है। लेकिन समय के साथ-साथ अब ऐसी आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर भवन या इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। जो भूकंप रोधी हो या अधिक तीव्रता वाले भूकंप के झटकों को सहन कर सके। सबसे पहले भूकंप रोधी मकानों का निर्माण होना चाहिए किया जाना अति आवश्यक है। और यह समय की मांग भी है। 
  • भूकंप का पता चलते ही घरों से बाहर निकलकर तुरंत खुले मैदानों या सड़कों में आ जाना चाहिए। 
  • भूकंप आने पर किसी ऊंची इमारत या बिजली के खम्भों के आसपास न खड़े हों।
  • काँच से बनी वस्तुओं , खिड़कियों , कमजोर दीवारों से दूर रहें।
  • किसी मजबूत फर्नीचर से नीचे बैठ जाएँ।  
  • भूकंप के समय लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • बिजली आदि से संबंधित किसी भी उपकरण का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।बिजली का मैन स्विच बन्द कर देना चाहिए।
  • घर के गैस सिलेंडर को बंद कर देना चाहिए।
  • भूकंप आने वक्त वाहन ना चलाएं। अगर वाहन चला भी रहे हो तो , तुरंत वाहन बंद कर वाहन से बाहर निकल आए। 
  • किसी भी कच्चे मकान , पहाड़ी , नदी , तालाब , समुद्र के आसपास खड़े ना होए। 

भारत में भूकंप की स्थिति  

भूकंप एक भयंकर प्राकृतिक आपदा है। जो दुनिया के किसी भी हिस्से में कभी भी आ सकती हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत को भूकंप की संवेदनशीलता के लिहाज से चार जोन में बांटा गया है। जोन-2 में दक्षिण भारतीय क्षेत्र को रखा गया है , जो भूकंप के लिहाज से सबसे कम संवेदनशील है। 

उसके बाद जोन – 3 में मध्य भारत को रखा गया है। जोन – 4 में दिल्ली व एनसीआर के इलाकोे और उत्तर भारत के कुछ मैदानी क्षेत्रों को रखा गया है। और जोन- 5 में हिमालई क्षेत्र व पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ क्षेत्रों को शामिल किया गया है।यही इलाका भूकंप के लिहाज से सबसे ज्यादा खतरनाक व संवेदनशील माना गया है।

भारत की यह भूमि भी कई दिल दहला देने वाले भूकंपों को झेल चुकी है।कोलकाता , असम , बिहार अंजार , अंडमान निकोबार , हिमाचल प्रदेश में आये भूकंप तो भुलाए नहीं भूलते।

26 जनवरी 2001 में भूकंप ने पूरे गुजरात में कहर ढाया था , जिसमें भारी जानमाल का नुकसान हुआ था। कुछ वर्ष पूर्व उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के पहाड़ी इलाके उत्तरकाशी को भूकंप ने दहला कर रख दिया था।  जिसमें हजारों लोग असमय ही मृत्यु के मुंह में समा गए। 

सैकड़ों लोग घायल हुए और कुछ लोग मलबे के नीचे कई दिनों तक दबे रहे।चल अचल संपत्ति का नुकसान हुआ सो अलग। 

यह भी पढ़ें। … Essay on Teacher’s Day in Hindi

Some More Information About  Earthquake

  • दुनिया के कुछ हिस्सों में भूकंप अक्सर आते रहते हैं।अलास्का उन्हीं में से एक है।अलास्का एक ऐसा राज्य है जहां पर सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं। इसको भूकंप के लिहाज से “सिस्मीकली एक्टिव क्षेत्र” भी माना जाता है। इस क्षेत्र में 5 से 7 मेग्नीट्यूड के भूकंप आना आम बात है। और हर 12 से 14 साल में करीब एक बार 8 मेग्नीट्यूड या उससे ज्यादा का भूकंप भी आता है। 
  • इसके अलावा जापान में भी बहुत अधिक भूकंप आते हैं। लेकिन यहाँ ज्यादातर भूकंप ज्वालामुखी के फटने से आते हैं। इसीलिए वहां पर अधिकतर भूकंप रोधी या लकड़ियों के घरों का निर्माण किया जाता है। 
  • वैसे हमेशा भूकंप कुछ सेकंड के लिए आता है। लेकिन 2004 में हिंद महासागर में भूकंप की अवधि लगभग 10 मिनट रही।
  • भूकंप के आने से पहले पानी के स्रोतों जैसे नहरों , नालों , तालाबों और नदियों आदि में से एक विचित्र किस्म की खुशबू आने लगती है। इसका कारण पृथ्वी के अन्दर की गैस का बाहर आना बताया जाता है। और जमीन के नीचे स्थित पानी के स्रोतों का तापमान भी अचानक से बढ़ जाता है। 
  • वैज्ञानिकों के अनुसार हर साल लाखों भूकंप आते हैं।लेकिन इन सब की तीव्रता बहुत कम होती है। जिस वजह से लोगों को इसका पता ही नहीं चलता।
  • एक सर्वे के अनुसार नेशनल अर्थक्वेक इनफॉरमेशन सेंटर हर साल करीब 20,000 से ज्यादा भूकंप की रिकॉर्डिंग करता है। लेकिन इनमें से लगभग 100 के करीब ही ऐसे भूकंप होते हैं जिनसे कम या ज्यादा नुकसान होता है। 
  • ऐसा माना जाता है कि ज्यादा तीव्रता वाला भूकंप आने से जो ऊर्जा निकलती है , वह 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में डाले गए परमाणु बम से निकली उर्जा से करीब 100 गुना ज्यादा होती है। 

भूकंप पीड़ितों की सहायता पुण्य कार्य 

भूकंप के विनाश के बाद राहत कार्य शुरू हो जाते हैं। कुछ सामाजिक स्वयंसेवी संस्थाएं और कुछ परोपकारी लोग अपनी जान की बाजी लगाकर दूसरों की सहायता करने को दौड़ पड़ते हैं। अनेक तरीकों से भूकंप पीड़ितों को मदद पहुंचाई जाती है।

सरकार भी इस भीषण दुर्घटना के बाद हर संभव सहायता में जुटी रहती हैं। लेकिन यही वह समय होता हैं जब इंसान को हाथ खोलकर अन्न , वस्त्र , औषधि आदि से पीड़ितों की सहायता करनी चाहिए।

  उपसंहार (An Essay on Earthquake)

भूकंप जैसी महा विपत्ति के समय मनुष्य की मानवता की परीक्षा भी होती है।ज्यादा तीब्रता वाले भूकंप सब कुछ पल भर में विनाश कर देते हैं। लेकिन यह मानव स्वभाव है कि वह अंत के बाद भी आरंभ की तरफ चल पड़ता है। और जीवन की नई शुरुवात करने लगता हैं।

लोग उसी विनाश में बचे हुए चीजों को फिर से समेट कर अपना नया जीवन आरंभ करना शुरू कर देते हैं। यह जीवन सदा चलायमान है।यह कथन उस वक्त सत्य होता हुआ दिखता है। हम भूकंप पीड़ितों की सहायता करें और मानवता का परिचय दें। बस हम इतना ही कर सकते हैं।  

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भूकंप पर अनुच्छेद | Paragraph on Earthquake in Hindi

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भूकंप पर अनुच्छेद | Paragraph on Earthquake in Hindi!

धरती के अचानक हिलने की घटना भूकंप कहलती है । जब पृथवि के आंतरिक गर्म पदार्थों के कारण हलचल उत्पन्न होती है तो भूकंप की स्थिति उत्पन्न होती है । कभी भूकंप हल्की तो कभी भारी तीव्रता का होता है । कम तीव्रता वाला भूकंप आने पर क्षेत्र-विशेष में धरती केवल हिलती महसूस होती है लेकिन इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता । अधिक तीव्रता वाला भूकंप कभी-कभी भारी क्षति पहुँचाता है । कच्चे और कमजोर मकान ढह जाते हैं, चल-अचल संपत्ति का भारी नुकसान होता है । सैकड़ों मनुष्य मकान के मलबे में दबकर मर जाते हैं । हजारों घायल हो जाते हैं । लोग बेघर-बार होकर अस्थायी निवास में रहने के लिए विवश होते हैं । परिस्थितियों के सामान्य बनाने में कई महीने या कई वर्ष लग जाते हैं । भूकंप को रोका नहीं जा सकता परंतु सावधानियाँ बरतने से इससे होने वाली क्षति जरूर कम की जा सकती है । इससे बचाव के लिए भूकंपरोधी भवनों का निर्माण करना चाहिए । भूकंप आने पर घबराना नहीं चाहिए बल्कि आवश्यक सावधानियाँ बरतनी चाहिए । भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, इसका मिल-जुलकर मुकाबला करना चाहिए ।

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भूकंप पर निबंध – Essay On Earthquake In Hindi

Essay On Earthquake In Hindi

Essay On Earthquake In Hindi :   इस लेख में 3 अलग-अलग प्रकार के भूकंप पर निबंध  लिखे गए हैं। यह निबंध हिंदी भाषा में लिखा गया है और शब्द गणना के अनुसार व्यवस्थित किया गया है। आप नीचे दिए गए पैराग्राफ में 100 शब्दों, 200 शब्दों, 400 शब्दों, 500 और 1000 शब्दों तक के निबंध प्राप्त कर सकते हैं।

हमने अपने भूकंप पर निबंध   के बारे में बहुत सी बातें तैयार की हैं। यह कक्षा 1, 2,3,4,5,6,7,8,9 से 10वीं तक के बच्चों को भूकंप पर निबंध  लिखने में मददगार होगा।

भूकंप पर निबंध 1000 शब्द – Essay On Earthquake In Hindi In 1000 words

पृथ्वी ग्रह अपने समय के दौरान कई परिवर्तनों से गुजरा है। इनमें से अधिकांश परिवर्तन प्राकृतिक आपदाओं का परिणाम हैं जो आमतौर पर होती हैं। प्रदूषण, ओजोन परत का क्षरण और ग्लोबल वार्मिंग आज बड़े खतरे बन गए हैं।

हालाँकि, कुछ प्राकृतिक आपदाएँ वास्तव में लंबे समय से ग्रह के लिए खतरा बनी हुई हैं। प्राकृतिक आपदाएँ कई रूपों में होती हैं, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, सुनामी, सूखा, तूफान, चक्रवात आदि।

इन प्राकृतिक आपदाओं में से एक जो पारिस्थितिकी तंत्र को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा सकती है, वह है भूकंप।

भूकंप क्या है?

पृथ्वी की सतह के हिलने को भूकंप के रूप में जाना जाता है। यह सतह के अचानक कंपन के रूप में होता है और यह एक प्राकृतिक घटना है। यह मूल रूप से पृथ्वी के आंतरिक भाग से ऊर्जा की रिहाई के कारण होता है।

निस्संदेह, भूकंप अक्सर नहीं आते हैं, लेकिन वे भयानक प्राकृतिक आपदाएं हैं और जीवन और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई प्रकार के भूकंप आ सकते हैं; उनमें से कुछ कमजोर हैं और किसी का ध्यान नहीं जाता है, जबकि अन्य मजबूत और गंभीर हैं।

भूकंप के बारे में सबसे खतरनाक बात यह है कि यह आमतौर पर अप्रत्याशित होता है और बिना किसी संकेत के आता है। भूकंप आमतौर पर टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण आते हैं, और उनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर मापी जाती है।

भूकंप के प्रकार

मुख्य रूप से चार अलग-अलग प्रकार के भूकंप होते हैं, जैसे टेक्टोनिक, ज्वालामुखी, पतन और विस्फोटक।

टेक्टोनिक भूकंप

पृथ्वी की पपड़ी असमान आकार और आकार की चट्टानों के स्लैब से बनी है; इन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स के रूप में जाना जाता है। इन टेक्टोनिक प्लेटों में ऊर्जा संग्रहित होती है, जिससे वे एक-दूसरे की ओर धकेलती या खींचती हैं।

यह दबाव आसन्न प्लेटों के बीच बनता है, जिससे फॉल्ट लाइन का निर्माण होता है। यह एक अधिकेंद्र या फोकस के रूप में कार्य करता है, जिससे सतह की ओर तरंगों के रूप में ऊर्जा भेजी जाती है। इससे सतह पर भूकंप आता है।

भूकंप को संक्षिप्त करें

यह एक प्रकार का भूकंप है जिसमें कमजोर प्राकृतिक परिमाण होता है। इस प्रकार के भूकंप आमतौर पर गुफाओं और खानों में आते हैं। खानों में किसी भी भूमिगत विस्फोट से भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं जो एक छोटे भूकंप का कारण बन सकती हैं।

ज्वालामुखीय भूकंप

नाम के अनुसार ज्वालामुखीय भूकंप ज्वालामुखी गतिविधि के कारण होता है। ढहने वाले भूकंप की तरह, ये भी कमजोर परिमाण के होते हैं। ज्वालामुखियों से मैग्मा के विस्फोट के कारण हल्की तीव्रता का भूकंप।

भूकंप के कारण

भूकंप आमतौर पर पृथ्वी की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण होते हैं। टेक्टोनिक प्लेट के टूटने या आसन्न टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने से ऊर्जा निकलती है जो भूकंपीय तरंगें पैदा करती है। टेक्टोनिक प्लेट्स कभी स्थिर नहीं होती हैं और हमेशा चलती रहती हैं।

जब भी दो टेक्टोनिक प्लेट एक-दूसरे को छूती हैं तो यह भूकंप का हॉटस्पॉट बन जाता है। ये टेक्टोनिक प्लेट्स एक दूसरे के खिलाफ फिसलने लगती हैं, और ये कभी भी आसानी से नहीं खिसकती हैं। प्लेटों के बीच घर्षण होता है और भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है।

यह ऊर्जा भूकंपीय तरंगों में परिवर्तित हो जाती है। भूकंपीय तरंगें तब सतह की ओर यात्रा करती हैं, जिससे भूकंप आते हैं।

उपरिकेंद्र, स्थान और परिमाण की गहराई के आधार पर, भूकंपीय तरंगों में पृथ्वी की सतह को फाड़ने की क्षमता होती है, इस प्रकार यह इमारतों और अन्य प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों को नुकसान पहुँचाती है। जिन क्षेत्रों में यह गतिविधि होती है उन्हें आमतौर पर भूवैज्ञानिक दोष के रूप में जाना जाता है।

दो विवर्तनिक प्लेटों के प्रतिच्छेदन के भाग को भ्रंश रेखा के रूप में जाना जाता है, जो कुछ मीटर से सैकड़ों किलोमीटर तक भिन्न हो सकती है। भूकंप में ये सबसे आम बिंदु हैं।

Essay On Earthquake In Hindi

भूकंप के प्रभाव

भूकंप ज्यादातर समय मानव सभ्यताओं को कोई सीधा नुकसान नहीं पहुँचाते हैं। लेकिन वे पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न हिस्सों को बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं और संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

पृथ्वी की सतह या जमीन का विस्थापन भूकंप के सबसे खतरनाक प्रभावों में से एक है। यह इमारतों को भी गिरा सकता है, सभी प्रकार की संपत्ति को नुकसान पहुँचा सकता है, और इससे जानमाल का नुकसान भी हो सकता है।

नुकसान सड़कों और पुलों को अवरुद्ध कर सकता है और कुछ महीनों के लिए विनाशकारी समस्याएं पैदा कर सकता है। भूकंप विद्युत शक्ति और गैस लाइनों को भी प्रभावित कर सकते हैं और इससे आग लगने की भी संभावना रहती है।

द्रवीकरण के रूप में जानी जाने वाली घटना के लिए भूकंप भी जिम्मेदार है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जब किसी बुनियादी ढांचे के नीचे की रेत और मिट्टी बहुत नरम हो जाती है और भूजल के साथ मिल जाती है।

यह भूमिगत क्षेत्र को ढीला करता है और समग्र संरचना को जमीन के नीचे कई फीट तक गिरने का कारण बन सकता है। यह संरचना के गिरने का कारण भी बन सकता है। एक विशिष्ट भूकंप बांधों, तटबंधों और नदी के किनारों को महत्वपूर्ण क्षति या टूट-फूट का कारण बन सकता है। इससे आस-पास के क्षेत्र में पानी छोड़ दिया जाता है। यह पानी तब क्षेत्र में बाढ़ लाएगा, कृषि भूमि और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाएगा।

जब भूकंप समुद्र के नीचे आता है, तो यह संभवतः सूनामी का कारण बन सकता है। सूनामी की लहरें बहुत पानी लाती हैं और अपने रास्ते में कुछ भी नष्ट करने के लिए काफी मजबूत होती हैं।

भूकंप में आपदा प्रबंधन

जबकि भूकंप एक अपरिहार्य घटना है, उन्हें टाला नहीं जा सकता है। हालांकि, सावधानियां और आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।जब तक झटके बंद नहीं हो जाते तब तक लोग घर के अंदर ही रहें। इसके अलावा, यदि आपके पास खुली जगह है, तो वहां होना चाहिए क्योंकि ऐसी जगहों में जोखिम कम होता है। हल्की तीव्रता के भूकंप के लिए फर्नीचर, अलमारियों, भारी उपकरणों, वस्तुओं और अन्य वस्तुओं से भी दूर रहना चाहिए। मेज या बिस्तर जैसी सख्त वस्तु के नीचे आश्रय लें और किसी मजबूत और स्थिर चीज को पकड़ें। उचित बिजली और गैस कनेक्शन के लिए जाँच करें। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि सिस्टम में कोई लीक न हो। मुख्य बिजली स्विच और मुख्य गैस वाल्व की ठीक से जाँच की जानी चाहिए। मुद्दों के लिए अच्छी तरह से तैयार होने के लिए, नियमित रूप से प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों के पास मामूली चोटों के इलाज के लिए प्राथमिक चिकित्सा किट होनी चाहिए। ऐसे आयोजनों के लिए मेडिकल स्टाफ को हमेशा तैयार रहना चाहिए।

भूकंप एक विनाशकारी प्राकृतिक घटना है जो भयानक क्षति का कारण बन सकती है। इसे किसी भी तरह से टाला नहीं जा सकता, लेकिन इसकी तैयारी के उपाय जरूर किए जा सकते हैं।

भूकंपों के बारे में अच्छी बात यह है कि वे केवल कुछ सेकंड तक ही रहते हैं। मुझे आशा है कि भूकंप पर यह निबंध आपको पसंद आया होगा।

भूकंप पर 10 पंक्तियाँ – 10 Lines On Essay On Earthquake In Hindi

1. भूकंप पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों के हिलने का परिणाम है। जब वे किसी प्रकार की हलचल करते हैं तो उसका प्रभाव पृथ्वी की सतह पर पड़ता है और परिणामस्वरुप भूकंप आता है।

2. यह इतना विनाशकारी हो सकता है और जमीन में मौजूद बड़ी-बड़ी इमारतों और ढांचों को नष्ट कर सकता है। कभी-कभी यह मानव और पशु जीवन को भी नष्ट कर देता है।

3. छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं। बड़े भूकंपों में, पृथ्वी की सतह बहुत अधिक हिल जाती है और यह मानव जीवन खोने, बहुत सारी इमारतों और अन्य चीजों को नष्ट करने का कारण बन जाती है।

4. ‘सीस्मोलॉजी’ नाम से एक अध्ययन है जहां आप भूकंप के बारे में विवरण जान सकते हैं। यह अध्ययन आपको इसकी आवृत्ति, आकार और स्थायी समय जानने देगा।

5. यह समुद्र के नीचे भी हो सकता है और सुनामी का कारण भी बन सकता है. यह समुद्र के नीचे भी विशाल और विनाशकारी है।

6. यह कई और प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकता है। भूकंप के समय भूस्खलन एक बड़ा खतरा होता है. विशेषकर पहाड़ी उस समय बहुत जोखिम भरा होता है।

7. इससे आग लग सकती है, जबकि बिजली की लाइनें और बिजलीघर इसके कारण नष्ट हो जाते हैं। और यह सुनामी का कारण भी बन सकता है।

8. बहुत सारे बांध हैं जो कई शहरों और इलाकों को बाढ़ से बचा रहे हैं। भूकंप इस बांध को नष्ट कर सकता है और भीषण बाढ़ ला सकता है.

9. दुनिया ने कई बड़े भूकंपों का सामना किया है जिनमें जान-माल की हानि हुई है।

10. जान-माल के नुकसान से छुटकारा पाने के लिए हर किसी को इसके बारे में उचित जानकारी होना जरूरी है।

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नेपाल भूकंप पर निबंध | Essay on Nepal Earthquake in Hindi

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नेपाल भूकंप पर निबंध | Essay on Nepal Earthquake in Hindi!

Essay # 1. भूकंप का अधिकेन्द्र (Epicenter of Nepal Earthquake):

नेपाल में भूकंप-25 अप्रैल , 2015:

प्रमुख भूकंप- दिनांक 25 अप्रैल, 2015, 11.41 पूर्वान्ह (आईएसटी)

रिक्टर पैमाने पर तीव्रता – 7.9

ADVERTISEMENTS:

भूकंप का अधिकेंद्र – बारपक ग्राम, लामजंग के समीप (गोरखा जिला)

मृतकों की संख्या – 15,000

घायल – 50,000

प्रभावित लोग – 8 मिलियन से अधिक

पश्चवर्ती आघात (Aftershock) – 12, मई 12.37 अपराह्न

तीव्रता – 7.3, गहराई 15 कि.मी.

दोलखा जिले का कोहाटी ग्राम, काठमांडू से 80 किमी. पूर्व तथा एवरेस्ट पर्वत से 50 किमी. दक्षिण पश्चिम में । जब चट्‌टानें अपनी नम्य सीमा से अधिक दबाव सहन नहीं कर पाती है तो वे टूटकर अचानक हिलन-डुलने लगती है, जिससे पृथ्वी पर कंपन होता है । प्लेट के किनारों के आसपास आते है जैसे महासागरीय रिज, (भिन्न प्लेट सीमाएं) महासागरीय खाइयाँ (अभिसारी प्लेट के किनारे) और महासागरीय रिज पर रूपांतरण भ्रंश ।

Essay # 2. अभिसरण प्लेट सीमाएं व नेपाल भूकंप ( Convergent Plate Boundaries and Nepal Earthquakes):

पृथ्वी पर सर्वाधिक व्यापक और प्रचंड भूकंप अधीनीकरण क्षेत्र के साथ भूकंप प्लेट के किनारों पर आते हैं । जिस क्षेत्र में प्लेटें टकराती हैं, वे जटिल भूगर्भिक प्रक्रियाओं के क्षेत्र हैं जहाँ आग्नेय गतिविधि, परतीय विकृति तथा पर्वत निर्माण जैसी गतिविधियाँ घटित होती रहती हैं ।

कब कौन-सी विशेष प्रक्रिया अभिसरण प्लेट सीमा के साथ सक्रिय है यह अभिसरण प्लेटों की सीमाओं की टकराहट की प्रक्रिया में शामिल पर्पटी के प्रकार पर निर्भर है । यदि दोनों अभिसरण प्लेटों में महाद्वीपीय पर्पटी (भारतीय व यूरेशियाई प्लेटें) होती हैं तो दोनों में से कोई भी मेंटल में नहीं समा सकता, यद्यपि एक कुछ समय हेतु दूसरे को अधिरोहित कर लेता है ।

अभिसरण प्लेटे, सियाल, से निर्मित हैं । सियाल पदार्थ इतने उत्प्लावक हैं कि ये सिमा जैसे घने मेंटल इद में नहीं डूब सकते । ऐसी दशा में, दोनों महाद्वीपीय समूह संपीडित हो जाते हैं तथा महाद्वीप अंततः एक महाद्वीप खंड में जोड़ बनाते हुए एक पर्वत श्रृंखला में साथ मिल जाते हैं । नेपाल का भूकंप भारतीय प्लेट के यूरेशियाई प्लेट के साथ अभिसरण का परिणाम था ।

प्रमुख सीमा भ्रंशन पर या उसके समीप (लघु हिमालय तथा बाहय हिमालय या शिवालिक) भ्रंशन के परिणामस्वरूप 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें भारतीय प्लेट ने यूरेशियाई प्लेट को आप्लावित कर दिया ।

(1) भूकंपविज्ञानियों के अनुसार इस भ्रंश पर भारतीय प्लेट यूरेशियाई प्लेट को उत्तर पूर्व की और हिमालय पर्वत की ऊँची श्रृंखला की ओर घुमाते हुए 45mm/वर्ष की दर से समाहित कर रही है । जहाँ पर अधीनीकरण की दर उच्च व आकस्मिक है वहाँ पर उच्च तीव्रता के भूकंप घटित होते हैं ।

मानचित्रण पर आधारित प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार भूकंप की तीव्रता नेपाल के 39 जिलों के 8 मिलियन लोग इससे प्रभावित रहे हैं, तथा इनमें से लगभग 2 मिलियन लोग व्यापक रूप से प्रभावित ग्यारह जिलों में रहते हैं ।

भूआकृतयों में परिवर्तन ( Changes in Landforms):

इस भूकंप ने काठमांडू के नाचे की भूमि को लगभग 3 मीटर (10 फीट) दक्षिण की ओर खिसका दिया है । एवरेस्ट पर्वत प्रमुख सीमा भ्रंश रेखा के प्रत्यक्षतः ऊपर नहीं है । परिणामतः इसकी ऊँचाई ज्यादा प्रभावित नहीं हुई है । जबकि पर्वत के शीर्ष पर हिमस्खलन, भूस्खलन तथा ग्लेशियरों के खिसकने से भारी क्षति हुई है ।

जान एवं माल की क्षति:

इस भूकंप से नेपाल में लगभग 1.4 लाख इमारतें पूर्णतया नष्ट हो गयीं, तथा 1.2 लाख घर आशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए । कुल मिलाकर 10,395 सरकारी इमारतें धराशायी हो गई तथा 13,000 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई । 12वीं शताब्दी का विरासत नगर भक्तापुर (काठमांडू के दक्षिण पूर्व में स्थित) लगभग पूर्णतया नष्ट हो गया । इस नगर को पुनर्निर्माण करने में वर्षा का समय लगेगा ।

चिकित्सकीय जटिलताएं:

दूरदराज क्षेत्रों में रह रहे भूकंप के पीडितों को बचाने व उनकी अन्य प्रकार से सहायता करने में कई चिकित्सकीय समस्याओं व जटिलता का सामना करना पड़ा । कई बार तो मानव शरीर के विभिन्न अंग मलबे में दबे मिले जिनमें ग्रैंगीन हो गया था । शरीर के इस भाग को जब रक्त की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होती तो यह लगभग सड़ जाता है जिससे इसमें गैंग्रीन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है ।

Essay # 3. भूकंप व एवरेस्ट के रोही ( Earthquake and the Everest Climbers):

पिछले 81 वर्षों में आए सर्वाधिक खतरनाक भूकंप से हिमस्थलन की घटना के द्वारा एवरेस्ट पर्वत के बेस कैंप पर (5230 की ऊँचाई) 20 से अधिक पर्वतारोही मारे गए । सैकड़ों इसमें लापता हो गए ।

समुचित बचाव व राहत रणनीति तथा सतर्क आपदा नीति के अभाव में हजारों लोगों को ठंडे में भूखों रहना पड़ा । वास्तव में, सरकार इस तीव्रता की आपदा से निपटने के लिए तैयार नहीं थी । नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोयराला ने माना कि बचाव, राहत व अनुसंधान कार्यवाही अप्रभावी व अपर्याप्त थी । भूकंप के बाद का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण था । नेपाल सरकार के प्रयत्नों को खराब मौसम ने बाधित किया । काठमांडू में वर्षा हुई तथा भूकंप के पश्चात ओलावृष्टि हुई ।

Essay # 4. नेपाल सरकार की तैयारी ( Nepal’s Preparedness of Government ):

नेपाल सरकार ऐसी विपदा से निपटने के लिए तैयार नहीं थी । उसे कम्बलों, खाद्‌य सामग्री, जल, डाक्टर, चिकित्सा, ड़ाक्टर तथा हेलीकाप्टर के लिए विदेशी सहायता पर निर्भर रहना पडा । भारत के प्रधानमंत्री ने ‘आपरेशन मैत्री’ का अभियान संचालित किया । अन्तत: चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इरान, पाकिस्तान, तुर्की, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, यूके, यू.एस.ए. ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया ।

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने लगभग 1.4 मिलियन लोगों को नेपाल में तुरत सहायता की आवश्यकता पर बल दिया । ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकेन्द्र (गोरखा जिला) में दूरदराज के क्षेत्रों की स्थिति नाजुक थी । अधिकेन्द्र के आसपास के गाँवों में पहुँचना मुश्किल था क्योंकि भूस्खलन की वजह से उनसे संपर्क टूट गया था । गोरखा जिला का लगभग 90% भाग नष्ट हो गया था । एक पीड़ित शेरपा के शब्दों में ”जो मृत थे वे जा चुके हैं, जो जिंदा हैं वे नर्क में जी रहे हैं ।”

गोरखा मार्शल परंपरा का गढ नष्ट हो गया । उस मंदिर का विनाश जहाँ गोरखाओं ने अपनी मार्शल परम्परा 400 वर्ष पूर्व प्रारंभ की थी, से यहाँ के निवासियों के गौरव को प्रचंड आघात पहुँचा है । 1636 में निर्मित गुरु गोरखनाथ को समर्पित पुण्य स्थल गोरखा दरबार का एक भाग है । यह चिंता का विषय है कि गुरु गोरखनाथ का मंदिर नष्ट हो गया । इसी स्थान पर गुरु जी की पलटन (गोरखा सेना) बनायी गयी थी ।

नेपाल का भूकंप भारत के लिए चेतावनी की घंटी:

भूकंप के विशेषज्ञों के अनुसार भूकंप से किसी की मृत्यु नहीं होती वरन इन मौतों के लिए इमारतें व उनकी निर्माण संरचनाएँ उत्तरदायी हैं । वास्तव में, पुराने घर व इमारतों आदि के गिर जाने से लोग इनके नीचे दब जाते हैं । जिससे भारी मात्रा में जान-माल की भारी क्षति होती है । नेपाल की भूकंप त्रासदी ने एक बार फिर भारत को भी इस तरह की भीषण आपदाओं से बचने के लिए उपाय अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है ।

भूकंपवेत्ता एम.एल. शर्मा की राय में ”भारतीयों का मानना है कि भूकंप से अन्य देशों के लोग ही प्रभावित होते हैं ।” भारत के कल क्षेत्रफल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उच्च भूकंपीय क्षेत्र (4&5) के अंतर्गत है । भारत के उच्च जोखिम वाले शहर है ।

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अल्मोड़ा, देहरादून, मसूरी, नैनीताल, चंढ़ीगढ़, चम्बा, डलहौजी, शिमला, जम्मू, श्रीनगर, गंगटोक, गुवाहाटी, आइजोल तथा समस्त मिलियन बड़े व छोटे नगर जिसमें भारत के वृहत मैदान की ग्रामीण बस्तियाँ शामिल हैं । मात्र एक मुख्य भूकंप कई लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैलकर अत्यंत विनाशकारी हो सकता है तथा लाखों लोगों के जीवन को खतरे में डाल सकता है ।

अफगानिस्तान से अरुणाचल प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बीच एक भीषण तबाही की भविष्यवाणी की गयी है । राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, यदि उत्तरी भारत में भीषण भूकंप आता है तो एक मिलियन से अधिक लोग अपनी जान खो सकते हैं । दुर्भाग्यवश, एक बड़ा भूकंप आने वाला है पर हम नहीं जानते यह कब व कैसे आयेगा ।

भारत में सर्वप्रथम जिससे क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है वह है सिविल इंजीनियरी शिक्षा । हालांकि भारत में लगभग 85 प्रतिशत घर ऐसे हैं जहाँ पक्की/अनपक्की ईटों या पत्थरों से मकानों की दीवारें बनी हैं, सिविल इजीनियरिंग व आर्किटेक्ट केवल 3 प्रतिशत पूर्वस्नातक इन पदार्थों का प्रयोग करते हैं । (भारत की जनगणना 2011) । वास्तव में यह अनिवार्य है कि सिविल इंजीनियर गृह निर्माण के पारम्परिक विन्यास में भी प्रशिक्षित हों ।

अन्य प्रमुख चिंता का विषय है बहुमंजिला इमारतें जिनकी संख्या शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती जा रही है । इन इमारतों का निर्माण आर सी सी बीम तथा खंभों के फ्रेमवर्क पर निर्मित होते हैं जिनमें बाद में ईट की दीवारें जोड़ी जाती हैं । इस प्रकार की बहुमंजिला इमारतों के निर्माण में सामग्री चयन व उसकी गुणवत्ता के संदर्भ में कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए ।

जनता को नियमित रूप में भूकंप व उसके परिणामों के संबंध में व्यापक रूप से अवगत कराया जाना चाहिए । जापान के विद्यालयों व कॉलेजों के पैटर्न पर हमारे देश के स्कूलों व कॉलेजों में भी प्रदर्शनी का आयोजन कर यह बताया जाना चाहिए कि कैसे हम भूकंप जैसी विपदा में स्वयं को सुरक्षित कर सकते हैं ।

जितनी जल्दी हो हमारे नीति-नियोजक, निर्माता सिविल इंजीनियर, वास्तुशिल्पी तथा आपदा प्रबंधन के प्राधिकारी इन मुद्दों को हलकर लें उतना ही अच्छा है ।

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CBSE 10th, 12th boards 2024 Live : Exam for the day concludes

CBSE Board Exams 2024 Live: Class 10th, Class 12th exam updates

CBSE Board Exam 2024 Live Updates: Central Board of Secondary Education (CBSE) conducted the Class 10th Urdu, Bengali, Tamil, Telugu, Marathi, Gujarati, Manipuri and French papers, along with Class 12th papers of Food Production, Office Procedures and Practices, Design and Electronics & Hardware subjects today, February 20. These examinations started at 10:30 am and ended at 12:30 or 1:30 pm, depending on the length of the paper. ...Read More

Follow this live blog for latest updates on CBSE Class 10th and 12th board examinations.

CBSE Board 2024: Exam timing

CBSE Class 10 and Class 12 final exams are being held in single shift, starting at 10:30am. Depending on the length of the papers, these exams continue till 1:30pm or 12:30 pm.

CBSE Board Exam 2024: New notice released

Central Board of Secondary Education (CBSE) has released a new notice on the official website. The notice urges the Centre Superintendents to ensure strict compliance of instructions provided by board during the February 21 examinations. Direct link to check notice.

CBSE Board exam 2024: 39 lakh candidates appearing for exam

Over 39 lakh students from India and 26 other countries will appear for the Class 10th and 12th board exams this year.

CBSE board exams 2024: Exam dates

Both CBSE Class 10th and CBSE Class 12th final examinations started on February 15. Class 10 examinations will end on March 13 and Class 12 exams on April 2

CBSE board exams 2024: Paper analysis will be shared here

Students can check theanalysis of CBSE Class 10 and Class 12 papers here after the end of the exams.

CBSE board exams 2024: Papers underway

CBSE Class 10th and 12th final exams scheduled for February 20 are underway. Some papers will end at 12:30 pm and the others will continue till 1:30 pm.

CBSE Class 10th, 12th final exam 2024: Wear uniform, carry ID card

Candidates should wear their school uniforms with ID cards while appearing for the examination. They have to carry printouts of their admit cards, without which entry will not be given inside the exam hall.

CBSE Board Exams 2024 Live Updates: Class 12th papers scheduled for today

February 20 Class 12 papers:

Class 12th Food Production, Office Procedures and Practices, Design and Electronics & Hardware.

CBSE Board Exams 2024 Live Updates: Class 10th papers scheduled for today

February 20 Class 10 papers:

Urdu, Bengali, Tamil, Telugu, Marathi, Gujarati, Manipuri and French.

CBSE 12th Exam 2024: Papers tomorrow

• Food Production

• Office Procedures and Practices

• Electronics and Hardware

CBSE Class 10 Exam 2024: Papers tomorrow

  • Urdu Course A
  • Urdu Course B

CBSE 12th Exam 2024: Hindi paper easy to moderate

CBSE 12th Exam 2024 Hindi paper concluded. The Class 12 eamination Hindi Paper was easy to moderate.

CBSE Board exam 2024: Student reaction from Chandigarh

Students of Class X and Class XII after their CBSE exams for Hindi and Sankrit at Kerala School in New Delhi on Monday (Vipin Kumar/HT photo)

Manisha, a student at Government Model Senior Secondary School (GMSSS) Sector 18 who was present at GMSSS Sector 16 for the exam said that the exam was easier than she had expected. “It was easier than the sample papers. However, the passage in the exam was quite hard. After this exam I feel that the other exams will also be on the easier side.”

(Inputs from Rajanbir Singh, Chandigarh)

CBSE Board Exam 2024 Live Updates: Students' reaction on Class 12 Hindi paper

Malika Arora, a student of Lucknow Public School South City said, “Overall, it was a balanced paper and more or less based on concept application of the theory, and options were very close.” Aparna Singh, another student of LPS South City felt that the paper was moderate.

She said, “Objective questions were a bit confusing so it took a lot of time to figure out the correct answer but the writing section was very easy.” Sangeeta and Nidhi, again from LPS, South City said, “Overall the paper was average with only 2 or 3 tough questions and a bit lengthy.”

Manisha Tiwari, Hindi teacher of LPS South City said, “The overall quality of the board question paper was satisfactory. The writing and the comprehension sections were easy to attempt. In a nutshell, it was a moderate and scoring paper.”

Falak Faroouqui and Astha Omar of St Anjani's Public School Rajajipuram found the Hindi Class 12 Question paper unnecessarily lengthy. They said, “Questions did not follow the pattern of sample papers on the Board website and we were really under pressure in certain tricky ones. But overall it went smoothly because we were well prepared."

(HT Correspondent, Lucknow)

CBSE Class 12 Hindi paper analysis

The question paper was for 80 marks. The paper was moderate, balanced and average. The questions were mainly based as per CBSE guidelines. The questions were average. The paper pattern was similar to the CBSE Sample Paper for the Session 2023-24. MCQs were mostly easy.

– Shipra Das ( TGT Sanskrit ) at Silverline Prestige School, Ghaziabad

CBSE Class 12 Hindi Core analysis: Moderate paper with tricky MCQs

CBSE class 12 students in Lucknow were of the view that the Hindi core question paper was easy but the multiple-choice questions were tricky.

Students of GD Goenka Public School, Lucknow, were of the view that the question paper was largely easy. According to Saundrya D Nair, a student of class 12, "Paper was easy, but the MCQs were tricky and took time to be answered. Similar kinds of options were a little confusing. Overall, a standard paper".

Another student Yash said, "Objective questions were a bit tough but subjective questions were very easy, and all from the syllabus. Practice of sample papers developed the speed that helped in completing the paper on time".

Nancy also said that subjective questions were very easy but MCQs were tricky. Overall, they found the paper to be of moderate difficulty. Students attempted the paper well.

CBSE Class 10, 12 Board Exam 2024: Concludes

CBSE Class 10 Sanskrit and Class 12 Hindi papers have concluded. The examination was started at 10.30 am and ended at 1.30 pm today.

CBSE Board exams 2024 live updates: Paper analysis

Analysis of the CBSE Class 10 Sanskrit and Class 12 Hindi papers will be shared here after the examinations end.

CBSE board exam 2024: Paper timings

CBSE Class 10 Sanskrit and Class 12 Hindi papers started at 10:30 am. Both examinations will end at 1:30 pm.

CBSE Board Exam 2024 Live Updates: Board's notice to schools on how to send observations

Read: CBSE asks schools to send observations on board exam question papers

CBSE Board Exam 2024 Live Updates: Bring admit cards, wear uniforms

Students are advised to wear uniforms and bring their identity cards, along with their admit cards to the examination venue.

CBSE Board Exam 2024 Live Updates: Class 10th Sanskrit papers today

For Class 10 students, the board will conduct Sanskrit and Sanskrit (Communicative) papers from 10:30 am to 1:30 pm.

CBSE Board Exam 2024 Live Updates: Class 12th Hindi papers today

CBSE will hold the Class 12th final examination for Hindi Core and Hindi Elective subjects today, February 19. These examinations will begin at 10:30 am and end at 1:30 pm.

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COMMENTS

  1. Earthquake

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  2. भूंकप पर निबंध

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  4. Essay on Earthquake in Hindi भूकंप पर निबंध

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  5. भूकंप के बारे में जानिए सब कुछ, क्या, क्यों और कैसे?

    Essay on earthquake in hindi भूकंप को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि पृथ्वी के भूपटल में उत्पन्न तनाव के आकस्मिक मुक्त होने से धरती की सतह के हिलने की घटना भूकंप कहलाती है। इस तनाव के कारण हल्का सा कंपन उत्पन्न होने पर पृथ्वी में व्यापक स्तर पर उथल-पुथल विस्तृत क्षेत्र में तबाही का कारण बन सकती है।

  6. Earthquake In Hindi

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  9. भूकंप पर निबंध

    (1) सामान्य भूकम्प- 0-50 किमी. (2) मध्यवर्ती भूकम्प- 50-250 किमी. ADVERTISEMENTS: (3) गहरे या पातालीय भूकम्प- 250-700 किमी. भूकम्प के इस दौरान जो ऊर्जा भूकम्प मूल से निकलती है, उसे 'प्रत्यास्थ ऊर्जा' (Elastic Energy) कहते हैं । भूकम्प के दौरान कई प्रकार की भूकम्पीय तरंगें (Seismic Waves) उत्पन्न होती हैं जिन्हें तीन श्रेणियों में रखा जा सकता है: i.

  10. भूकंप पर निबंध

    भूकंप पर निबंध - Essay On Earthquake In Hindi. यद्यपि प्राकृतिक आपदा जब भी गुस्सा दिखाती है तो कहर ढहाए बिना नहीं मानती है। आकाश तारों को छू लेने वाला ...

  11. भूकंप पर निबंध

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  12. भूकंप पर निबंध

    भूकंप पर निबंध | Essay on Earthquake in Hindi भूकंप पर निबंध (250 Words) प्रकृति आपदा भूकंप एक खतरनाक आपदा है । धरती के अचानक हिलने से एक कंपन उत्पन्न होती है, इस घटना को भूकंप कहा ...

  13. भूकंप पर निबंध 10 लाइन

    An earthquake is a natural dis... This video is about 10 lines essay on "bhukamp" or earthquake in Hindi. All these lines are very easy to write and understand.

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    भूकंप पर निबन्ध | Essay on Earthquake in Hindi! 1. भूमिका: भूकंप का नाम लेते ही मन भय से काँप (Shiver) उठता है । जहाँ भूकंप होता है, वहाँ अनेक मकान ध्वस्त (Demolish) हो जाते हैं और मानव के ...

  15. (PDF) A STUDY AND ANALYSIS OF EARTHQUAKE IN INDIA

    Abstract. India is a seismically active region and experiences frequent earthquakes. Therefore, earthquake safety and prevention is of utmost importance in India. Recent studies have focused on ...

  16. भूकंप पर निबंध (Earthquake Essay In Hindi Language)

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  17. Essay on Earthquake in Hindi Language

    Here you will get Paragraph and Short Essay on Earthquake in Hindi Language / Bhukamp Essay in Hindi Language for students of all Classes in 100, 200, 300, 400 words. यहां आपको सभी कक्षाओं के छात्रों के लिए हिंदी भाषा में भूकंप पर निबन्ध मिलेगा। Essay on Earthquake in Hindi - भूकंप पर निबन्ध

  18. Essay on Earthquake in Hindi- भूकंप पर निबंध

    भूकंप पर निबंध- Essay on Earthquake in Hindi, मानव आदि युग से प्रकृति के साहचर्य में रहता आया है। प्रकृति के प्रांगण में मानव को कभी माँ की गोद का सुख मिलता। है तो कभी वही प्रकृति उसके जीवन में संकट बनकर भी आती है। Essay on bhukamp in hindi

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  21. भूकंप पर अनुच्छेद

    भूकंप पर अनुच्छेद | Paragraph on Earthquake in Hindi! धरती के अचानक हिलने की घटना भूकंप कहलती है । जब पृथवि के आंतरिक गर्म पदार्थों के कारण हलचल उत्पन्न होती है तो भूकंप की ...

  22. भूकंप पर निबंध

    पृथ्वी की सतह के हिलने को भूकंप के रूप में जाना जाता है। यह सतह के अचानक कंपन के रूप में होता है और यह एक प्राकृतिक घटना है। यह मूल रूप से पृथ्वी के आंतरिक भाग से ऊर्जा की रिहाई के कारण होता है।

  23. नेपाल भूकंप पर निबंध

    नेपाल भूकंप पर निबंध | Essay on Nepal Earthquake in Hindi! Essay # 1. भूकंप का अधिकेन्द्र (Epicenter of Nepal Earthquake): नेपाल में भूकंप-25 अप्रैल, 2015: प्रमुख भूकंप- दिनांक 25 अप्रैल, 2015, 11.41 पूर्वान्ह ...

  24. CBSE Class 12 Hindi Question Paper 2024, All SETs Download PDF

    Class 12 Hindi Question Paper 2024: Download here latest CBSE Class 12 Hindi Paper 2024 PDF to check your expected marks and result. ... CBSE Class 12 Practice Papers 2023-2024.

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    News News: Get the latest guidelines and instructions for CBSE Class 10 Hindi-A and Hindi-B exams 2024. Ensure strict compliance to avoid any discrepancies. Find last-minute tips and improve your ...

  26. CBSE Board Exam 2024 Live: Class 10th, 12th February 20 papers over

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